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शिशु के अंगों में सूजन या गांठ हो सकता है सिस्टिक हाइग्रोमा, प्रेग्नेंसी में बरतें सावधानी

नवजात की देखभाल By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 21, 2018
शिशु के अंगों में सूजन या गांठ हो सकता है सिस्टिक हाइग्रोमा, प्रेग्नेंसी में बरतें सावधानी

कई बार शिशु जब जन्म लेता है, तो उसके सिर, गर्दन या अन्य किसी अंग पर असामान्य सा उभार या गांठ दिखाई देती है। इसे ही सिस्टिक हाइग्रोमा कहते हैं।

कई बार शिशु जब जन्म लेता है, तो उसके सिर, गर्दन या अन्य किसी अंग पर असामान्य सा उभार या गांठ दिखाई देती है। इसे ही सिस्टिक हाइग्रोमा कहते हैं। आमतौर पर ये गांठ तभी बन जाती है, जब शिशु गर्भ में होता है। शुरुआत में ये गांठ बहुत छोटी होती है और नजर नहीं आती है लेकिन जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है, ये गांठ भी बढ़ती जाती है। कई बार ये बड़े लोगों में भी हो जाता है, जिसके दूसरे कई कारण हो सकते हैं।

शिशुओं को सिस्टिक हाइग्रोमा का ज्यादा खतरा

सिस्टिक हाइग्रोमा आमतौर पर शिशुओं को ज्यादा होता है। कई बार ये बम्प या उभार खतरनाक साबित हो सकता है। गर्भ में होने वाले सिस्टिक हाइग्रोमा के कारण कई बार गर्भपात भी हो सकता है और ये गर्भवती महिला की जान के लिए भी खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर अगर सिस्टिक हाइग्रोमा 20वें सप्ताह तक खुद ही खत्म हो जाए, तो जन्म के बाद बच्चों में इससे होने वाला खतरा कम हो जाता है। चिकित्सकों का मानना है कि अगर गर्भ की जांच के दौरान सिस्टिक हाइग्रोमा पाया जाता है, तो किसी अच्छे हॉस्पिटल में ही डिलीवरी करवानी चाहिए।

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क्यों होता है सिस्टिक हाइग्रोमा

आमतौर पर सिस्टिक हाइग्रोमा जेनेटिक डिसआर्डर ( अनुवांशिक समस्या) है। इसके अलावा कई बार छोटी-छोटी गलतियों के कारण भी इसका खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मां को किसी तरह का वायरल इंफेक्शन हो जाए, तो शिशु को सिस्टिक हाइग्रोमा हो सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ड्रग्स और एल्कोहल का सेवन करती हैं, उनके शिशुओं में ये समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। आमतौर पर जिन बच्चों में क्रोमोसोन एब्नॉर्मलिटी होती है, उनमें इस तरह की गांठ की संभावना बढ़ जाती है।

सिस्टिक हाइग्रोमा के लक्षण

ऐसा सिस्टिक हाइग्रोमा जो, शिशु के जन्म के बाद बनना शुरू होता है, शुरूआत में उसका पता नहीं चलता है। लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, ये उभार के रूप में नजर आने लगता है। आमतौर पर 2 वर्ष की उम्र तक बच्चे का सिस्टिक हाइग्रोमा नजर आने लगता है। सिस्टिक हाइग्रोमा का मुख्य लक्षण किसी अंग पर मांस का छोटा या बड़ा उभार है, जो छूने में मुलायम और स्पंजी लगता है। सिस्टिक हाइग्रोमा ज्यादातर गर्दन पर होता है। हालांकि ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसका आकार एक बड़े बेसबॉल की गेंद जितना हो सकता है। कई बार बड़े हाइग्रोमा के कारण बच्चे को गर्दन घुमाने और अन्य कामों में परेशानी होती है।

बड़े लोगों में सिस्टिक हाइग्रोमा

चोट लगने से या फिर किसी कीड़े के काटने से कई बार लोगों की कलाई या उंगली की स्किन में हल्की सूजन आ जाती है। जिसे लोग यह सोचकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाएगा। लेकिन कई बार कलाई या उंगली के बीच में होने वाली इस सूजन के अंदर ही आपकी हड्डी बढ़ जाती है, जो सिस्ट या ट्यूमर जैसा नजर आने लगता है (हालांकि ट्यूमर नहीं होता है)। यह एक कैप्सूल या सिस्ट के फॉम में आपकी हड्डियों में बनती है, जिसे हम कई बार ब्यूटी मार्क या फिर बम्प समझ बैठते हैं।

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बड़े लोगों में ज्यादातर कलाई में होता है सिस्ट

ज्यादातर ये बम्प आपकी कलाई पर पड़ता है, जो छूने पर काफी मुलायम भी लगता है। इसके अलावा ये आपकी हथेली के बीच के हिस्से पर या फिर अंगूठे के पास भी उत्पन्न हो सकता है। साथ ही ये कई बार आपकी हाथों की उंगलियों के अंदर के हिस्स में भी पनप सकता है।

सिस्ट होने के लक्षण

वैसे तो सिस्ट के पैदा होने का काई कारण नहीं होता है। वहीं, अगर हम इसके बढ़ने की बात करें, तो कई लोगों में ये कम समय में काफी बढ़ जाती है, तो कई में ये सालों तक एक ही साइज में दिखाई देती रहती है। जिन लोगों को बम्प या सिस्ट की समस्या होती है, वे इन लक्षणों पर जरूर ध्यान दें- जैसे जॉइंट्स को मोड़ने में तकलीफ आना, सिस्ट जहां पर हो, वहां कि स्किन लाल होना या स्किन को उतरना, अंदर मौजूद टिशू की वजह से कलाई या उंगली में हल्का दर्द महसूस होना और स्किन में सेंसिटिविटी का कम होना आदि।

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