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देर रात तक जागने वाले पुरूषों मे हो सकता है नपुंसकता का खतरा:स्टडी

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By शीतल बिष्ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 27, 2019
देर रात तक जागने  वाले पुरूषों मे हो सकता है नपुंसकता का खतरा:स्टडी

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ राज माथुर का कहना है कि देर रात तक सोने वाले लोगों को अपने स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। क्‍योंकि हालिया अध्‍ययन बताते हैं, कि देर रात

क्या आप देर रात तक टीवी, मोबाइल या फिर कोई फिल्म या वेब सीरीज देखने के शौकीन हैं? यह सवाल आपको थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन यह एक सामान्य सवाल है। क्योंकि बहुत से लोगों में आधी रात तक टीवी सीरियल, मूवी, फोन या फिर अन्य चीजों के कारण देर रात सोने की की आदत है। इस सबके लिए सबसे अच्छा उदाहरण नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, अल्ट बालाजी और कई अनय सर्विस प्रोवाइडर है, जिनमें नई—नई वेब सीरीज आती हैं, जिसको देखने के लिए आप में से बहुत से लोग आधी रात सोते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव के बारे में सोचा है? नहीं सोचा ना...तो हम आपको बताते हैं कि सुबह 2 या 3 बजे सोना भी कभी—कभी आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। जी हां देर सोने का प्रभाव आपकी आंखों के नीचे काले घरे, अपच व कब्ज की समस्या के रूप में देखा जा सकता है।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ जीवन शैली ही एक स्वस्थ जीवन का नेतृत्व करती है और इस प्रक्रिया से एक स्वस्थ परिवार नियोजन भी शामिल है। हालिया शोध के अनुसार, जो पुरुष परिवार बनाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें 'जल्दी सोने और जल्दी उठने' का सुनहरा नियम हो सकता है। क्योंकि देर रात जगना पुरूषों में नपुंसकता के खतरे को बढ़ाता है। 

अध्ययन के अनुसार 

शोध के अनुसार, जो पुरुष जल्दी सोते हैं, यानी 10.30 बजे से पहले सोते हैं, उनमें अच्छी गुणवत्ता वाले शुक्राणु होने की संभावना अधिक होती है। यदि इसे अन्य पुरुषों की तुलना करें, जो कि 11.30 बजे के बाद सोते हैं, तो उनमें शुक्राणु यानि स्पर्म की गुणवत्ता बिगड़ जाती है।

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हालांकि, पिछले शोधों में पाया गया कि 'नींद' पुरुषों और महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भारी प्रभाव डाल सकती है। लेकिन इस तरह का कोई सबूत नहीं है। लेकिन मस्तिष्क का कुछ हिस्सा, जो स्लीप हार्मोन और शुक्राणु प्रक्रिया के उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है।

अध्ययन के सह लेखक हंस जैकब इंगर्सलेव के अनुसार, अनिद्रा शुक्राणु के पतन का मूल कारण है। इसके अलावा इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें मनोवैज्ञानिक कारण भी शामिल हैं। अनिद्रा  पुरुषों को अधिक तनाव महसूस करते हैं, जिससे उनकी पौरुष क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए पुरुष और महिला दोनों को कम से कम 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लेनी चाहिए। इसके अलावा, नींद के समय में उतार-चढ़ाव नहीं होना चाहिए, सोने का समय निश्चित कर लेना चाहिए। क्योंकी अच्छी व पूरी नींद अच्छे शुक्राणु गुणवत्ता देती है और स्वाभाविक रूप से बच्चे को पैदा करने की क्षमता में भी सुधार करती है।

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शीतल बिष्ट
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJun 27, 2019

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