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नजदीक से टीवी देखने से जुड़े तथ्य और मिथ

आंखों के विकार By Meera Roy , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 25, 2016
नजदीक से टीवी देखने से जुड़े तथ्य और मिथ

सामने से टीवी देखने के कई सार नुकसन बोले जाते हैं। जबकि उनमें से अधिकतर मिथ होते हैं। तो जरूरी है कि इन मिथों की सच्चाई जानें।

Quick Bites
  • नजदीक से टीवी देखने पर नहीं होती आंखें खराब।
  • लगातार टीवी देखने से आता है आंखों में सूखापन।
  • कम रोशनी में टीवी देखने से आंखों को कुछ नहीं होता।
  • चश्मा पहनकर टीवी देखना नहीं देता आंखों की गारंटी।

आंखें हमारे शरीर का वो हिस्सा हैं जिसके बिना हम खूबसूरत दुनिया का छटांक भी देख नहीं सकते। मतलब साफ है कि आंखें हमारे जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन कहते हैं न कि वस्तु विशेष जितनी महत्वपूर्ण होती है, उससे जुड़ी परिकल्पनाएं भी उतनी ही होती है। ठीक इसी तरह आंखों के साथ भी तमाम ऐसे मिथ जुड़ हैं, जिनका तथ्यों से कोई सरोकार नहीं है। यहां हम कुछ ऐसे ही मिथ से आपका परिचय करा रहे हैं।

टीवी देखना

मिथ और तथ्य


मिथ - बेहद नजदीक बैठकर टीवी देखने से आंखें खराब हो जाती हैं।
तथ्य - यूं तो बेहद नजदीक बैठकर टीवी कभी नहीं देखना चाहिए। लेकिन आपको यह बता दें कि ऐसा करने से आंखें खराब नहीं होतीं। विशेषज्ञों के मुताबिक बेहद नजदीक से टीवी देखने से सिर में दर्द हो सकता है। इतना ही नहीं आखों को सूखेपन का एहसास होने लगता है। नतीजतन आंखों में खुजली भी हो सकती है।

मिथ - लगातार टीवी स्क्रीन देखने से आंखें कमजोर हो जाती हैं।
तथ्य - क्या आपको लगता है कि लगातार टीवी देखने से आपकी आंखें खराब हो सकती है? जी, नहीं! ऐसा कतई नहीं है। अगर ऐसा होता तो शायद आज जो लोग कंप्यूटर पर काम करते हैं, कतई नहीं कर पाते। असल में लगातार टीवी देखने से आंखें खराब नहीं होतीं। हालांकि आंखों से पानी रिस सकता है। टीवी देखते हुए बीच बीच में ब्रेक अवश्य लें।

मिथ - कम रोशनी में टीवी देखना हानिकारक है।
तथ्य - क्या आपको पता है कि हमारा शरीर बेहद एड्जेस्टेबल है। हमारी आंखें भी इसका अपवाद नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो कम रोशनी हमारे आंखों को कुछ खास तरह से प्रभावित नहीं करती। अकसर लोग कहते हैं कि कम रोशनी में पढ़ने से आंखें खराब हो जाती हैं। जबकि इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। ठीक इसी तरह कम रोशनी में टीवी देखने से आंखें पर कोई खास असर नहीं पड़ता। क्योंकि हमारी आंखें रोशनी अनुसार खुद ही सामंजस्य बैठा लेती है।


मिथ - लगातार टीवी देखने वालों को गाजर अवश्य खाना चाहिए। इससे उनकी रोशनी बढ़ती है।
तथ्य - हालांकि गाजर में बीटा कैरोटीन होता है। साथ ही यह विटामिन ए का बेहतरीन स्रोत है। ये दोनों तत्व हमारी आंखों की रोशनी के लिए अच्छी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लगातार टीवी देखने वालों को गाजर किसी खास रूप में सहायता करेगा। असल में गाजर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ेगी नहीं अपितु जितनी है, उतनी ही रहेगी।


मिथ - टीवी देखते हुए चश्मा अवश्य पहनें।
तथ्य - यूं तो हर कोई कहता है कि यदि आंख खराब है तो चश्मा हमेशा पहने रखें। इससे आंखें और खराब नहीं होंगी। जबकि यह निरानिर बेवकूफी है। साथ ही यह भी कोई समझदारी की बात नहीं है कि टीवी पहनते हुए चश्मा पहना जाए। लोगों का मानना है कि टीवी पहनते हुए चश्मा पहनने से आंखों पर कम असर पड़ता है। जबकि आंखों को यदि प्रभावित होना होगा तो वे चश्में में रहते हुए भी प्रभावित होंगी।


मिथ - ज्यादा देर तक टीवी देखने से उम्रदराज लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है।
तथ्य - हालांकि यह सच है कि उम्र बढ़ने के साथ साथ आंखों की रोशनी में कुछ फर्क पड़ता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किशोर घंटों टीवी देख सकते हैं और उम्रदराज लोग ऐसा नहीं कर सकते। असल में ज्यादा देर तक टीवी देखने से उम्रदराज लोगों की आंखों में दर्द का एहसास होने लगता है। मगर उनकी आंखें खराब नहीं होतीं।

 

 

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Written by
Meera Roy
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 25, 2016

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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