• shareIcon

सिफ़लिस की जाँच, शिशुओं की रक्षा

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By सम्‍पादकीय विभाग , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 25, 2011
सिफ़लिस की जाँच, शिशुओं की रक्षा

शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में सिफ़लिस बीमारी की जाँच कर लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है.

गुरुवार, 16 जून, 2011 को 21:32 IST तक के समाचार


सिफ़लिस की वज़ह से सालाना पाँच लाख शिशुओं की मौत होती है


शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में सिफ़लिस बीमारी की जाँच कर लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है.


माना जाता है कि हर साल सिफ़लिस की वज़ह से पाँच लाख शिशु मर जाते है. इनमें बड़ी संख्या में गर्भस्थ शिशु होते हैं.


सिफ़लिस से मौत के सबसे ज्यादा अफ्रीकी देशों से सामने आते है.


ब्रिटेन में हुए ताज़ा शोध में विशेषज्ञों ने पाया कि महिलाओं की जाँच और एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से शिशुओं की मौत की संख्या आधी हो सकती है.


विज्ञान पत्रिका लांसेट में छपी रिपोर्ट के अनुसार शोध में 41,000 महिलाओं को शामिल किया गया था.


सिफ़लिस यौन संपर्क से फैलने वाली बीमारी है जिसके कारण त्वचा पर घाव हो जाते है और इसके बाद ये गंभीर रूप से दिल, दिमाग, आंखों को प्रभावित कर देती है और इससे मौत भी हो सकती है.


गर्भ में पल रहे बच्चे में भी माँ से सिफ़लिस का संक्रमण पहुँच सकता है. इसे जन्मजात सिफ़लिस भी कहा जाता है.


कई देशों में इस बीमारी को लेकर नीतियां बनाई गई है, जिनके तहत गर्भवती महिलाओं की जाँच की जाती है. लेकिन ग़रीब देशों में अब भी इस तरह की जाँच का प्रचलन नहीं है.


ख़तरनाक


एचआईवी की जाँच के समय ही सिफ़लिस की जाँच किए जाने की सलाह


एक अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में आठ में से एक गर्भवती महिला की ही सिफ़लिस को लेकर जांच की जाती है.


हर साल सिफ़लिस से पीड़ित 20 लाख महिलाएँ गर्भवती हो जाती है. इनमें से दो तिहाई मामलों में प्रसव के दौरान या बाद में दिक़्क़तें पेश आती हैं.


कई मामलों में शिशु या तो मृत पैदा होते है, या पैदा होने के बाद उनकी मौत हो जाती है.


यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य जाँच से अजन्मे शिशुओं की मौत में 58 प्रतिशत की कमी आ सकती है.


इससे जन्मजात सिफ़लिस के मामलों में भी कमी आ सकती है.


रिपोर्ट की लेखक डॉक्टर सैरा हॉक्स का कहना है कि सिफ़लिस की जाँच एचआईवी जाँच के समय ही की जानी चाहिए.


अगर गर्भवती महिला में सिफ़लिस का पता चल जाता है तो गर्भ के 28वें हफ़्ते से ही एंटीबायोटिक्स दवाइयाँ देकर माँ और बच्चे की रक्षा की जा सकती है.

 

 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK