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आयुर्वेद में है कमर दर्द के ये प्रमुख कारण, ऐसे करें उपचार

दर्द का प्रबंधन By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 12, 2017
आयुर्वेद में है कमर दर्द के ये प्रमुख कारण, ऐसे करें उपचार

रीढ़ की हड्डी के दर्द को आयुर्वेद में कटिशूल कहा जाता है। यह समस्या वात दोष के कारण होती है। आयुर्वेद के अनुसार खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके इससे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख लक्षण...

कमर में मंद से असहनीय दर्द होना, कमर में भारीपन, कमर से पिंडलियों तक दर्द फैलना, पैरों में सुन्नपन, चलने-बैठने और लेटने में परेशानी होना मुख्य लक्षण हैं। कमरदर्द यानी लो-बैक पेन लाइफस्टाइल से जुड़़ी समस्या है। रीढ़ की हड्डी के दर्द को आयुर्वेद में कटिशूल कहा जाता है। यह समस्या वात दोष के कारण होती है। आयुर्वेद के अनुसार खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके इससे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख लक्षण...

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1. तीखे व कसैलेरस युक्त आहार जैसे अधिक मिर्च व तेलयुक्त आहार, चटपटा खाना, फ्रिज में रखा हुआ खाना, अधिक शीतल पेय, आइसक्रीम, अत्यअधिक बीज वाले फल व सब्जी जैसे अमरूद, बैगन, काचरी, परवल आदि लेने से कमरदर्द की समस्या होती है। 

 

2. अत्यधिक उपवास, आवश्यकता से अधिक व्यायाम, गद्दे बिस्तर पर सोना, मोटे तकिये का उपयोग, कुर्सी पर कमर और गर्दन को झुकाकर बैठना, दोपहिया वाहन का अधिक उपयोग, टीवी और कम्प्यूटर के साथ अधिक समय बिताना भी इसके कारण हैं।

 

3.  बढऩे पर रीढ़ पर भार पडऩा, हार्मोन असंतुलन, कब्ज, हार्निया, सिजेरियन प्रसव।

 

4. तंबाकू, गुटखा, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट के कारण हड्डी में शिथिलता और खोखलापन होने कमरदर्द की स्थिति बनती है। वृद्धावस्था में हड्डियों में क्षय, गर्भावस्था में गर्भ के वजन के कारण या कमर में चोट लगने के कारण हड्डी का सरकना भी इसका एक कारण है।

 

घरेलू नुस्खे से करें इलाज

1- सरसों/तिल के तेल में चुटकीभर सेंधा नमक और 2-3 लहसुन की कलियां डालकर हल्का गर्म करें और इससे कमर की नित्य मालिश करें

2- एक गिलास पानी में 10 ग्राम सोंठ या जीरा डालकर उबालें फिर छानकर गुनगुना पीएं।

3- मलाई रहित दूध में  आधा केला  और  मिश्री मिलाकर लें।

4- मलाई रहित दूध में हल्दी डालकर लें।

5- भोजन में लहसुन, अदरक, सोंठ, सेंधा नमक, नींबू और प्याज का प्रयोग कर सकते हैं।

 

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