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गले के कैंसर के जीन का पता चला

कैंसर By अन्‍य , दैनिक जागरण / Aug 11, 2011
गले के कैंसर के जीन का पता चला

जिनोम इंस्टीट्यूट आफ सिंगापुर की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेसोफेरेंजियल कार्सिनोमा (एनपीसी) कैंसर के आनुवांशिकी खतरों की पहचान की है।

वैज्ञानिकों ने गले के कैंसर से जुडे़ तीन नए जीनों का पता लगाया है। उनका दावा है कि इस खोज के बाद गले के कैंसर के इलाज के नए और अधिक प्रभावी मार्ग प्रशस्त होंगे।


जिनोम इंस्टीट्यूट आफ सिंगापुर की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेसोफेरेंजियल कार्सिनोमा (एनपीसी) कैंसर के आनुवांशिकी खतरों की पहचान की है। एनपीसी एक ऐसा कैंसर है, जो गले के ऊपरी हिस्से और नाक के पीछे के भाग में उत्पन्न होता है।


एनपीसी के आनुवांशिकी खतरों को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने मानव जीनोम का व्यापक आनुवांशिकी विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि मानवीय ल्यूकोसाइट एंटीजेन (एचएलए) और तीन जीन्स टीएनएफआरएसएफ-19, एमडीएसआईईवीआई -1 और  सीडीकेएन2ए /2बी किसी व्यक्ति में एनपीसी के बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।


वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि एनपीसी के लिए जिम्मेदार इन तीनों जीन्स का ल्यूकेमिया के विकास में भी हाथ होता है। इससे पता चलता है कि इन दोनों बीमारियों के विकास के बीच कोई साझा जैविकीय प्रणाली काम करती है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि इन परिणामों को देखने के बाद व्यक्ति में इस कैंसर के उत्पन्न होने की क्रियाविधि को समझा जा सकेगा।

 

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