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पूल या हॉट टब में हो सकती हैं ये डरावनी बातें

एक्सरसाइज और फिटनेस By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 26, 2014
पूल या हॉट टब में हो सकती हैं ये डरावनी बातें

स्विमिंग पूल या बाथ टब में नहाना वाकई रोमांचक और मज़ेदार होता है लेकिन क्या आपको पता है, कि इस मजेदार स्नान को लेते समय आप कई अनजाने लेकिन खतरनाक जोखिमों से घिरे होते?

Quick Bites
  • पूल या हॉट टब में नाहाते वक्त रहें सावधान।
  • नेग्लेरिआ फोलेरी एक प्रकार का अमीबा होता है।
  • पूल या हॉट टब में हो सकता है ई. कोलाई।
  • सेकेंडरी ड्राव्निंग भी बन सकता है खतरा।

जब आप गर्मी की मार से बचने के लिए बाथ टब में ठंडे पानी में लेटे हुए या स्विमिंग पूल में नहाते हुए खुद को रिलेक्स कर रहे होते हैं तो पूल या हॉट टब में नहाने से जुड़े कुछ ऐसे खतरे भी आपको घेरे हुए होते हैं, जिनसे आप पूरी तरह बेखबर होते हैं। आपको लग रहा होगा कि हम बात को कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ा कर बोल रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यही है कि पूल या हॉट टब में स्नान से कुछ खतरे जुड़े होते हैं। चलिये बताते हैं कैसे और क्यों.......


अमीबा (Amoeba) का खतरा

नेग्लेरिआ फोलेरी एक प्रकार का अमीबा होता है, जो गर्मी में पनपता है। यह आपके बाथ टब या पूल के गर्म पानी में भी पनप सकता है। यदि एक बार अमीबा आपके नाक में चला जाए तो यह जीवन केलिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह छोटा शैतान अपनी नसों में से किसी एक से जुड जाता है और इस नस के माध्यम से दिमाग तक संकेत पहुंचाता है। इसके कारण दिमाग में सूजन आ सकती है। इसके हमले के हाद के लक्षणों में गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे, और मतिभ्रम शामिल हो सकते हैं।

 

 

Scary Things in Pool

 

 

ई. कोलाई (E. coli) का खतरा

अमीबा के अलावा आपको पूल या हॉट टब में नहाने का एक और खतरा भी हो सकता है, और वो है 'ई. कोलाई'। शोधकर्ताओं ने पाया कि 58 प्रतिशत स्विमिंग पूल फिल्टर नमूनों में ई. कोलाई मिला। ई. कोलाई एक प्रकार का जीवाणु है, जो सामान्य रूप से मानव आंत, यहां तक ​​कि मल में पाया जाता है। इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि पूल या बाथ टब में क्लोरीन का स्तर और पीएच का संतुलन अच्छा हो, क्योंकि क्लोरीन और पीएच संतुलन का बिगड़ा स्तर इस बैक्टीरिया को विकसित करने के लिए एकदम सही हालत बना देता है। इस बैक्टीरिया के शरीर में जाने पर मतली, उल्टी, खूनी दस्त, या पेट में ऐंठन जैसे लक्षण हो सकते हैं। कई बार कुछ गंभीर मामलों में यह बैक्टीरिया गुर्दे की विफलता, यहां तक की मृत्यु का कारण भी बन सकता है।



बिजली कड़कने पर खतरा

आपने शायद ही ऐसी कोई चेतावनी कहीं पढ़ी, देखी या सुनी होगी कि तूफान के दौरान पूल या बाथ टब से दूर रहें, पर किसे परवाह!
लेकिन आपको इसके बारे में परवाह करना शूरू करना होगा क्योंकि बिजली गिरने पर पूल में रहना कई मायनों में आपके लिए बहुत बड़ा खतरा होता है।
 

 

सेकेंडरी ड्राव्निंग (Secondary Drowning)

यहां पूल या बाथ टब में न हाने का एक और खतरा हो सकता है, और वो है सेकेंडरी ड्राव्निंग। इसका मतलब है कि जब कोई इंसान कभी डूबते-डूबते बच जाता है तो उस समय उसके पेट में कुछ पानी बचा रह जाता है। जब कभी बाद में आप स्विमिंग या बाछ टब में होते हैं तो यह पुराना पानी ही आपको सांस लेने में मुश्किल पैदा कर देता है। इसके कारण फेफड़े के इडिमा या फेफड़ों की सूजन हो सकती है।  

 

Scary Things About Pool

 

 

रखें सावधानी

स्विमिंग पूल में बाथ लेने से पहले एक बार नहा लेना चाहिए। इससे शरीर का तापमान तो कम हो ही जाता है, शरीर से पसीना भी साफ हो जाता है। इस से पूल का पानी गंदा होने से बचता है और उस में अम्लीयता आ जाती है। प्रकृति का नियम है कि पानी में भीगने से पेशाब आता है, इसलिए पूल में यूरीन से संक्रमण होने की संभावना हो जाती है। इसलिए पूल में जाने से पहले बाथरूम अवश्य जाना चाहिए। पूल में उतरने से पहले इस बात का पता लगा लीजिए कि पानी लगातार फिल्टर हो रहा है या नहीं, या उसके क्लोरिनेशन का क्या इंतजाम है। ऐसा न होने पर पूल में स्नान करने से कई प्रकार के संक्रमाण हो ने की आशंका बढ़ जाती है। य ह भी सुनिष्चित करें कि पानी ठीक से छना हो और उसे कीटाणुरहित रखने के लिए क्लोरीन का ट्रीटमेंट दिया गया हो, तभी वह आप के लिए सुरक्षित हो सकता है। .

 

विशेषज्ञों के मत

स्विमिंग पूल में जाने से पहले एन्टी बैक्टीरिया साबुन से अच्छे से नहाना पड़ता है, पैरों को साफ कर, सर को अच्छे से साफ कर, सर पर कैप पहन कर स्विमिंग पूल में जाना चाहियें। लेकिन लेकिन अधिकांष लोग स्विमिंग पूल में जाते है कपडे उतारते है और घुस जाते हैं। जिससे बहुत ज्यादा खतरा बढ़ जाता है एक आदमी से दूसरे को दूसरे से तीसरे को – सांस की बीमारी गले की बीमारी और आइज इनफेक्शन बहुत हो जाता है। हालांकि यदि पूल के पानी में उचित मात्रा में क्लोरीन मौजूद हो तो उसकी एसिडिटी पर भी कंट्रोल रखा जा सकता है और उस के जीवाणुओं व कीटाणुओं से छुटकारा पाया जा सकता है। हां, क्लोरीन के कारण किसी किसी की आंखें लाल हो कसती हैं और कुछ वक्त के लिए खुजली हो सकती है।

Written by
Rahul Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJun 26, 2014

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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