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गर्मियों में आपकी इन मामूली गलतियों से हो सकता है पेट का संक्रमण, ऐसे बचें

तन मन By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 03, 2018
गर्मियों में आपकी इन मामूली गलतियों से हो सकता है पेट का संक्रमण, ऐसे बचें

गर्मियों में पेट की समस्या के मामले कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसका कारण है कि इस मौसम में जीवाणुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। 

Quick Bites
  • इस मौसम में दस्त, डायरिया, पेट दर्द संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं।
  • डायरिया के लक्षणों में पेट दर्द, उल्टी, पेट में मरोड़ हो सकते हैं। 
  • दूध का न पचना, जिसे मेडिकल भाषा में लैक्टोज इनटॉलरेंस कहते हैं।

गर्मियों में पेट की समस्या के मामले कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसका कारण है कि इस मौसम में जीवाणुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। अस्वास्थ्यकर जीवनशैली जैसे प्रदूषित खाद्य व अस्वच्छ पेय पदार्थों का सेवन और कुछ खाने से पहले साबुन से हाथ न धोना आदि कारण पेट की समस्याओं को बढ़ा देते हैं, जिनसे बचा जा सकता है। क्योंकि इस मौसम में दस्त, डायरिया, पेट दर्द उल्टी और जॉन्डिस आदि हाजमे से संबंधित समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। इन समस्याओं से बचा सकता है, बशर्ते कि आप शारीरिक साफ-सफाई पर खास ध्यान दें। 

फिजीशियन डॉ.आरती लालचंदानी के अनुसार किसी भी खाद्य पदार्थ को खाने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ साफ करना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकतर मामलों में डायरिया आदि पेट की समस्याओं के जीवाणु अस्वच्छ हाथों से खाद्य पदार्र्थों को खाने से होते हैं। दस्त और डायरिया के लक्षणों में पेट दर्द, उल्टी, पेट में मरोड़ आदि लक्षण प्रकट हो सकते हैं। 

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दस्त से मिले राहत 

इस मौसम में जीवाणुओं की संख्या बढ़ने से संक्रमण(इंफेक्शन) होने का जोखिम बढ़ जाता है। पेट में यह संक्रमण दस्त की  समस्या पैदा कर देता है। आइए दस्त के कारणों पर डालते हैं-

संक्रमण: दस्त के सबसे ज्यादा मामले संक्रमण के कारण होते हैं। जैसे-वाइरस (रोटा वाइरस) और जीवाणु बैक्टेरिया (ई.कोली व सलमोनेला)  से संक्रमण होना।ये वाइरस और जीवाणु खाने या पीने के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं, जिस कारण आंतों में संक्रमण होता है। 

फूड इनटॉलरेंस: कभी-कभी हमारा पाचन तंत्र कुछ खाद्य पदार्र्थों को पचा नहीं पाता और उससे भी दस्त लगता है। जैसे- दूध का न पचना, जिसे मेडिकल भाषा में लैक्टोज इनटॉलरेंस कहते हैं।  

दवाओं के साइड इफेक्ट: इसके कारण भी दस्त हो सकते हैं। जैसे-कुछ एंटीबॉयटिक्स और कीमोथेरेपी से संबंधित दवाएं। 

कोलाइटिस: इस रोग के कारण  आंतों में सूजन हो जाती, जो दस्त का कारण बन सकती है। 

ये हैं लक्षण 

कई बार मल का तरल रूप में  आना और मल के वेग को रोकने में मुश्किल होना। इसके अलावा कभी-कभी रोगी का मल पर नियंत्रण खत्म हो जाता है। वहीं पेट में दर्द, एेंंठन और फुलावट होना, मल में खून या आंव का आना, उल्टी व बुखार और पेशाब कम होने जैसी समस्या पैदा हो सकती है। 

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बात इलाज की 

दस्त में सबसे बड़ा खतरा शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होना है। डिहाइड्रेशन के कारण गुर्र्दों पर बुरा असर पड़ता है और मरीज का ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। घर पर ही दस्त का 

इलाज शुरू करें

  • पानी, नारियल पानी, लस्सी, दही, और नींबू पानी लें। सत्तू का सेवन करें। 
  • चाय, कॉफी और शराब आदि बिल्कुल न लेंं। खान में खिचड़ी, केला, चावल, दही आदि लें। 
  • खाने में तले हुए और मसालेदार खाना न लें। दस्त के समय कुछ समय तक कुछ न लें। 
  • नमक और चीनी पानी का घोल डिहाइड्रेशन से राहत पाने मेंं उपयोगी है। 
  • डॉक्टर की सलाह कब लें
  • मल का काला होना, खून आना, तेज बुखार, पेट में दर्द और शरीर में पानी की कमी होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें। डॉक्टर की सलाह के बगैर एंटीबॉयोटिक लेना सही नही है। 

दस्त से बचाव 

हाथ धोना एकमात्र ऐसा उपाय है, जो आपको संक्रमण से होने वाली कई बीमारियों से बचा सकता है। खाने से पहले हाथ धोने की आदत डालें। 

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Written by
Rashmi Upadhyay
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 03, 2018

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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