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सिंगल पेरेंट्स रखें इन 2 बातों का ख्याल, गलत संगत में नहीं पड़ेगा बच्चा

परवरिश के तरीके By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 19, 2018
सिंगल पेरेंट्स रखें इन 2 बातों का ख्याल, गलत संगत में नहीं पड़ेगा बच्चा

एकल होने के बाद आने वाली समस्याओं से जूझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, न सिर्फ सिंगल पेरेंट्स के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी। लेकिन कुछ भी परेशानियां आएं सिंगल पेरेंट्स को अपने बच्चे को अधिक से अधिक समय देना चाहिए।

आज के दौर में एकल पेरेंट्स की कमी नहीं है,एकल होने के पीछे भी कई कारण है। इनमें सबसे बड़ा कारण कैरियर है। आज कैरियर के चलते आए-दिन तलाक की घटनाएं बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं लिव इन रिलेशंस के कारण भी एकल पेरेंटिग को बढ़ावा मिल रहा है। अकेले होना कोई बुरा नहीं है, लेकिन एकल होने के बाद आने वाली समस्याओं से जूझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, न सिर्फ सिंगल पेरेंट्स के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी। आइए जानें सिंगल पेरेंट्स की चिंताओं को।

 

सिंगल पैरेंटिंग की समस्‍याएं

  • सिंगल पेरेंट्स को कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ता है, इनमें प्रमुख है बच्चे की परवरिश।
  • एकबारगी बच्चे की परवरिश भी अकेले की जा सकती है लेकिन अकेले रहकर आर्थिक दिक्कतों का सामना भी कम नहीं होता।
  • बच्‍चे को अकेले संभालना, बच्चे  की अच्छी परवरिश करना, बच्चे की फरमाइशों को पूरा करना, बच्चे के सवालों के जवाब देना इत्यादि सिंगल पेरेंट्स को कई बार मुश्किल में फंसा सकता है।
  • तलाक के बाद खुद उससे उबरकर बच्चे को माता-पिता दोनों का प्यार देना कई बार मुश्किल हो जाता है।
  • कई बार अकेले रहते-रहते, बच्चे  की परवरिश करते-करते किसी ऐसे साथी की तलाश करना जरूरत बन जाती है जिससे अपनी बातें, अपने इमोशंस को विश्वास कर बांटा जा सकें।

बहरहाल, कुछ भी परेशानियां आएं सिंगल पेरेंट्स को अपने बच्चे को अधिक से अधिक समय देना चाहिए और बच्चे को जीवन की महत्ता और जीवन के अनुभवों के बारे में बताना चाहिए जिससे बच्चा जीवन में आगे कोई गलत कदम न उठाएं।

परवरिश के अन्‍य तरीके 

  • बच्चा जब बड़ा होने लगता है तब ही से उसे नियम में रहने की आदत डालें। 'अभी छोटा है बाद में सीख जाएगा' यह रवैया खराब है। उन्हें शुरू से अनुशासित बनाएं। कुछ पेरेंट्स बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर निर्देश देने लगते हैं और उनके ना समझने पर डांटने लगते हैं, कुछ माता-पिता उन्हे मारते भी हैं। यह तरीका भी गलत है। वे अभी छोटे हैं, आपका यह तरीका उन्हें जिद्दी और विद्रोही बना सकता है। 
  • उनके साथ क्वॉलिटी टाइम बिताएं वर्किंग पेरेंट्स के साथ यह समस्या होती है कि उनके पास अपने बच्चों के साथ बिताने के लिए समय नहीं मिल पाता। ऐसे माता-पिता अपने वीकएंड्स अपने बच्चों के लिए रखें। और सामान्य दिनों में भी उनके क्रियाकलापों पर ध्यान दें कि वे क्या करते हैं, उनके दोस्त कौन हैं आदि। 
  • उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करेंअब वह समय नहीं रहा जब माता-पिता ने जो कह दिया वही सही है। अब समय बदल गया है,बच्चे मुखर हो गए हैं। उनका अपना नज़रिया है। माता-पिता को यह करना है कि बच्चों के साथ बॉस या हिटलर की तरह नहीं बल्कि दोस्त बनकर रहें। आपका यह तरीका बच्चों को आपके करीब लाएगा। वे आपसे खुलकर बात कर पाएगें। 
  • आत्मनिर्भर बनाएं बचपन से ही उन्हें अपने छोटे-छोटे फैसले खुद लेने दें। जैसे उन्हें डांस क्लास जाना है या जिम। फिर जब वे बड़ॆ होंगे तो उन्हें सब्जेक्ट लेने में आसानी होगी। आपके इस तरीके से बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होगा और वे भविष्य में चुनौतियों का सामना डट कर, कर पाएंगे। 
  • जिद्दी ना बनने दें जो पेरेंट्स बच्चों की हर मांग को पूरा करते हैं उनके बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। यदि बच्चे बेवजह जिद करते हैं जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता तो उन्हें प्यार से समझाएं कि उनकी मांग जायज नहीं है।
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