• shareIcon

ज्यादा सोने देर तक सोने वालों को इस दिमागी बीमारी का होता है खतरा, वैज्ञानिकों ने चेताया

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 15, 2019
ज्यादा सोने देर तक सोने वालों को इस दिमागी बीमारी का होता है खतरा, वैज्ञानिकों ने चेताया

ज्यादा सोने की आदत आपको एक गंभीर बीमारी का शिकार बना सकती है, जिसके कारण कम उम्र में ही याददाश्त खोने की समस्या हो सकती है। इस बीमारी को डिमेंशिया कहते हैं, जानें इसके शुरुआती लक्षण और ज्यादा सोने के खतरों के बारे में।

क्या आपको भी ज्यादा देर तक सोने की आदत है? अगर हां, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए और अपनी नींद का समय थोड़ा कम कर देना चाहिए। हाल में वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च के बाद इस बात का पता लगाया है कि जो लोग देर तक सोते हैं, उन्हें मस्तिष्क की एक गंभीर बीमारी का खतरा बहुत ज्यादा होता है, जिसे डिमेंशिया कहते हैं। डिमेंशिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिमाग से जुड़ी कई छोटी-छोटी बीमारियां होने का खतरा होता है। आमतौर पर डिमेंशिया होने पर व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और उसके काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।

याददाश्त खोने वाली बीमारी का खतरा

डिमेंशिया एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसका कोई इलाज मौजूद नहीं है। इस लाइलाज बीमारी से बचाव का केवल एक ही रास्ता है कि सही समय पर जरूरी सावधानी बरती जाए और बीमारी का खतरा बढ़ाने वाली आदतों से दूर रहा जाए। डिमेंशिया को लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी माना जाता है। यानी गलत जीवनशैली अपनाने वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। आमतौर पर इस बीमारी का शिकार 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग होते हैं। मगर वैज्ञानिकों की रिसर्च में पता चला है कि अगर आप ज्यादा देर तक सोते हैं, तो आपको कम उम्र में भी ये बीमारी हो सकती है।

इसे भी पढ़ें:- देर रात तक जागने वालों में बढ़ रही हैं ये 5 बीमारियां, जानें खतरे और बचाव

9 घंटे से ज्यादा और 6 घंटे से कम सोना खतरनाक

ये रिसर्च 5247 ऐसे लोगों पर की गई, जिनकी उम्र 45 साल से 75 साल के बीच थी। रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि उन लोगों को मस्तिष्क से संबंधित बीमारी, डिमेंशिया का खतरा ज्यादा होता है, जो लोग रोजाना 9 घंटे से ज्यादा सोते हैं। इसके अलावा 6 घंटे से कम सोने वालों में भी इस बीमारी का खतरा बढ़ता है। युवाओं के लिए सोने का आदर्श समय 7-8 घंटे का है। किसी भी उम्र के युवाओं को रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए और 9 घंटे से ज्यादा नहीं सोना चाहिए। कभी-कभार की बात अलग है।

क्यों है ज्यादा सोना खतरनाक?

ज्यादा सोने के कारण डिमेंशिया का खतरा क्यों बढ़ता है, इस बारे में अभी बहुत ज्यादा रिसर्च नहीं की जा सकी है। मगर वैज्ञानिक मानते हैं कि ज्यादा सोने से कई तरह के हार्मोन्स के स्राव में असंतुलन पैदा होता है, जो मानसिक रोगों का कारण बनता है। नैशनल स्लीप फाउंडेशन, अमेरिका के अनुसार जो लोग गहरी नींद नहीं लेते हैं या शरीर की जरूरत से कम सोते हैं, उन्हें कॉग्नीटिव (दिमाग संबंधी) समस्याओं का खतरा ज्यादा होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपको लंबे समय से नींद खराब आने की समस्या है, तो आपको डॉक्टर से मिलकर इसका कारण पूछना चाहिए क्योंकि लंबे समय में ये समस्या आपके दिमाग के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

इसे भी पढ़ें:- देर रात तक नींद न आने की समस्या से हैं परेशान, तो अपनाएं ये 4 आसान उपाय

डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण

  • चीजों को बहुत जल्दी भूल जाना, खासकर हाल-फिलहाल की घटनाओं को
  • हर समय कंफ्यूज रहना
  • किसी काम में ध्यान केंद्रित न कर पाना, यानी Concentration की समस्या।
  • हर समय गुमसुम, उदास रहना या डिप्रेशन के लक्षण दिखना।
  • रोजमर्रा के कामों को करते हुए बार-बार गलती करना और जरूरी चीजों को भूलने लगना

Read more articles on Other Diseases in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK