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गर्भावस्था में तपेदिक की समस्या

गर्भावस्था में तपेदिक की समस्या
Quick Bites
  • गर्भावस्था में तपेदिक रोग होना सामान्य बात।
  • कमजोर इम्‍यून सिस्टम के कारण होता है ये।
  • आवश्यक अंतराल पर टीके जरूर लगवातें रहें।
  • तपेदिक के कारण गर्भस्थ शिशु पर दुष्प्रभाव।

तपेदिक किसी को भी किसी भी उम्र और अवस्था में हो सकता हैं। फिर चाहे वह बच्चा हो, स्वस्थ व्यक्ति हो या फिर वृद्घावस्था हो। इतना ही नहीं गर्भावस्था में भी तपेदिक होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं हैं। गर्भावस्था में तपेदिक उन महिलाओं को खासतौर पर होता है जो कि बहुत कमजोर हैं या फिर जिनका इम्‍यून सिस्टम कमजोर होता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्षयरोग के गर्भावस्था में क्या प्रभाव पड़ते हैं। इसके साथ ही क्या गर्भावस्था टी.बी.के होने वाले कारणों में से एक है यानी गर्भावस्था और तपेदिक में कुछ संबंध हैं। इतना ही नहीं गर्भावस्था में टी.बी के खतरे के बारे में जानना भी जरूरी है। तो आइए जानें गर्भावस्था में तपेदिक के बारे में तमाम बातें।

  • हालांकि यह भी सही है कि यदि गर्भावस्था के दौरान तपेदिक सक्रिय नहीं हैं तो महिला और होने वाले बच्चे को कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता।
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाले बच्चे और मां को टी.बी. से बचाने के लिए बीसीजी का टीका शुरूआती महीने में लगवा लेना चाहिए। इतना ही नहीं बीसीजी के दूसरा टीका नौ महीने के भीतर लगवाना और चाहिए और बीसीजी के तीसरे टीके को लगभग 6 महीने के अंतराल में लगवा लेना चाहिए।
  • क्या आप जानते हैं यदि महिला दूसरी बार गर्भवती हुई है और पहले के तीनों टीके महिला ने लगवा लिए हैं तो दूसरी बार में सुरक्षा की दृष्टि में महिला को केवल एक ही टीका लगवाने की जरूरत होती है।
  • गर्भावस्था में मादक पदार्थो का सेवन करने वाली महिलाओं को सामान्य गर्भवती महिलाओं के मुकाबले टी.बी होने की आशंका अधिक होती है।
  • क्या आप जानते हैं जिन महिलाओं को प्रजनन के दौरान या उससे पहले पेल्विक या श्रोणीय टी.बी.हो जाता हैं उन महिलाओं में बांझपन का खतरा अधिक होता है।
  • यदि गर्भवती होने से पहले महिला को टी.बी हो जाता है तो उनको तब तक गर्भधारण ना करने की सलाह दी जाती है, जब तक टी.बी का पूरा उपचार ना हो जाए। इससे मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे।




गर्भावस्था में तपेदिक

  • बच्चे में विकार – गर्भावस्था के दौरान टी.बी.होने से गर्भवती महिला को तो समस्या होती ही है साथ ही होने वाला बच्चा भी सामान्य बच्चों की तरह ना होकर कई तरह से विकारों से ग्रसित हो सकता है।
  • हेपेटाइटिस का खतरा- गर्भावस्था में तपेदिक होने से होने वाले बच्चे को जन्म से पहले और जन्म के बाद हेपेटाइटिस का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
  • बहरेपन का खतरा- यदि गर्भावस्था में तपेदिक होने पर एमिनोग्लाइकोसाइड्स (एसटीएम, केप्रिओमाइसिन, एमिकासिन) का सावधानी से प्रयोग ना किया जाए तो होने वाले बच्चे में बहरेपन का खतरा हो सकता है।
  • गर्भपात का खतरा- गर्भावस्था में तपेदिक होना आम बात है लेकिन यदि गर्भावस्था के दौरान तपेदिक का सही समय पर इलाज ना कराया जाए तो गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है।
  • गर्भवस्था संबंधित समस्याएं- गर्भावस्था के दौरान टी.बी. होने से महिला में होने वाली सामान्य समस्‍याएं और बढ़ जाती हैं क्योंकि तपेदिक के आम लक्षण जैसे लगातार खांसना, बलगम में खून आना गर्भावस्था के दौरान महिला को अधिक परेशान कर सकते हैं।

गर्भावस्था में तपेदिक रोग का इलाज संभव है। लेकिन हो सकता है आपको कुछ समस्याओं से गुजरना पड़े। गर्भावस्था में टी बी होने पर चिकित्सक की राय से ही समय पर दवा लें।

 

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Written by
Aditi Singh
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागNov 17, 2015

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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