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बारिश में होता है अमीबियासिस संक्रमण का खतरा, जानें इसके लक्षण और उपचार

Updated at: Jul 02, 2018
संक्रामक बीमारियां
Written by: अनुराग अनुभवPublished at: Jul 02, 2018
बारिश में होता है अमीबियासिस संक्रमण का खतरा, जानें इसके लक्षण और उपचार

आमतौर पर लोग अमीबियासिस के बारे में कम जानते हैं और जानकारी का अभाव बीमारी से होने वाले खतरों को बढ़ाता है। अमीबियासिस एक जलजनित रोग है यानि ये रोग पानी के द्वारा फैलता है। इसके साथ ही ये रोग संक्रामक होता है।

बारिश बीमारियों का मौसम है। मॉनसून में कई तरह के संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं। दरअसल बरसात होने के बाद वातावरण में नमी हो जाती है और नमी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। इस मौसम में त्वचा की बीमारियों के अलावा वायरल बुखार, डेंगू, डायरिया और मलेरिया, अमीबीयासिस का खतरा बढ़ जाता है।
आमतौर पर लोग अमीबियासिस के बारे में कम जानते हैं और जानकारी का अभाव बीमारी से होने वाले खतरों को बढ़ाता है। अमीबियासिस एक जलजनित रोग है यानि ये रोग पानी के द्वारा फैलता है। इसके साथ ही ये रोग संक्रामक होता है यानि कुछ विशेष परिस्थितियों में ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंच जाता है।

कैसे होता है अमीबियासिस

अमीबियासिस मुख्य रूप से पानी से फैलने वाला रोग है। इस मौसम में बाहर के खुले पानी में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस मौजूद होते हैं। ऐसे में बाजार में खुले में बिकने वाले खानों (विशेष रूप से होटल, ठेले आदि के खानों) को अशुद्ध पानी से बनाया जाता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में खुले में रखा हुआ खाना जल्दी संक्रमित होकर खराब हो जाता है जबकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ आमतौर पर काफी देर पहले बने होते हैं। इसके अलावा खाना बनाने और परोसने वाले लोगों द्वार नाखून, सिर एवं शरीर के अन्य खुले भाग का ध्यान नहीं रखे जाने के कारण अमीबियासिस का जीवाणु एक से दूसरे तक पहुंचता है।

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कौन से अंग होते हैं प्रभावित

अमीबा एक-कोशकीय जीवाणु है, जो अमीबियासिस का प्रमुख कारण है। अमीबियासिस शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। आमतौर पर इससे सबसे पहले बड़ी आंत प्रभावित होती है।  इसके अलावा ये रोग लीवर, फेफड़ों, हृदय, मस्तिष्क, वृक्क, अंडकोष, अंडाशय, त्वचा आदि को भी प्रभावित कर सकता है।

अमीबियासिस के लक्षण

  • पतले दस्त
  • भोजन के बाद पेट में दर्द
  • रुक-रुक कर दस्त शुरू हो जाना
  • कब्ज की समस्या हो
  • अपच हो जाए और उल्टी हो
  • पेट में गैस बनना यानि वायु-विकार होना
  • त्वचा संबंधी रोग होना जैसे रैशेज, दाद, खुजली आदि

अमीबियासिस के बचाव के लिए क्या करें

चूंकि अमीबियासिस एक संक्रामक रोग है इसलिए इससे बचाव के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • अमीबियासिस के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • अच्छे से फिल्टर किया हुआ पानी पिएं या उबालकर ही पानी पिएं।
  • खाना बनाने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें और किचन में साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • बरसात में भीगने से बचें और सड़क पर खुले में इकट्ठा पानी में देर तक पांव भिगाने से बचें।
  • अगर आप सप्लाई का पानी पीते हैं तो पीने के पानी में क्लोरीन डालें।

अमीबियासिस का उपचार

  • अमीबियासिस के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • तरल पदार्थों जैसे जूस, नारियल पानी, काली चाय, छाछ आदि का सेवन करें।
  • जामुन, पपीता, लहसुन, अदरक, काली मिर्च और दालचीनी को आहार में शामिल करें।
  • त्वचा का संक्रमण होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
  • अमीबियासिस के रोगी के कपड़े, बिस्तर आदि को अलग रखें।
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