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सामान्य चोटों के दर्द से मांसपेशियों का कैसे करें आसान उपचार

एक्सरसाइज और फिटनेस By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 08, 2013
सामान्य चोटों के दर्द से मांसपेशियों का कैसे करें आसान उपचार

क्‍या आपको व्‍यायाम करना पसंद है, लेकिन कई बार आप जरूरत से ज्‍यादा व्‍यायाम कर बैठते हैं, जिससे आपको लाभ तो मिलता नहीं, उल्‍टे आपको नुकसान और हो जाता है।

खेल के दौरान चोट लगना आम है, आप व्‍यायाम करते हुए भी चोटिल हो सकते हैं। सही प्रकार से व्‍यायाम करने पर आपको चोट नहीं लगेगी इस बात की कोई गारंटी नहीं, लेकिन यदि आप गलत तरीके से व्‍यायाम कर रहे हैं, तो आपके चोटिल होने की आशंका अधिक है।

 

खेलों और व्‍यायाम के दौरान कई प्रकार की चोट लग सकती हैं। टांगों के व्‍यायाम के बाद घुटनों में दर्द होना सामान्‍य समस्‍या है। इस बात का ध्‍यान रखें कि अगर किसी वजह से आपके घुटने में दरार आ जाए, तो यह काफी दर्दनाक हो सकता है। खासतौर पर जब आप सीढि़यां चढ़ते-उतरते हैं तब यह दर्द काफी बढ़ जाता है। यहां तक कि ज्‍यादा देर तक खड़े रहने से भी इसमें काफी परेशानी होती है।

muscle pain

मांसपेशियों में खिंचाव होना भी एक सामान्‍य चोट है। जब आप वेट ट्रेनिंग करते हैं या फिर मोटर साइकिल चलाते हैं तो इस प्रकार की समस्‍या हो सकती है। आप मांसपेशियों पर गलत तरीके से काफी जोर डाल देते हैं। इस दौरान आपको इस बात का अहसास होता है कि आपकी मांसपेशियों में कुछ छिल सा गया है। बाद में, आपको उस स्‍थान पर सूजन नजर आती है अथवा त्‍वचा के उस हिस्‍से का रंग बदला हुआ लगता है।

 

अलग है मोच और स्‍ट्रेन

यह एक चि‍कित्‍सीय परिभाषा है। स्‍प्रेन यानी मोच का संबंध अस्थि-बंध खिंचने से होता है, वहीं स्‍ट्रेन या तनाव का अर्थ मांसपेशियों में खिंचाव होता है। इनकी गंभीरता के हिसाब से ही इनकी तुलना की जाती है। कई बार किसी व्‍यक्ति को ऐसी मोच होती है, जो‍ बिना सर्जरी के ठीक नहीं होती। इसलिए ऐसी मोच कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पातीं। मांसपेशियों में स्‍ट्रेन का अर्थ होता है, मांसपेशी के किसी हिस्‍से को होने वाला नुकसान। पारिभाषिक तौर पर देखें तो मांसपेशियों में बेहतर रक्‍त प्रवाह होता है और किसी गैरवाहिका कोशिका के मुकाबले वे जल्‍द ठीक हो जाते हैं।

 

अगर आपको चोट लग जाए तो

कई बार चीजों को हल्‍के में लेना भारी पड़ जाता है। लेकिन, कुछ ऐसे आधारभूत नियम हैं, जिन्‍हें अपनाकर आप सुरक्षित रह सकते हैं। जब भी कभी किसी मांसपेशी में चोट लगे अथवा उसमें सूजन आए तो हमें अंग्रेजी का प्राइस (PRICE) नियम का पालन करना चाहिए। इसका अर्थ है Protect (सुरक्षा), Rest (आराम), Ice (बर्फ), Compression (दबाव) और Elevation (ऊंचाई)।

 

उदाहरण के लिए वेट लिफ्टिंग के दौरान आपके घुटने में चोट लग जाए, तो आपको घुटने को अच्‍छी तरह से बांधकर रखना चाहिए, ताकि वह मुड़े नहीं। आराम करने के साथ ही आपको ज्‍यादा हिलना-ढुलना नहीं चाहिए। आपको उस पर बर्फ लगानी चाहिए। बर्फ रक्‍तवाहिनियों को संकुचित कर देता है, जिससे शरीर के उस हिस्‍से में रक्‍त प्रवाह कम हो जाता है और उस हिस्‍से में सूजन कम हो जाती है। साथ ही ठंडक उस हिस्‍से को ठीक करने में सहायक होती है क्‍योंकि ठंडे पदार्थ संवेदनहारी होता है। आप 24 से 72 घंटे तक चोटिल हिस्‍से पर बर्फ का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको लगी चोट कितनी गंभीर है।

muscle pain

 

बर्फ या किसी अन्‍य ठंडी चीज से सिंकाई करने से वह हिस्‍से सख्‍त रहता है, जिससे वह सूजता नहीं है। और आखिर में ई यानी इलेवेशन यानी ऊंचाई- यानी चोट अथवा सूजन को दिल से ऊपर रखना। यानी उसे दिल पर छाने नहीं देना।

 

बर्फ है बेहतर

चोट लगने पर अक्‍सर हम गर्म पानी से उस स्‍थान की सिंकाई करते हैं। लेकिन, जानकार मानते हैं कि बर्फ का उपयोग करना अधिक लाभकारी होता है। चोट लगने के बाद जितनी जल्‍दी हो सके बर्फ से सिंकाई करनी चाहिए। इसके अलावा चोट लगने के 24 घंटे के भीतर हर दस से 15 मिनट के भीतर बर्फ की सिंकाई फायदेमंद होती है। 24 घंटे तक बर्फ से सिंकाई करने के बाद त्‍वचा के चोटिल हिस्‍से और सामान्‍य हिस्‍से के तापमान में अंतर देखना चाहिए।

 

अगर चोटिल हिस्‍से का तापमान सामान्‍य है, तो इसका अर्थ यह है कि सूजन आनी कम हो गई है और अब आप उस क्षेत्र पर गर्म सिंकाई कर सकते हैं। लेकिन, चोट वाले हिस्‍से का तापमान अगर अभी भी गर्म है, तो फिर अगले चौबीस घंटे के‍ लिए उस पर बर्फ से ही सिंकाई करें। और एक बार फिर तुलना करें।


 

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