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बच्चों के साथ भूलकर भी न अपनाएं सख्त रवैया, होंगे ये 3 बड़े नुकसान

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 30, 2018
बच्चों के साथ भूलकर भी न अपनाएं सख्त रवैया, होंगे ये 3 बड़े नुकसान

क्या आप ऐसे पेरेंट्स हैं जो हर वक्त अपने बच्चों पर सख्ती रखते हैं? क्या आपको अपने बच्चों को हर बात बताने के लिए या पूछने के लिए सख्त रवैया अपनाना पड़ता है?

क्या आप ऐसे पेरेंट्स हैं जो हर वक्त अपने बच्चों पर सख्ती रखते हैं? क्या आपको अपने बच्चों को हर बात बताने के लिए या पूछने के लिए सख्त रवैया अपनाना पड़ता है? अगर आपका जवाब हां तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चों के साथ ज्यादा सख़्ती से पेश आने पर आपका बच्चा गुस्सैल और ज़िद्दी हो जाता है। जिसका नतीजा अभिभावक को बच्चों के उल्टे सीधे जवाब और गलत एटीट्यूट के रूप में भी भुगतना पड़ सकता है। 

कुछ पेरेंट्स का कहना होता है कि एक उम्र में बच्चों सख्त रवैया की जरूरत होती है और बच्चा ऐसे ही सही रास्ते पर चलता है। जबकि विशेषज्ञ इस बात को पूरी तरह से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि बच्चों के साथ यदि पेरेंट्स एक दोस्त बनकर रहेंगे तो बच्चे उनके साथ खुलकर बात भी करेंगे और अपनी बातें उनके साथ शेयर भी करेंगे। जबकि पेरेंट्स को लगता है कि ऐसा करने से वह भी बच्चों की गलत हरकत में उनका साथ दे रहे हैं। आज हम पेरेंट्स के लिए कुछ ऐसी टिप्स बता रहे हैं जिनसे आप समझ सकते हैं कि इस तरह का व्यवहार कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

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पहले खुद को बदलें

पेरेंट्स को यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि बच्चों से कोई उम्मीद रखने से अच्छा है कि वह पहले खुद को बदलें। बच्‍चों को अच्‍छे संस्‍कार या उनसे किसी भी तरह की उम्‍मीद करने से पहले अपनी बुरी आदतों को बदलें, यानी जो आप बच्‍चों से चाहते हैं, पहले उसे स्‍वयं करके दिखाये। क्‍योंकि बच्‍चा वही करता है जो अपने आसपास देखता है। इसके लिये किताबों के साथ कुछ समय गुजारना, देर रात तक टीवी न देखना, चीजों को सही जगह पर रखना, बच्‍चों के समाने कभी भी झगड़ा न करना आदि जैसे कुछ अच्छी आदतों को खुद में विकसित करनी होगी।

डांटने की जगह प्यार से समझाएं

अगर आप बच्चा कोई गलती है तो कोशिश करें कि उसे डांटने के बजाय प्यार से समझाएं। बच्चों के नखरे दिखाने या किसी चीज के लिए जिद करने पर आमतौर पर आप उन्‍हें डांटते-फटकारने लगते हैं, लेकिन इसका असर बच्चों पर उल्टा पड़ता है। ऐसे में आपके जोर से चिल्‍लाने से बच्चा भी तेज आवाज में रोने व चिखने लगता है। इसलिए इस स्थिति में अपने बच्‍चों को शांत तरीके से समझाये कि वह जो कर रहा है वो गलत हो।

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दोस्ती का हाथ बढ़ाएं

बच्चों के सिर पर बैठने या फिर उन पर चौबीस घंटे नजर रखने के बजाय यदि आप बच्चों के साथ दोस्ती का रिश्ता रखेंगे तो ज्यादा फायदे में रहेंगे। आजकल शहरों में पैरेंट वर्किंग होने के नाते अपने बच्चों के साथ औसतन चार घंटे ही गुजार पाते हैं, जो बच्‍चों के विकास के लिए काफी नहीं हैं। इसलिए अपने बच्‍चों को ज्‍यादा से ज्‍यादा समय देने की कोशिश करें।

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