World Suicide Prevention Day 2020: लंबे समय तक डिप्रेशन भी बन सकता है आत्‍महत्‍या की वजह, जानें बचाव के तरीके

Updated at: Sep 10, 2020
World Suicide Prevention Day 2020: लंबे समय तक डिप्रेशन भी बन सकता है आत्‍महत्‍या की वजह, जानें बचाव के तरीके

यदि कोई व्‍यक्ति बहुत ज्‍यादा डिप्रेशन में है, तो उसे मेंटल सपोर्ट के की जरूरत होती है, अन्यथा दर्द, डर और निराशा उसे गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं।

Atul Modi
अन्य़ बीमारियांWritten by: Atul ModiPublished at: Sep 10, 2018

World Suicide Prevention Day 2020: आत्महत्या का मतलब है अपने जीवन को समाप्त करना। कभी-कभी लोग दर्द या पीड़ा से बचने के इस गलत रास्‍ते का चुनाव करते हैं। जब कोई अपना जीवन समाप्त करता है, तो हम कहते हैं कि वे "आत्महत्या से मर गए"। एक "आत्महत्या प्रयास" का अर्थ है कि किसी ने अपने जीवन को समाप्त करने की कोशिश की, लेकिन मरने से बच गया। आत्महत्या करना या खुद को घात पहुंचाना निराशा का सबसे विकट रूप है।

वो लोग जो आत्महत्या करने की सोचते हैं वो बहुत ही निराशावादी होते है और परिस्थितियों के आगे बहुत ही जल्दी घुटने टेक देते हैं। बहुत से लोगों के लिए आत्महत्या हर परेशानी का सरल समाधान होती है। एक्‍सपर्ट की मानें तो आत्‍महत्‍या एक मानसिक रोग हो सकता है। यदि कोई व्‍यक्ति बहुत ज्‍यादा अवसादग्रस्‍त है या किसी बात को लेकर बहुत परेशान है तो उसे इसका समाधान निकालना चाहिए, आत्‍महत्‍या के रास्‍ते का चुनाव गलत है। आत्‍महत्‍या के कई कारण हो सकते हैं। 

 

आत्‍महत्‍या करने की वजह- Suicide Causes 

आत्महत्या डिप्रेशन और इम्पल्सिव बिहेवियर से जुड़ा हुआ है। लम्बे समय तक रहने वाला डिप्रेशन भी आत्महत्या का कारक हो सकता है। इनके अलावा कई और ऐसे कारण हैं जिनसे कि व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में सोचता है। जैसे मानसिक अस्वस्थता बार्डर लाइन पर्सनालिटी डिज़ार्डर, क्रोनिक या शारीरिक अस्वस्थता और वातावरण भी एक कारण हो सकता है।

कभी कभी साइकालाजिकल डिज़ार्डर जैसे बार्डर लाइन पर्सनालिटी डिज़ार्डर जैसी बीमारियों से भी आत्महत्या का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपके दिमाग में सेरोटोनिन का लेवल कम है तो भी आपके दिमाग में आत्महत्या करने का ख्याल आ सकता है क्योंकि सेरोटोनिन के लेवल के कम होने से डीप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति दोनों की ही सम्भावना रहती है।

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क्‍यों बढ़ रहे हैं आत्‍महत्‍या के मामले 

  • आत्महत्या अक्सर निराशा के चलते लोग करते हैं, जिसके लिए बाइपोलर डिस्‍आर्डर, सीजोफ्र‍ेनिया, शराब की लत या मादक दवाओं का सेवन जैसे मानसिक विकारों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। 
  • तनाव के कारक जैसे वित्तीय कठिनाइयां या पारस्परिक संबंधों में परेशानियों की भी अक्सर एक भूमिका होती है। मानसिक रोग और नशीले पदार्थ के दुरुपयोग आमतौर पर आपस में संबंधित दिखते हैं।
  • अन्य जोखिम कारकों में पूर्व में आत्महत्या के किए गए प्रयास, ऐसा करने के लिए साधनों की आसान उपलब्धता, आत्महत्या का पारिवारिक इतिहास या घातक मस्तिष्क चोट भी शामिल हैं। 
  • सामाजिक आर्थिक कारक जैसे बेरोजगारी, गरीबी, बेघर होना और भेदभाव किया जाना, आत्महत्या के विचारों को पैदा करता हैं। 
  • आत्महत्या के विचार के लिए आनुवांशिकी कारक भी काफी हद तक जिम्मेदार होते है। 

आत्‍महत्‍या करने वाले को बचाया जा सकता है- Suicide prevention 

  • अगर आपके घर में कोई चुप-चुप, परेशान या अवसाद से ग्रसित है तो समस्‍याओं से बाहर निकालकर आत्‍महत्‍या जैसी प्रवृत्ति से बाहर निकाला जा सकता है। 
  • अगर आप किसी बात को लेकर बहुत परेशान हैं तो उसका समाधान निकालने की कोशिश करें। जीवन को समाप्‍त करना किसी चीज का सॉल्‍यूशन नहीं हो सकता है। अच्‍छी नींद न लेने वालों को इन 5 गंभीर रोगों के होने का रहता है खतरा, जानें क्‍या हैं ये
  • छोटी-छोटी बातों को इग्‍नोर करना सीखें, किसी की बात बुरी लगे तो उस बात को लेकर बैठें नहीं बल्कि बात करके वहीं खत्‍म कर दें। क्‍योंकि कई बार ऐसी बातें अवसाद का कारण बनती है। 
  • पारिवारिक झगड़े और बेरोगारी जैसी समस्‍या हर इंसान के जीवन में आती है। ऐसी समस्‍याओं के लिए जान देना सही नहीं है। 
  • प्‍यार में धोखा खाने के बाद जिंदगी को खत्‍म करना कायरता है। लाइफ में किसी लड़की या लड़के का प्‍यार ही काफी नहीं होता है, परिवार से बड़ी पूंजी और माता पिता का प्‍यार सबसे पहले है। 

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