Subscribe to Onlymyhealth Newsletter
  • I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.

खुद पर हंसने वाले लोगों को कभी नहीं होता डिप्रेशन

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 14, 2018
खुद पर हंसने वाले लोगों को कभी नहीं होता डिप्रेशन

एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि अक्सर खुद पर चुटकले कहने वाले लोगों और खुद पर हंसने वालों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का स्तर काफी अच्छा होता है।

आजकल के समय में अक्सर लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इसके पीछे का कारण बढ़ता तनाव और प्रतिस्पर्धा है। ना सिर्फ बड़े बूढ़े बल्कि आजकल छोटे बच्चे और युवा भी तनावग्रस्त होकर डिप्रेशन की चपेट में आ रहे हैं। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि अक्सर खुद पर चुटकले कहने वाले लोगों और खुद पर हंसने वालों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का स्तर काफी अच्छा होता है। यह अध्ययन पर्सनेलिटी एंड इंडीविजुअल डिफरेंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन हास्य विनोद के मनोविज्ञान पर पहले आए अध्ययनों का विरोधाभासी है।

दरअसल, अब तक कई सारे अध्ययनों में यह कहा गया था कि खुद पर चुटकले कहना लोगों के बीच नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभावों से विशेष रूप से संबद्ध है जो हमेशा ही इस शैली का इस्तेमाल करते हैं। स्पेन के ग्रनादा यूनिवर्सिटी के जॉर्ज टोर मरीन ने बताया, 'खुद पर चुटकले कहने की कहीं अधिक प्रवृत्ति मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के आयाम जैसे- खुशी और सामाजिकता के अच्छा होने का संकेत है। हमारा मानना है कि इस तरह के हास्य के इस्तेमाल में संभावित सांस्कृतिक अंतरों को लक्षित नये अध्ययन करना जरूरी है।' 

इसे भी पढ़ें : पतली कार्निया वाले लोगों को रहता है नेत्र रोग का ज्यादा खतरा

मरीन आगे कहते हैं, 'इस अध्ययन के नतीजे अविरोधी हैं जो बताते हैं कि हमारे देश में खुद पर हंसना पारंपरिक रूप से सकारात्मक संकेत का उत्तरदायी है। हालांकि अध्ययन के नतीजे इस बात की ओर भी इशारे करते हैं कि खुद पर हंसने को लेकर की गई रिसर्च कहां पर हुई है, इसको लेकर भी नतीजे में बदलाव हो सकता है।' दरअसल, खुद पर चुटकुले कहना गुस्से को दबाने की व्यापक प्रवृत्ति माना जाता है। 

इसे भी पढ़ें : मीठे के अधिक सेवन से पुरुषों को हो सकता ये रोग

डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन एक मनोवैज्ञानिक असंतुलन है। आमतौर पर लोग डिप्रेशन को आमतौर पर रहने वाली उदासी ही मानते हैं। लेकिन ऐसा है नहीं। उदासी में जहां व्‍यक्ति कुछ समय बाद सामान्‍य हो जाता है, वहीं डिप्रेशन में यही उदासी काफी लंबे समय तक और गहरी बनी रहती है। यह उदासी हर जगह उसके साथ रहती है। इसका असर उसके काम पर भी पड़ता है। डिप्रेशन ग्रस्‍त व्‍‍यक्ति की रुचि किसी काम में नहीं रहती। यहां तक कि वह काम जो कभी उसे सबसे ज्‍यादा पसंद होता था, उस काम को करने का भी उसका मन नहीं करता। अपने वर्तमान और भविष्‍य को लेकर भी वह काफी उदास और नाउम्‍मीद रहता है। अवसादग्रस्‍त व्‍यक्ति की नींद और भूख भी बिगड़ जाती है।
 
ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप
Written by
ओन्लीमाईहैल्थ लेखक
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 14, 2018

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK