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Social Media Day: मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है फेसबुक, डिप्रेशन और तनाव करता है कम

लेटेस्ट By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 29, 2019
Social Media Day: मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है फेसबुक, डिप्रेशन और तनाव करता है कम

कम्प्यूटर मीडिएटेड कम्यूनिकेशन नाम के जर्नल में प्रकाशित मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक नियमित रूप से फेसबुक चलाने वाले लोगों में तनाव, बेचैनी और डिप्रेशन जैसी साइकोलॉजिकल समस्याएं होने की आशंका 1.63 गुना तक कम हो जाती है

अगर आप फेसबुक चलाने के शौकीन या फिर ये कहा जाए कि आप पूरे दिन फेसबुक पर चिपके रहते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि नियमित रूप से फेसबुक चलाने वाले लोगों में तनाव, बेचैनी और डिप्रेशन जैसी साइकोलॉजिकल समस्याएं होने की आशंका 1.63 गुना तक कम हो जाती है।

हाल ही में हुए एक शोध से सामने आया है कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप्स का इस्तेमाल करने के कई सकरात्मक पहलू भी हैं। अध्ययन के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि फेसबुक के इस्तेमाल से वयस्कों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

फेसबुक से मानसिक स्वास्थ्य में होता है सुधार

कम्प्यूटर मीडिएटेड कम्यूनिकेशन नाम के जर्नल में प्रकाशित मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, वे लोग, जो नियमित रूप से सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर और उसमें सुधार होता है। इसके साथ ही अवसाद, चिंता जैसी  गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं से भी लड़ने में मदद मिलती है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में मीडिया और इन्फर्मेशन के प्रोफेसर कीथ हैम्प्टन का कहना है कि कई प्लैटफॉर्म्स जैसे कम्यूनिकेशन टेक्नॉलजी और सोशल मीडिया की मदद से रिलेशनशिप को बनाए रखना आसान होता है। इसके साथ ही इनके जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां भी जुटाई जा सकती हैं।

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अध्ययन के निष्कर्षों से सामने आई महत्वपूर्ण बातें

  • सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले 63 फीसदी लोगों में गंभीर मनोवैज्ञानिक बीमारियों का खतरा पहले साल के मुकाबले दूसरे साल कम हो जाता है। 
  • अवसाद और चिंता जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं में भी इससे फायदा होता है। 
  • इस अध्ययन से सोशल मीडिया, मोबाइल टेक्नॉलजी और इंटरनेट के जरिए मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने के विचार को चुनौती मिलती है।

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अध्ययन में व्यस्को पर दिया गया ध्यान

अध्ययन के मुख्य लेखक कीथ का कहना है कि अब तक की गई खोज में वयस्कों पर पहले कभी भी ध्यान नहीं दिया गया था। इससे पहले सोशल मीडिया पर हुए ज्यादातर शोधों में युवाओं और कॉलेज छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे में सोशल मीडिया का उनके जीवन पर क्या असर होता है यह जिंदगी के अलग-अलग चरणों में भिन्न हो सकता है। उनका कहा है कि इसका टेक्नॉलजी के प्रयोग से ज्यादा संबंध नहीं है।

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