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विभिन्न तरह के कैंसर का कारण है टाइप 1 डायबिटीज

विभिन्न तरह के कैंसर का कारण है टाइप 1 डायबिटीज
Quick Bites
  • टाइप 1 डायबिटीज के ज्यादातर मरीज किशोर होते हैं।
  • इनको पेट, लिवर, पैंक्रियाज कैंसर होने की आशंका अधिक।
  • समय रहते कैंसर का पता चलने पर इलाज संभव है।
  • इन मरीजों को बहुत ज्यादा भूख का एहसास होता है।

डायबिटीज अपने आप में एक घातक बीमारी है। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों को अपनी जीवनशैली के विभिन्न किस्म के बदलाव करने पड़ते हैं। बहरहाल हाल ही में हुए एक शोध सर्वेक्षण से एक और बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों की समस्या और भी बढ़ गयी है। ताजा शोध से पता चला है कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को अन्य लोगों की तुलना में कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है।

कौन कौन से कैंसर

टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में पेट, लिवर, पैंक्रियाज, एंडोमीट्रियम, ओवेरी (अंडाशय) और किडनी का कैंसर होने की आशंका अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि टाइप 1 डायबिटीज के कारण कुछ कैंसर के खतरे कम भी हो जाते हैं। मसलन प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर।

टाइप 1 डायबिटीज

किन्हें हो सकता है कैंसर

ताज शोध अध्ययन में पांच देशों के आंकड़े शामिल किये गए हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फिनलैंड, स्कॉटलैंड और स्वीडन शामिल हैं। शोध से पता चलता है कि टाइप-1 डायबिटीज अधेड़ और बुजुर्गों की तुलना में बच्चों और युवाओं को होने की आशंका ज्यादा रहती है। कहने का मतलब है कि जो युवा और बच्चे टाइप 1 डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। यही नहीं जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ के पास सही समय पर जाना भी आवश्यक है। इसके अलावा अपनी जीवनशैली में किसी भी प्रकार की लापरवाही उनके लिए जानलेवा हो सकती है।

 

इलाज संभव है

ऐसा नहीं है कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीज जिन्हें कैंसर हो जाए, उसका इलाज नहीं हो सकता। लेकिन इसके लिए सही समय पर बीमारी का पता चलना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों का दावा है कि समय रहते यदि कैंसर का पत चल जाता है तो इलाज किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने टाइप-1 और कैंसर दोनों से पीडि़त नौ हजार से ज्यादा लोगों की रिपोर्ट के आधार पर इसका पता लगाया है।

 

क्या है टाइप 1 डायबिटीज

मधुमेह में अग्नाशय इंसुलिन नामक हार्मोन नहीं बना पता जिससे शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज के जरिये ऊर्जा नहीं मिल पाती। टाइप 1 डायबिटीज में रोगी के खून में ग्लूकोज का स्तर सामान्य रखने के लिए नियमित रूप से इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। इसे ‘ज्यूविनाइल ऑनसैट डायबिटीज’ के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग प्रायः किशोरावस्था में पाया जाता है। इस रोग के कारण मरीज का वजन भी काफी कम हो जाता है। दरअसल इसमें ऑटोइम्यूनिटी होती है जिस कारण ऐसा होता है। अतः मरीज को अपना विशेष ध्यान रखना होता है।

 

टाइप 1 मधुमेह के लक्षण

अधिक प्यास लगने की वजह से बार बार पेशाब आना इसके प्रमुख लक्षणों में एक है। इसके अलावा हर समय मरीज को भूख का एहसास बना रहता है। निरंतर खाना खाने के बाद भी वजन बढ़ता नहीं है अपितु कम होता रहता है। बिना वजह के थकान, मिचली, उल्टी के साथ, लगातार सिरदर्द का एहसास होता है।

 

 

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Written by
Meera Roy
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 09, 2016

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