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    बच्‍चों में होने वाली फूड एलर्जी के कारण और उपचार

    एलर्जी By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 19, 2016
    बच्‍चों में होने वाली फूड एलर्जी के कारण और उपचार

    बड़ों की तुलना में बच्चों में फूड एलर्जी की समस्या ज्यादा देखी जाती है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए ये लेख पढ़े।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया के लगभग आधे बच्‍चों को किसी न किसी प्रकार की एलर्जी होगा। डब्लूएचओ के अनुसार बच्‍चों में खाने से होने वाली एलर्जी भी काफी बढ़ गयी है। यह बीमारी भी अब पश्चिम तक सीमित न रहकर बड़ी तेजी से वैश्विक बीमारी बनती जा रही है। भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है। लड़कों में लड़कियों के मुकाबले आनुवंशिक रूप से यह एलर्जी होने की आशंका ज्यादा होती है। जन्म के समय जिन बच्चों का भार कम होता है, उनमें भी इसकी आशंका अधिक होती है। हालांकि हमारे देश में फूड एलर्जी के अधिकृत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे आम दमा, एक्जिमा, पित्ती (त्वचा पर चकत्ते) और भोजन से संबंधित हैं।बच्चों को सामान्‍यत: अण्डे, दूध, सोया, मूंगफली या गेहूं से एलर्जी हो सकती है। जिन बच्चों को दूध, अंडे, गेहूं और सोयाबीन से एलर्जी है, अगर वह पांच साल की उम्र तक इन चीजों का सेवन न करें तो बाद में यह समस्या खत्म हो जाती है, लेकिन मूंगफली, नट्स और शेलफिश की एलर्जी सारी उम्र रहती है।

    फूड एलर्जी क्या होती है

    • फूड एलर्जी किसी खाद्य पदार्थ के प्रति शरीर की प्रतिशोध प्रतिक्रिया है जो काफी गंभीर होती है और कभी-कभी जानलेवा भी। वैसे अधिकतर लोगों में यह प्रतिक्रिया अपच के रूप में होती है। फूड एलर्जी कम ही होती है। एलर्जिक प्रतिक्रिया के समय रोगप्रतिरोधक क्षमता लिम्फोसाइट को सक्रिय कर देती है जिसे टी सेल और बी सेल कहते हैं। टी सेल और बी सेल सामान्यतया एंटीबॉडी बनाते हैं। जो बाहरी तत्व (एलर्जन) को नष्ट कर देते हैं। पर जिन्हें फूड एलर्जी है, उन लोगों में शरीर किसी विशेष पदार्थ के प्रति एंटीबॉडीस इम्यूनोग्लोब्युलिन ई और एक रसायन हिस्टामिन बनाता है। एलर्जी ज्यादातर खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीन के किसी रूप से होती है। गेहूं में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन से एलर्जी हो सकती है।
    • चाय और कॉफी में होने वाले कैफीन में मौजूद हिस्टामिन और टायरामिन, मसालेदार खाने से गले और त्वचा में होने वाली खुजलाहट व अन्य समस्याएं, वायरस में मौजूद हेमेग्लूटिनेटिंग प्रोटीन भी फूड एलर्जी की वजह बन सकते हैं।एलर्जन खाने में मौजूद वो तत्व होते हैं जो एलर्जिक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देते हैं।

     

    फूड एलर्जी के लक्षण

    • फूड एलर्जी के लक्षण कम से कम 2 घंटे के बाद ही दिखने को मिलते हैं। अक्सर प्रतिक्रिया 5 से 10 मिनट के अन्दर होती है लेकिन इसका असर खाने के 4 से 6 घंटे की लम्बी अवधि के बाद भी हो सकता है। जीभ, गले में खुजली और होंठों पर सूजन आ जाती है। फूड एलर्जी के कुछ लक्षण यह भी हैं। डायरिया, मुंह, स्किन पर खुजली, आंखों पर खुजली, खाना निगलने में दिक्कत होना, स्किन पर धब्बे, चेहरे, जीभ और होंठ पर सूजन, मरोड़े और उलटी, रक्तचाप की समस्या और श्वसन नली में अवरोध उत्पन्न हो जाने से सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती।
    • दूध से एलर्जी के लक्षण दूध पीने के कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटे बाद तक दिखाई देते हैं। ये लक्षण उल्टी, पेट में दर्द, डायरिया, नाक बहना, आंखों से पानी आने के रूप में देखने को मिल सकते हैं। बहुत कम ऐसा होता है कि मिल्क एलर्जी जीवन के लिए घातक प्रतिक्रिया दिखाए। इसमें श्वासमार्ग सिकुड़ जाता है, सांस रुकने लगती है और रक्तचाप में अचानक गिरावट आ जाती है।
    • जिन बच्चों में मूंगफली से एलर्जी होती है उनकी त्वचा पर रैशेज या छाती में जकड़न जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जो लोग मूंगफली के प्रति अति संवेदनशील होते हैं, उनमें तो मूंगफली के दानों को सूंघने से भी त्वचा पर रैशेज पड़ने और ब्लड प्रेशर में परिवर्तन होने लगता है।



    फूड एलर्जी होते ही इलाज करवाना चाहिए और डाक्टर ने जो खाने में परहेज बताया है उन बातों का ध्यान रखें एलर्जी वाली चीजों से दूर रहें। एलर्जी का पता चलते ही उन खाद्य पदार्थ वाली चीजों को अपने भोजन में शामिल न करें।

     

     

    Image Source-Getty

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