सूखे का स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव

सूखे का स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव

सूखे की स्‍ि‍थति स्‍वास्‍थ्‍य पर न सिर्फ छोटे बल्कि लंबे वक्‍त के लिए प्रभावित करती है।

सूखा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण सम्‍बन्‍धी स्‍तर को तो प्रभावित करता ही है साथ ही इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। झीलों और नदियों में पानी का कम स्तर प्रदूषण बढ़ाता हैं। धूल भरा मौसम सांस की बीमारी पैदा कर सकता है। इसके साथ ही संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कुओं के पानी पर निर्भर लोगों के लिए सूखा खतरा पैदा कर सकता है। सूखे की स्‍ि‍थति हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर न सिर्फ छोटे बल्कि लंबे वक्‍त के लिए प्रभावित करती है। आइए जानें स्वास्थ्य पर सूखे के संभावित प्रभाव क्‍या हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव

गरीब आहार- सूखा अक्सर खाने की आदतों पर प्रभाव डालता है भले ही इसे महसूस न किया जाए। सूखे का बड़ा असर फसलों पर पड़ता है। यानी भोजन को लेकर मुश्किल हालात पैदा होने का खतरा बन जाता है। इससे भोजन की कीमत बढ़ जाती है और कीमतों में इजाफे के चलते लोग ताजा फल और सब्जियां कम खरीदते है।

प्यास- सभी जीवित चीजों जीने के लिए पानी की आवश्‍यकता होती। लोग भोजन के बिना कई सप्ताह तक रह सकते हैं, लेकिन पानी के बिना केवल कुछ ही दिन। पानी के बिना जीवन की कल्‍पना भी नही की जा सकती।

पानी की गुणवत्ता- पानी का उच्‍च तापमान झीलों और जलाशयों में ऑक्सीजन का स्तर घटा देता है। और यह स्तर मछली और अन्य जलीय जीवन और पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता हैं।

कुपोषण- सूखा मौसम पर प्रभाव डालता है। यह ऐसी स्थिति पैदा कर देता है जो कुछ फसलों में कीट और रोग को प्रोत्साहित करता हैं। कम फसल की पैदावार, बढ़ती खाद्य कीमतों और स्‍टोरेज पर प्रभाव डालती है जिसका परिणाम संभावित कुपोषण के रूप में सामने आता है।

श्‍वसन संक्रमण- धूल, सूखे की स्थिति और जंगल में आग अक्सर सूखे के साथ मिलकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। इन पदार्थों से ब्रोन्कियल मार्ग, फेफड़ों में जलन और सांस की बीमारियां हो सकती हैं। इसके साथ ही अस्‍थमा का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं, ब्रोंकाइटिस और बैक्टीरियल निमोनिया जैसे सांस सम्‍बन्‍धी संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।

सफाई- सफाई के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन, सूखे की स्थिति में जल संरक्षण की जरूरत होती है और इसका बड़ा असर उचित सफाई व्‍यवस्‍था पर पड़ता है। संरक्षण के प्रयासों के चलते इस जल को स्वच्छता और सफाई में नहीं लगा सकते।

मनोरंजक गतिविधियां- जो लोग सूखे के दौरान पानी से संबंधित मनोरंजक गतिविधियों में संलग्न रहते हैं, उन्‍हें जलजनित रोग होने की संभावना अधिक होती है। ये रोग बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और अन्‍य रसायनों के कारण हो सकते हैं। ऐसा गलती से या जानबूझकर पानी निगलने से हो सकता है।

संक्रामक रोग- जब वर्षा कम होती है तो वायरस, प्रोटोजोआ और बैक्टीरिया पानी को गंदा कर देते है चाहे वह भूजल हो या सतह पर मौजूद पानी। जिन लोगों को पीने का पानी निजी कुओं से मिलता है, उनके संक्रमित होने का खतरा अधिक रहता है।

 

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