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जानें, भारत में कितने प्रतिशत रोगी लेते हैं डॉक्टरों से नींद की गोलियां

Updated at: Mar 16, 2018
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Written by: ओन्लीमाईहैल्थ लेखकPublished at: Mar 16, 2018
जानें, भारत में कितने प्रतिशत रोगी लेते हैं डॉक्टरों से नींद की गोलियां

आज विश्व नींद दिवस है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को नींद की महत्ता बताने और नींद की कमी को दूर करना है।

आज विश्व नींद दिवस है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को नींद की महत्ता बताने और नींद की कमी को दूर करना है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि भारत में 20.3 प्रतिशत रोगी डॉक्टरों से नींद की गोलियां लिखने को कहते हैं। इस चीज से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि लोगों में नकितनी नींद की कमी है। शोध में पता चला है कि कई रोगियों को नींद न आने की शिकायत रहती है, जिसके लिए उनका अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम, रात के समय काम करना और उच्च मानसिक तनाव एक कारण है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) सबसे सामान्य नींद विकारों में से एक है।

ओएसए एक विकार है, जिसमें नींद के दौरान सांस लेने में बार-बार रुकावट होती है। इसके कुछ कारणों में अधिक वजन, ऊपरी वायुमार्ग का छोटा होना, जीभ का बड़ा आकार और टॉन्सिल प्रमुख हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, ओएसए नींद का एक सबसे सामान्य प्रकार है, जिसका एक संकेत है खर्राटे आना। ओएसए की वजह से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है और नींद में बाधा पड़ने से हृदय रोग का जोखिम पैदा हो जाता है। ओएसए वाले आधे लोगों में उच्च रक्तचाप भी होता है।

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उन्होंने कहा, यह पुरुषों में अधिक आम है और बुढ़ापे के साथ इसकी संभावना बढ़ जाती है। यह आनुवांशिक भी हो सकता है। कुछ जातियों के लोग दूसरों की तुलना में इससे अधिक ग्रस्त पाए गए हैं। पुरुषों में 17 इंच से अधिक और महिलाओं में 15 इंच से अधिक चौड़ी गर्दन होने पर यह समस्या हो सकती है। ऑब्सट्रक्टिव के संकेतों और लक्षणों में दिन में नींद आना, जोर से खरार्टे लेना, नींद के दौरान श्वास लेने में कठिनाई, अचानक जाग जाना, गले में खराश, सुबह को सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मूड में परिवर्तन, उच्च रक्तचाप, रात को पसीना आना और कामेच्छा में कमी अदि प्रमुख हैं।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, अगर आपको दिन में अधिक नींद आती है और थकान रहती है तो विशिष्ट लक्षणों पर नजर रखना और विशेषज्ञों से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है। इसके लिए एक स्लीप लैब में रातभर नींद का परीक्षण किया जाता है। नींद के दौरान मस्तिष्क तरंगों, आंखों और पैरों की गति, ऑक्सीजन के स्तर, वायु प्रवाह और दिल की रिदम को रिकॉर्ड करके, इस कंडीशन का पता लगाया जाता है। बढ़े हुए मामलों में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। जीवनशैली में कुछ परिवर्तन इस कंडीशन से बचने या इसे खराब होने से रोकने में मदद कर सकते हैं।

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सोने से पहले इन चीजों का न करें सेवन

  • सोने से पहले आइसक्रीम न खाएं। आइसक्रीम में फैट और शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है जो शरीर में जाकर एकदम से हिट करती है और ऊर्जा का संचार होने लगता है, इस वजह से नींद का गायब होना स्‍वाभाविक है।
  • रात में शराब पीने की आदत बहुत लोगों की होती है, उन्‍हे ऐसा लगता है इससे उन्‍हे अच्‍छी नींद आती है, लेकिन यह गलत है। शराब पीने से उनकी नींद आने की नैचुरल प्रक्रिया पर नकारात्‍मक असर पड़ता है। शराब पीकर सोने पर आपको वह सुबह उठकर सामान्‍य दिनों जैसी स्‍फूर्ति और ताजगी नहीं मिलती है। वहीं कई बार शराब के नशे में होश नहीं रहता है जिसे लोग बढि़या नींद समझ बैठते हैं।
  • डार्क चॉकलेट में कैफीन की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है, जो आपके शरीर को एकदम से बूस्‍ट अप कर देती हैं। वहीं कई बार डार्क चॉकलेट में थियोब्रोमाइन भी मिला होता है जो दिल को तेजी से धड़काने का काम और शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है, ऐसे में सोना थोड़ा मुश्किल होता है।
  • सोने से पहले अगर आप वेज फूड भी खाते हैं तो हल्‍का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं। जैसे - गेंहू के आटा के फुल्‍के, खिचड़ी। ज्‍यादा भारी भोजन करने से आपको ही पेट सम्‍बन्धित समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • कभी भी रात को सोने से पहले कॉफी ना पिएं। इससे आपकी नींद में खलल पड़ सकता है। इसे पीने से पहले तो नींद समय पर आएगी ही नहीं और अगर आ भी जाएगी, तो बार- बार डिस्टर्ब होगी। दरअसल, कैफीन आपकी नींद उड़ाने का काम करेगी।

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