युवा महिलाओं में आम है ये 5 स्वास्थ्य समस्याएं, शारीरिक और मानसिक रूप से करती है प्रभावित

Updated at: May 30, 2020
युवा महिलाओं में आम है ये 5 स्वास्थ्य समस्याएं, शारीरिक और मानसिक रूप से करती है प्रभावित

युवा महिलाओं को करना पड़ता है कई स्वास्थ्य समस्याओं को सामना, जानें कौन-सी स्थितियां करती हैं उन्हें बुरी तरह प्रभावित।

Vishal Singh
महिला स्‍वास्थ्‍यWritten by: Vishal SinghPublished at: May 30, 2020

ये तो आप सभी जानते हैं कि युवा महिलाओं को कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है और कई समस्याओं को झेलना पड़ता है। कोई भी युवा महिला, जो किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना कर चुकी है, आपको बता सकती है कि यह कितना सामान्य है कि डॉक्टर आपके लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। अधिकतर लोगों में महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में सामान्य समझ की कमी है। आफको बता दें कि काफी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य स्थितियां होती हैं जो आमतौर पर युवा महिलाओं को प्रभावित करती हैं। चाहे वह गर्भाशय के ऊतक जैसे यौन-विशिष्ट कारकों के कारण हो चाहे कोई कारण हो। इनकी तरह ही युवा महिलाओं के 5 ऐसे मुद्दे होते हैं जो काफी परेशान करने वाली बात होती है। आइए इस लेख के जरिए जानते हैं कि वो 5 मुद्दे क्या है।

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डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea)

डिसमेनोरिया एक असामान्य रूप से दर्दनाक स्थिति के लिए चिकित्सा शब्द है। आमतौर पर यह स्थिति एंडोमेट्रियोसिस जैसे विकारों समेत कई कारकों के कारण हो सकती है। लेकिन आज भी कई लड़कियां है जिन्हें इसके कारणों के बारे में पता नहीं है। इस स्थिति में दर्द को कम कर पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। साल 2012 के एक अध्ययन में पाया गया कि 25 फीसदी तक युवा महिलाओं को दर्द अनुभव होता है जिसमें दर्द से राहत पाने के लिए दवा की जरूरत काफी अहम हो जाती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर महिलाओं को ज्यादा समय तक ये दर्द रहे तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से इस बारे में संपर्क करना चाहिए।

ल्यूपस (Lupus) 

ल्यूपस एक स्व-प्रतिरक्षित विकार है जो युवा लड़कियों में काफी आम है, ये बीमारी दुनिया भर में 5 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन यह कारण अभी तक नहीं चला है कि युवा महिलाएं इसके लिए सबसे कमजोर समूह क्यों हैं। यह सुझाव दिया गया है कि एस्ट्रोजेन की एक भूमिका हो सकती है, और तनाव या बीमारी या मनोवैज्ञानिक दबाव जैसे ट्रिगर लक्षणों को सेट कर सकते हैं, लेकिन इस पर बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है।

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पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome)

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम को पीसीओएस, भी कहा जाता है। ये एक एंडोक्राइन डिसऑर्डर है जो सभी महिलाओं को करीब 7 फीसदी तक प्रभावित करता है। इस स्थिति में अंडाशय में अल्सर और सूजन में शामिल हैं और उनके कामों को भी प्रभावित करते हैं। सेंटर फॉर यंग वीमेन हेल्थ का अनुमान है कि यह 5 से 10 फीसदी किशोर और युवा महिलाओं के बीच होता है, क्योंकि यह प्रजनन हार्मोन और डिम्बग्रंथि समारोह से संबंधित है, यह अक्सर दिखाई देता है जब लड़कियां पहली बार मासिक धर्म शुरू करती हैं।

टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes)

युवा महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज की दर लगातार बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 8.5 फीसदी लोगों को मधुमेह है, और 2016 में हुए शोध में पाया गया कि स्वस्थ  युवा महिलाएं तेजी से टाइप 2 मधुमेह का निदान कराने वाले लोगें में से एक है। 

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मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health Issues

वैसे तो आजकल सभी वर्ग मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का सामना कर रहा है। लेकिन ये समस्या युवा महिलाओं में भी काफी ज्यादा देखी गई है। साल 2017 में हुए एक शोध के अनुसार, बढ़ती उम्र में मानसिक बीमारियां चिंता और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों के लिए सबसे कमजोर समूह हैं। युवा महिलाओं में अवसाद के निदान की दर साल 2009 में 18 फीसदी से बढ़कर साल 2015 में 25 फीसदी हो गई। लड़कियों की उम्र के बीच संगठन मेंटल हेल्थ अमेरिका के अनुसार 14 और 18 की उम्र के लड़कों की तुलना में अवसाद की दर अधिक है। 

 

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