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तनावग्रस्‍त महिलाओं को अल्‍जाइमर्स का खतरा अधिक

लेटेस्ट By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 15, 2014
तनावग्रस्‍त महिलाओं को अल्‍जाइमर्स का खतरा अधिक

जो महिलायें तनाव का शिकार रहती हैं या जो बहुत ज्‍यादा शर्माती हैं, उन्‍हें अल्‍जाइमर होने का खतरा सबसे अधिक होता है।

stressed up womanजो महिलायें शर्मीली और अधिक संवेदनशील होती हैं उन्‍हें अलजाइमर होने का खतरा अधिक होता है। एक नये शोध में यह बात सामने आयी है।



शोध में यह बात सामने आयी है कि वे महिलायें जो चिंतित रहती हैं, तनाव का प्रबंधन सही प्रकार नहीं करती हैं और मध्‍यम आयु में मूड स्विंग का सामना करती हैं उन्‍हे अल्‍जाइमर होने का खतरा अधिक होता है।

स्वीडन की यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग साहलग्रेन्‍स्‍का एकेडमी में कार्यरत लीना जोनासन कुछ शोध में साबित हुआ है कि लंबे समय तक बने रहने वाला तनाव अल्‍जाइमर के खतरे को बढ़ा देता है जो एक खतरनाक बीमारी है। इसके अलावा इससे तो इनकार किया ही नहीं जा सकता कि तनाव अपने आप में एक गंभीर रोग है।

शोध में यह बात भी सामने आयी कि शर्मीली महिलायें भी आसानी से चिं‍तित हो सकती हैं, उन्‍हें भी यह अल्‍जाइमर होने का खतरा बहुत अधिक होता है।

न्‍यूरोटिसिज्‍म से ग्रस्‍त लोग ज्‍यादा आसानी से चिंतित हो जाते हैं। ऐसे लोगों को मूड स्विंग की शिकायत भी ज्‍यादा होती है। और साथ ही तनाव का सही प्रकार प्रबंधन करने में भी वे मशक्‍कत करते हैं।

न्‍यूरोटिक से पीडि़त व्‍यक्ति तनाव को लेकर अधिक संवेदनशील होता है। यह बात अकेडमी द्वारा 40 वर्षों तक 800 महिलाओं पर शोध करने के बाद सामने आई है।

महिलाओं से पूछा गया कि क्‍या उन्‍हें लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव का सामना करना पड़ा है। और इसके बाद उनकी याद्दाश्‍त की जांच की गयी।

करीब चालीस साल बाद 2006 में फॉलोअप स्‍टडी में हर पांचवी महिला को डिमेंशिया से जुड़े लक्षण देखे गए। जोनासन ने कहा कि हम देख सकते हैं कि जिन महिलाओं में अल्‍जाइमर बीमारी के लक्षण उनके व्‍यक्तित्‍व में चालीस साल पहले ही नजर आ गए थे। यह स्‍टडी न्‍यूरोलॉजी जर्नल में छपने वाली है।

 

Image Courtesy- Getty images

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