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मनोविज्ञान के अुनसार ये है पार्टनर से वाद-विवाद करने का बेहतर तरीका

मनोविज्ञान के अुनसार ये है पार्टनर से वाद-विवाद करने का बेहतर तरीका
Quick Bites
  • पार्टनर की आपसी बहस में होती हैं बेतुकी बातें।
  • बहस के दौरान तीसरे को समस्या बताएं।
  • शब्दों का सही ढंग से प्रयोग करना बेहतर है।
  • खुले दिमाग से अपने पार्टनर की बात सुनें।

वो समय याद कीजिए जब आपने अपने पार्टनर से बहस की होगी। उस बहस में कुछ याद है क्या हुआ था? आपने एक-दूसरे से क्या बोला था? आपको क्या बोलना चाहिए था और आपने क्या बोल दिया? बहस और झगड़े में ऐसा ही होता है। इंसान उस समय एक-दूसरे से झगड़ा कर रहे होते हैं, इसलिए उस वक्त एक-दूसरे से सच नहीं एक-दूसरे से दिल दुखाने वाली बात बोलते हैं।

 

यूं करें अपने पार्टनर से बहस

जोड़ों के बीच होने वाली बहस और उसके बाद अलग होने के बारे में कई साइक्लोजिस्ट ने मिलकर स्टडी की है। इस स्टडी में वाशिंगटन यूनीवर्सिटी के साइक्लॉजी के प्रोफेसर जॉन गॉटमन भी शामिल थे। ये स्टडी 14 सालों तक 79 शादी-शुदा जोड़ों के ऊपर की गई है। इन जोड़ों में 21 जोड़ों का इस अवधि के दौरान तलाक हो चुका है। जो बचे हुए जोड़े हैं, उनसे गॉटमन ने कई जरूरी चीजें अध्ययन किए हैं जो उनके रिश्ते को बनाए रखने में कारगर रहती हैं।

रिलेशनशिप

एक नाव के दो सवारी

जो लोग अलग हो गए थे उन्होंने बहस की बातों को काफी आगे तक खींचा। वहीं जो कपल साथ में रह रहे थे उन्होंने बहस के कुछ घंटो बाद तक या दिनों तक एक-दूसरे को अपने व्यक्तिगत विचारों के साथ छोड़ दिया था। इन घंटो औऱ दिनों के बाद इन कपल ने बहस के बारे में और उसके विषयों के बारे में आराम से बात भी की। गॉटमन ने इसको एक नाव में दो रहने वाले साथी के साथ कल्पना करने को कहा है। जिस तरह नाव में बैठे सवारी एक-दूसरे के साथ बैठकर आराम से बात करते हैं, सहमत-असमहत दोनों होते हैं और मस्ती भी करते हैं। फिर किसी भी प्रकार का तुफान आने से एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं वैसे ही शादी-शुदा जोड़ों को एक-दूसरे के साथ करना चाहिए। गॉटमन ने ये निष्कर्ष निकाला है कि बहस के दौरान पार्टनर की बात को खत्म होने दें फिर ही कुछ कहें।

 

तीसरे को बताएं

जिन जोड़ों ने तलाक लिया है उन पर गॉटमन ने ऑब्जर्व किया है कि इन लोगों ने या तो बहस को बीच में ही छोड़ दिया था या किसी भी प्रकार के डिसकशन को केवल एक बेतुकी बात या कमेंट करके काट दिया था। इससे बात खत्म होने के जगह दब जाती है जो बाद में बड़ी बन जाती है। वहीं दूसरी ओर साथ में रहने वाले लोगों ने अपने पार्टनर की बात बिल्कुल खुले दिमाग से सुनी और उसे समझने की कोशिश की। इस स्थिती में सबसे ज्यादा मदद तीसरा व्यक्ति ही करता है। तीसरे व्यक्ति को बहस के दौरान रहने दें। ध्यान रखें कि तीसरा व्यक्ति पूरी तरह से निष्पक्ष हो और आफकी भलाई चाहता हो। इससे वो बताएगा कि आप बहस को लेकर कब मुद्दे से हटकर एक-दूसरे को दिल दुखाने वाली बात शुरू कर चुके हैं।


शब्दों का ऐसे करें प्रयोग

कभी भी डायरेक्टली अपने पार्टनर को ये मत बोलें की वो बहुत ही इल्लोजिकल बात कर रहा या रही है। इससे सामने वाले का गुस्सा होना लाज़िमी है। अगर आप किसी को बोलेंगे की वो ट्रैक से बाहर जाकर बात कर रहा है तो, ये शब्द काम नहीं करेंगे। इससे इंसान गुस्सा करेगा ही। शांत रहे औऱ पार्टनर से बोलें कि, मैं तुम्हारी बात समझ रहा या रही हूं। लेकिन मेरी भी सुनो। इससे आपकी बात सुनी जाएगी। तब जाकर आप बहस को डिसकशन में बदल पाएंगे।

 

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Written by
Gayatree Verma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJan 22, 2016

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