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स्तन कैंसर के साथ जीवन

कैंसर By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 25, 2013
स्तन कैंसर के साथ जीवन

महिलाओं में स्तन कैंसर गंभीर समस्या है। अगर आप स्तन कैंसर की समस्या से जूझ रही हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे बचाव संभव नहीं है, आइए जानें कैसे।

 

महिलाओं में स्तन कैंसर गंभीर समस्या है। अगर आप स्तन कैंसर की समस्या से जूझ रही हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे बचाव संभव नहीं है। शुरुआती अवस्था में स्तन कैंसर का पता लग जाये तो इसका पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है। अगर आपके परिवार में किसी को स्तन कैंसर की समस्या है तो आप भी बिना किसी संकोच के बीआरसीए 1 व बीआरसीए 2 जांच करवानी चाहिए।

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स्‍तन कैंसर का लक्षण

स्तन कैंसर में महिलाओं के स्तनों में एक अनियमित आकार की गांठ हो जाती है जिसे छूने पर काफी दर्द होता है। यह गांठ स्तन के किसी भाग में हो सकती है। जब स्तनों में होने वाली गांठ बड़ी हो जाती है तो यह अपने ऊपर की त्वचा को अन्दर की ओर खींच लेती है जिसके कारण स्तन के अन्दर की ओर एक गड्ढा जैसा बन जाता है। जैसे-जैसे गांठ बड़ी होती जाती है वैसे-वैसे यह स्तन की ऊपरी  त्वचा से भी चिपक जाती है जिसके कारण स्तन की त्वचा में जलन होने लगती है। स्तन कैंसर बढ़ते-बढ़ते महिलाओं के लसीका ग्रन्थियों तक भी फैल सकता है। स्तन कैंसर का ईलाज शुरुआती अवस्था में होना बहुत जरूरी हो जाता है। यदि इस रोग को बढ़ने से न रोका जाए तो यह रोग पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है।

स्‍तन कैंसर का कारण

  • अगर आपको अपने स्तनों में किसी तरह की गांठ महसूस हो तो तुंरत इसकी जांच कराएं। जांच से यह पता चल सकेगा कि स्तनों में बनने वाली गांठ कितनी खतरनाक है।
  • स्तन कैंसर होने की आशंका काफी हद तक वातावरण और जीवनशैली पर निर्भर करती है।
  • महिलाओं में यह रोग फूड एलर्जी के कारण भी हो सकता है।
  • आनुवंशिकता के कारण भी महिलाओं में स्तन कैंसर हो सकता है।
  • स्तन कैंसर से ग्रसित एक महिला से दूसरी महिला को भी यह हो सकता है।
  • गर्भनिरोधक गोलियां महिलाओं में स्तन कैंसर की मुख्य वजह है। कोई महिला जितनी जल्दी मां बन जाती है उसमें स्तन कैंसर होने की आशंका लगभग उतनी ही कम हो जाती है।

 

स्‍तन कैंसर की चिकित्सा

मैमोग्राम एक तरह का एक्स रे है, जो स्तन कैंसर की पहचान करता है। स्तन कैंसर की पहचान करने की यह बहुत ही विश्वसनीय तकनीक है। इस तकनीक में स्तनों को दो प्लेट्स के बीच में रखा जाता है जिसमें से एक्स रेज गुजरती हैं जिससे ब्रेस्ट टिशू की पूरी तस्वीर आ जाती है। आमतौर पर 40 साल की उम्र वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मेमोग्राम का प्रयोग किया जाता है।

इसके अलवा अल्ट्रासाउंड के जरिए भी स्तन कैंसर का पता लगाया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड से स्तनों में होने वाले ट्यूमर व सिस्ट की पहचान की जाती है।

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Image Source : Getty
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