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टारगेटेड थैरेपी है कैंसर का बेस्ट इलाज, मगर करवाने से पहले जान लें ये 5 बातें

कैंसर By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 21, 2018
टारगेटेड थैरेपी है कैंसर का बेस्ट इलाज, मगर करवाने से पहले जान लें ये 5 बातें

टारेगेटेड थैरेपी कैंसर के पुराने इलाजों और थैरेपीज से अलग और एडवांस है। इस थैरेपी में मरीज के शरीर में मौजूद उसी सेल के टारगेट किया जाता है, जिसे खत्म करना होता है और इससे स्वस्थ सेल्स पर कोई प्रभाव भी नहीं पड़ता है।

कैंसर एक भयावह बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। आजकल कैंसर इतनी तेजी से फैल रहा है कि हर साल करोड़ों लोग इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवाते हैं। कैंसर पूरे शरीर में कहीं भी हो सकता है। इस रोग के कारण शरीर की कुछ कोशिकाएं प्रभावित हो जाती हैं और वो अनावश्यक रूप से तेजी से बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं अपने आस-पास मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट करती जाती हैं और इससे मरीज धीरे-धीरे कमजोर होकर मर जाता है। कई आधुनिक तकनीकों द्वारा कैंसर का इलाज संभव है मगर भारत में इन इलाजों की पहुंच हर मरीज तक अभी संभव नहीं दिखाई देती है। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में टारगेटेड थैरेपी इलाज का नया और ज्यादा स्थाई तरीका है। आइये आपको बताते हैं टारेगेटेड थैरेपी के बारे में।

टारगेटेड थैरेपी क्या है

टारगेटेड थैरेपी कैंसर के इलाज की नई विधि है। इसमें कई तरह की थैरेपीज़ शामिल हैं। आप जानते हैं कि कैंसर के दौरान मरीज के शरीर में कैंसर सेल्स तेजी से बढ़ना शुरू हो जाती हैं। इन सेल्स को खत्म करना ही कैंसर का इलाज है, जो कि एक मुश्किल काम है क्योंकि जब भी किसी विधि से मरीज के शरीर में मौजूद इन सेल्स को नष्ट करने की कोशिश की जाती थी, उस अस्वस्थ सेल के आसपास मौजूद स्वस्थ सेल्स भी इससे नष्ट हो जाती थीं। मगर टारेगेटेड थैरेपी इस मामले में पुराने इलाजों से अलग और एडवांस है। इस थैरेपी में मरीज के शरीर में मौजूद उसी सेल के टारगेट किया जाता है, जिसे खत्म करना होता है। हालांकि जितनी से मैंने आपको बता दिया, उतनी आसान भी नहीं है ये थैरेपी। दरअसल इस थैरेपी के लिए मरीज के शरीर के संदर्भ में कई तरह की जानकारियां जुटानी पड़ती हैं जैसे उसके जीन्स के बारे में, उसके शरीर में मौजूद प्रोटीन्स के बारे में और कैंसर की प्रकृति के बारे में आदि।

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कीमोथैरेपी से कैसे अलग है टारगेटेड थैरेपी

स्टैंडर्ड कीमोथैरेपी में मरीज के शरीर में मौजूद स्वस्थ और अस्वस्थ दोनों कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है जबकि टागरेटेड थैरेपी में कैंसर सेल्स को ब्लॉक करके केवल उसे नष्ट किया जाता है इसलिए मरीज की स्वस्थ कोशिकाएं इस थैरेपी में बच जाती हैं। कैंसर सेल्स स्वस्थ कोशिकाओं से अलग होती हैं। ये थैरेपी इस तरह डिजाइन की गई है कि इससे कैंसर सेल्स का अलग से पता लगाया जा सकता है और उन्हें ऐसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जा सकता है कि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई हानि न पहुंचे।

किन मरीजों को मिलेगा इससे लाभ

आमतौर पर टारगेटेड थैरेपी से उन मरीजों का इलाज किया जा सकता है जिनके कैंसर सेल्स में लगातार तेजी से बदलाव होता है या जिनके कैंसर सेल्स पर अन्य दूसरी थैरेपीज़ का असर नहीं होता है।

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टारगेटेड थैरेपी के साइड इफेक्ट्स

  • कमजोरी
  • थकान और सुस्ती
  • उल्टी
  • डायरिया
  • सिर दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • त्वचा पर निशान
  • बालों का झड़ना
  • खून के थक्के जम जाना
  • मरीज के घाव आसानी से न भरना
  • और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या।

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