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बोर्ड रिजल्ट या परीक्षा से पहले बच्चे कैसे रहें तनाव से दूर? जानें एक्सपर्ट टिप्स

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 30, 2019
बोर्ड रिजल्ट या परीक्षा से पहले बच्चे कैसे रहें तनाव से दूर? जानें एक्सपर्ट टिप्स

सभी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित होने वाले हैं। यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और अन्य राज्यों की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं। इस दौरान बच्चों को पहले परीक्षा का तनाव और फिर रिजल्ट का तनाव हो

सभी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित होने वाले हैं। यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और अन्य राज्यों की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं। इस दौरान बच्चों को पहले परीक्षा का तनाव और फिर रिजल्ट का तनाव होता है, वहीं मां-बाप को आगे की पढ़ाई, बेहतर करियर और बच्चे के उज्जवल भविष्य की चिंता होती है। परीक्षा में कम नंबर आने पर कई बार बच्चे तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। कई बार उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के कारण मां-बाप भी बच्चों पर दबाव बनाते हैं। तनाव बच्चों को मस्तिष्क के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में बच्चे खुद किस तरह तनाव से दूर रह सकते हैं और मां-बाप उनकी किस तरह मदद कर सकते हैं, आइए आपको बताते हैं।

एक्सपर्ट ने बताए रिजल्ट का तनाव कम करने के टिप्स

सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश के चिकित्साधिकारी, डॉ. राम आशीष यादव बताते हैं, "रिजल्ट के आने से कुछ दिनों पहले तमाम मां-बाप अपने बच्चों को लेकर आते हैं और बताते हैं कि उनका बच्चा गुमसुम और उदास रहता है। कुछ बच्चों में खाना-पीना छोड़ने और कमजोरी जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। ये सब एग्जाम के रिजल्ट से होने वाले तनाव के कारण होता है। आजकल मां-बाप बच्चों पर करियर को लेकर इतना दबाव बनाते हैं कि बच्चा अंदर ही अंदर तनाव और कई बार तो डिप्रेशन जैसी खतरनाक समस्या का शिकार हो जाता है। रिजल्ट के बाद हमारे देश में बच्चों में आत्महत्या के मामले भी काफी बढ़ गए है।"

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डॉ. आशीष आगे बताते हैं कि, "मां-बाप बच्चों पर दबाव न डालें, रिजल्ट वाले दिन बच्चे को रिलैक्स रहने को कहें और उनके साथ प्यार से पेश आएं। बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाएं ताकि बच्चा मुश्किल हालातों का सामना कर सके। बच्चों को मारना-पीटना गलत है।" रिजल्ट और परीक्षा का तनाव कम करने में मददगार हैं ये टिप्स-

रिजल्ट आने से पहले नंबर्स के बारे में न सोचें

बच्चे अक्सर रिजल्ट आने के 3-4 दिन पहले से ही रिजल्ट के बारे में सोचने लगते हैं, जिससे वो तनाव का शिकार हो जाते हैं। रिजल्ट आने से पहले अपने दिमाग को शांत रखें। जब आपको परिणाम पता चल जाएंगे, तो आगे के रास्ते भी उसे के अनुसार नजर आने लगेंगे। अगर किसी विषय में आपके नंबर खराब भी आए हैं, तो रिचेकिंग या रिएग्जाम के द्वारा आप अपने नंबर्स ठीक कर सकते हैं।

अपने मनपसंद काम करें

परीक्षा का रिजल्ट आने वाले दिन तनाव लेने के बजाय अपना मनपसंद काम जैसे- गाने सुनना, मूवी देखना, गेम खेलना या खाना खाना आदि करें। इससे आप तनाव से बच सकते हैं।

पेरेंट्स के साथ देखें रिजल्ट

आमतौर पर बच्चे परीक्षा का रिजल्ट देखते समय अकेले रहना चाहते हैं, ताकि रिजल्ट खराब होने पर उन्हें पेरेंट्स के गुस्से का सामना न करना पड़े। मगर यदि आप तनाव से बचना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि अपने पेरेंट्स के साथ रिजल्ट देखें। ऐसा करने से आपका अच्छा या खराब रिजल्ट पेरेंट्स के सामने होता है, जिससे आप बाद में उनका सामना करने से परेशान नहीं होते हैं। इसके अलावा पेरेंट्स आपको आगे की पढ़ाई या विकल्पों के बारे में ज्यादा अच्छे से बता सकते हैं।

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खराब रिजल्ट से आपका करियर नहीं खराब होता

बच्चों और मां-बाप दोनों को यह समझना चाहिए कि किसी भी परीक्षा में कम नंबर या खराब रिजल्ट इस बात का दावा नहीं होते कि बच्चे का करियर खराब होगा। परिणाम खराब होने पर बच्चों को अगली परीक्षा में ज्यादा मेहनत करने और बेहतर रिजल्ट लाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, न कि उन्हें डांटना या मारना चाहिए।

मां-बाप कैसे करें रिजल्ट का तनाव कम करने में मदद

  • मां-बाप बच्चों से रिजल्ट के बारे में जितना ज्यादा बातें करेंगे, बच्चों का तनाव उतना ज्यादा बढ़ेगा। ऐसे में मां-बाप को कोशिश करनी चाहिए कि रिजल्ट आने से पहले इस बारे में बच्चे से कोई बातचीत न करें।
  • पेरेंट्स पहले से किसी ऐसे रिजल्ट की आशा न करें, जो बच्चा आसानी से पूरा नहीं कर सकता है। दुनिया का हर बच्चा स्कूल टॉपर या जिला टॉपर नहीं हो सकता है। बच्चा अगर पढ़ाई में मेहनत नहीं करता है, तो उसे आप समझाएं और जरूरत हो तो थोड़ा सख्ती से समझाएं। मगर रिजल्ट आने के बाद उसपर किसी तरह का दबाव न डालें, क्योंकि बच्चा डांट खाकर रिजल्ट नहीं बदल सकता है।
  • कई मां-बाप बच्चों को नंबरों को अपनी इज्जत और मान-मर्यादा से जोड़ने लगते हैं। ध्यान दें परीक्षा में बच्चों के नंबर्स से न तो आपकी सोशल वैल्यू कम हो जाएगी और न ही बढ़ जाएगी।
  • कुछ मां-बाप अपने बच्चे के नंबर की तुलना रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बच्चों के नंबरों से करने लगते हैं। बच्चा चाहे जितना छोटा हो, उसमें अपना आत्मसम्मान और आत्मविश्वास होता है। जब आप किसी दूसरे बच्चे से उसकी तुलना करते हैं, तो उसके आत्मसम्मान को चोट पहुंचती है और आत्मविश्वास कम होता है। इसलिए अपने बच्चे की तुलना किसी न करें। उसे हमेशा इस बात का एहसास दिलाएं कि वो यूनीक है।
  • मां-बाप बच्चों को मोटीवेट करें और उन्हें समझाएं कि परीक्षा के रिजल्ट कैसे भी हों, आप उन्हें उतना ही प्यार करेंगे जितना पहले करते रहे हैं।

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