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पेरेंट्स खुद से कभी न करें बच्चों की तुलना, जानें पेरेंटिंग के 6 सुपरटिप्स

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 16, 2018
पेरेंट्स खुद से कभी न करें बच्चों की तुलना, जानें पेरेंटिंग के 6 सुपरटिप्स

बच्चों से बढ़कर माता-पिता के लिए दुनिया में दूसरा कोई और हो ही नहीं सकता। उनकी खुशी व ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए वह जी-तोड़ मेहनत करते हैं।

बच्चों से बढ़कर माता-पिता के लिए दुनिया में दूसरा कोई और हो ही नहीं सकता। उनकी खुशी व ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए वह जी-तोड़ मेहनत करते हैं। हर मां-बाप की यह हसरत होती है कि वह हर सुख-सुविधा बच्चों को दें। लेकिन मात्र भौतिक सुविधाएं देने से ही अभिभावक अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री नहीं कर सकते। बचपन में बच्चों को जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह है माता-पिता का अमूल्य समय। चूंकि आज के समय में जब माता व पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं तो ऐसे में बच्चों के लिए उनके पास समय ही नहीं होता। पेरेंट्स का खुद से अपने बच्चों की तुलना करने से उन पर बहुत बुरा प्रभाव पढ़ता है। आज हम आपको अच्छी पेरेंटिंग की कुछ टिप्स बता रहे हैं। तो आइए जानते हैं क्या हैं वो टिप्स—

  • आजकल के बच्चों में बहुत गुस्सा है। इसलिए उनकी खुद से तुलना ना करें। बल्कि गलती करने पर भी उन्हें प्यार से समझाएं। बच्चों के नखरे दिखाने या किसी चीज के लिए जिद करने पर आमतौर पर आप उन्‍हें डांटते-फटकारने लगते हैं, लेकिन इसका असर बच्चों पर उल्टा पड़ता है। इसलिए ऐसा ना करें।
  • अक्सर लोग समझते हैं कि अपने बच्‍चों को प्‍यार करने का मतलब, उनकी हर मांग पूरी करना है। लेकिन अगर आप उनकी हर डिमांड को पूरा करते हैं तो यह आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी हैं। अगर आप अपने बच्चे को प्यार करते हैं तो उसे वही दें जो लिये सही और जरूरी है।
  • अच्छी परवरिश में अनुशासन का भी अपना पूर्ण स्थान है। लेकिन बच्‍चों को अनुशासन में रखने का मतलब उन्हें डराना नहीं है। आपको अनुशासन और डर में अंतर पता होना चाहिए। कई माता पिता पैरेंट बच्चों को अनुशासित करने के लिए उन्‍हें मारते पीटते हैं। लेकिन यह सही नहीं है। इसका बच्चों पर गलत असर पड़ता है। जिसके चलते बच्चे पेरेंट्स को जवाब देने लगते हैं। इसलिए ऐसा ना करें।
  • बच्चों के साथ समय बिताने के लिए आप अपना रूटीन कुछ इस तरह सेट करें कि आप पूरे दिन का एक मील उनके साथ अवश्य लें, फिर चाहें वह ब्रेकफास्ट हो या डिनर। साथ ही डाइनिंग टेबल पर पूरे दिन के काम की चर्चा या पढ़ाई की चर्चा करने के स्थान पर कुछ ऐसी बातें करें, जिसे बच्चा इंजॉय कर सके। खाने की टेबल पर अगर आप चाहें तो बच्चे के साथ एक बेहतर बॉन्डिंग क्रिएट कर सकते हैं।
  • जॉब की वजह से आजकल पेरेंट्स के पास अपने खुद के बच्चों के लिए ही वक्त नहीं रह गया है। जबकि बच्चों के साथ वक्त बिताना बहुत जरूरी है। उनके साथ हर खुशी और दुख को बांटें। यह जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्या सोचता, किस चीज में उसकी रुचि है और उसे क्या पसंद नहीं है आदि। ऐसा करने से बच्‍चों और आप में विश्वास भी बनेगा।
  • अमेरिकी पुस्तक संपादक और सोशलाइट जैकी कैनेडी ने कहा था कि आपके बच्चे की दुनिया को विस्तृत करने के लिए बहुत से छोटे बड़े तरीके हैं, पुस्तक-प्रेम उनमें से सर्वोत्तम है। लेकिन वास्तव में बच्चों के मन में यह प्रेम जागृत करने के लिए सबसे पहले पैरेंट्स का भी थोड़ा क्रिएटिव होना बेहद आवश्यक है। लाइफ व पैरेंटिग कोच सलोनी सिंह कहती हैं कि बच्चे की पढ़ने में रूचि पैदा करने के लिए उनके कमरे में एक छोटी सी बुक शेल्फ को सजाकर रखें और उसमें कुछ बेहद अच्छी किताबें रखे, जिसे पढ़ने में बच्चे को मजा आए। इसके अतिरिक्त रात को सोने से पहले रोज बच्चे के साथ बैठकर स्टोरी बुक पढ़ने की आदत डालें या फिर अपने बच्चे के इंटरस्ट को देखते हुए आप कुछ ऐसा करें,, जिससे उसका रूझान किताबों की तरफ बढ़ें।

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