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    ग्‍लूकोमा से बचने के उपाय

    ग्‍लाउकोमा By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 14, 2012
    ग्‍लूकोमा से बचने के उपाय

    ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है और अगर सही समय पर इसकी चिकित्‍सा नहीं हुई, तो इससे अंधापन भी हो सकता है।

    ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है। हमारी आंखों में एक तरल पदार्थ लगातार बनता रहता है। इस तरल पदार्थ के पैदा होने और बाहर निकलने की क्रिया में जब भी दिक्कत आती है तब आंखों पर दबाव बढता है और आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है। चश्मे का नंबर बार-बार बदलना, अंधेरे में ठीक से नजर ना आना, रोशनी में अलग-अलग रंग दिखना ग्लूकोमा के लक्षण हो सकते हैं। ग्लूकोमा को ‘साइलेंट साइट स्नैचर’ भी कहा जाता है इसलिए इसका पता लोगों को आसानी से नहीं चल पाता है और तब तक यह बीमारी लाइलाज हो चुकी होती है। लोगों में अंधेपन का सबसे बडा कारण काला मोतिया है। ग्लूकोमा आनुवांशिक बीमारी भी है लेकिन सावधानी बरतने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

    Gluacoma

    ग्लूनकोमा से बचने के उपाय -

    • ग्लू‍कोमा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन 45 की उम्र के बाद इसकी संभावना ज्या‍दा होती है। 45 की उम्र पार करने के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं।
    • घर में अगर किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए।
    • आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरॉइड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आ जाती है। ऐसी दवाईयों के सेवन से बचें।
    • आंखों में दर्द हो या आंखें लाल हो जाएं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।
    • खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं।
    • आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें। क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ जाता है।
    • हर दो साल में आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए। चेकअप करवाने से आंखों की रोशनी का पता लगाया जा सकता है।
    • आंखों की सामान्य जांच के अलावा महत्वहपूर्ण जांच ( जैसे - इंट्राओक्युलर प्रेशर) करवाना चाहिए।
    • आंखों की जांच कराते समय एंडोस्कोपी (आंखों की नस की जांच) करवाना चाहिए।
    • आंखों की गोनियोस्कोपी जांच करवाना चाहिए, इस जांच से एक्वस ह्यूमर ( आंखों को पोषण देने वाला तत्‍व ) के निकास का पता लगाया जाता है।
    • पेकीमीट्री करवाएं, इस जांच से आंखों की सफेद पुतली (कोर्निया) की मोटाई का पता चलता है।
    • अगर आपके चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए।
    • रात को अंधेरे में देखने में दिक्कत होने पर आंखों की जांच करवाएं।
    • जब आप सीधे देख रहें हों तो आंखों के किनारे से न दिखाई दे रहा हो तब आंखों की जांच करवाएं।
    • आंखों में दर्द हो, सिर और पेट में दर्द हो तो इसको नजरअंदाज मत कीजिए, तुरंत चिकित्सक से संपर्क कीजिए।
    • आंखों को पोषण देने वाले तत्वों  जैसे – बादाम, दूध, संतरे का जूस, खरबूजे, अंडा, सोयाबीन का दूध, मूंगफली आदि का ज्यादा मात्रा में सेवन कीजिए।

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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