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Happy Birthday Shilpa: शिल्‍पा शेट्टी के सूर्य नमस्‍कार योग के 12 स्‍टेप से मिलेंगें फायदे

एक्सरसाइज और फिटनेस By शीतल बिष्ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 02, 2019
Happy Birthday Shilpa: शिल्‍पा शेट्टी के सूर्य नमस्‍कार योग के 12 स्‍टेप से मिलेंगें फायदे

बॉलीवुड की फिट एक्ट्रेसेज में शिल्पा शेट्टी का नाम सबसे पहले आता है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस का राज योगासन और बैलेंस्ड डाइट हैं। अगर आप भी शिल्पा की तरह फिट रहना चाहते हैं तो आप शिल्पा के जन्मदिन पर उनसे योग के टिप सीख सकते हैं।

बॉलीवुड की फिट एक्ट्रेसेज में शिल्पा शेट्टी का नाम सबसे पहले आता है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस का राज योगासन और बैलेंस्ड डाइट हैं। शिल्पा से प्रभावित होकर बहुत सारी महिलाएं और लड़कियां भी शरीर को फिट और हेल्दी रखने के लिए योगासनों को अपना रही हैं। शिल्पा शेट्टी बॉलीवुड की खूबसूरत, टैलेंटेड और फिट एक्ट्रेस में से एक हैं। वह उन हीरोइनों में से एक हैं, जो अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। योग से शिल्‍पा का पुराना नाता है और वह अपनी फिटनेस का क्रेडिट भी काफी हद तक योग को ही देती हैं। सुपरस्‍टार शिल्‍पा शेट्टी योग को डर और दर्द को दूर करने का साधन मानती हैं। इतना ही नहीं बाजार में शिल्पा शेट्टी योगा वीडियो के नाम से उनकी पूरी योगासन सिरीज की सीडी भी मौजूद है, जिसमें प्रत्येक योगासन के फायदे भी बताये गए हैं। हाल ही में शिल्‍पा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह सूर्य नमस्कार करती नजर आ रहीं है। चलिए हम आपको बताते हैं सूर्यनमस्कार करने से आपको क्या-क्या फायदे मिलते हैं।

सूर्यनमस्कार है फायदेमंद

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ आसान है। यह अकेला अभ्यास ही व्‍यक्ति को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में सहायक है। सूर्य नमस्कार का अर्थ है सूरज को नमस्कार करना। सूर्य नमस्कार रोजाना करने से आपका तन और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं क्योंकि इस योगासन को करते समय सूरज की किरणें सीधी शरीर पर पड़ती है, जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी मानी जाती हैं। यह आसन शरीर के लगभग सभी अंगों पर अच्छा प्रभाव डालता है  इसलिए सूर्यनमस्कार को सभी योगासनों में से सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे रोज करने से शरीर निरोग और स्वस्थ रहता है और व्‍यक्ति में ताजगी और स्फूर्ति रहती है। 

सूर्यनमस्कार ऐसा आसन है जिससे हमारे शरीर की छोटी-बड़ी सभी नस-नाड़ियां क्रियाशील हो जाती हैं, इसलिए इस आसन से आलस, नींद इन सब विकारों को दूर करने में मदद मिलती है।  सूर्य नमस्कार की तीसरा और पांचवां आसन सर्वाइकल एवं स्लिप डिस्क वाले रोगियों को नहीं करना चाहिए। 'सूर्य नमस्कार' सभी के लिए उपयोगी है। इसे रोज 5 से 10 मिनट तक करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार के 12 तरीके

सूर्य नमस्कार में कुल 12 आसन होते हैं। इसमें मुख्यत: 6 आसन हैं, बाद के 6 आसनों में उन्हीं को उल्टे क्रम में दोहराया जाता है। सबसे पहले प्रणामासन, हस्तउत्तानासन, हस्तपादासन, अश्वसंचालासन, अधोमुखश्वानासन, अष्टांगनमस्कारासन और भुजंगासन किया जाता है। फिर अष्टांगनमस्कारासन से प्रणामासन तक आसनों को दोहराया जाता है। इस आसन को सुबह उठकर सूर्योदय के समय सूर्य की किरणों के सामने साफ खुली हवा में करना चाहिए।

  1. अपने दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े होकर आंखें बंद करें और ध्यान को केंद्रित करके 'सूर्य भगवान' का आह्वान 'ॐ' मंत्र का उच्‍चारण करें।
  2. सांस भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाकर, ऊपर की ओर तानें और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। 
  3. तीसरी स्थिति में सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं जमीन का स्पर्श करें और घुटने सीधे रखें। आपका माथा घुटनों को छूंए। ऐसा करते हुए कुछ देर इसी स्थिति में रुकें। सर्वाइकल एवं स्लिप डिस्क समस्‍या वाले लोग इस आसन को न करें।
  4. चौथी स्थिति में आप सांस को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को आगे की ओर तानें और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधा पीछे की ओर खिंचाव और पैर के पंजे पर खड़ा हों। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। 
  5. सांस को धीरे-धीरे बाहर छोडते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ी मिली हुई हों और पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें। एड़ी को जमीन पर मिलाने का प्रयास करें। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं।
  6. सांस भरते हुए पहले घुटने, छाती और माथे को जमीन पर लगा दें। कंधों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वांस छोड़ दें।  फिर 6 विधि के बाद फिर उन्हीं 6 विधि को उल्टे क्रम में दोहराएं। 

सूर्य नमस्कार की बारह स्थितियां हमारे शरीर के सारे अंगों की विकृतियों को दूर करके निरोग बना देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया काफी लाभकारी है।  इसके अभ्यास से हाथों-पैरों के दर्द दूर होकर उनमें सबलता आ जाती है। गर्दन, फेफड़े तथा पसलियों की मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं साथ ही बैलीफैट यानि पेट की चर्बी कम हो जाती है।

सूर्य नमस्कार के फायदे

मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर

रोजाना सूर्य नमस्कार करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन व मेटाबॉलिज्म तेज होता है, इससे पेट के मसल्‍स मजबूत होते हैं और एक्‍सट्रा फैट कम करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे हाई ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है और आप स्‍वस्‍थ रहते है।

तनाव व अनिद्रा

सूर्य नमस्कार करने से नर्वस सिस्टम शांत होता है। इससे आपके मानसिक तनाव की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा अनियमित दिनचर्या और भाग-दौड़ भरी जिंदगी के कारण अगर आपको नींद न आए तो इस योगासन से आपकी अनिद्रा की समस्या ठीक हो जाएगी।

पाचन क्रिया व ऊर्जा

इस योग से पाचन क्रिया सही रहती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। सूर्य नमस्‍कार से पाचन तंत्र ठीक रहता हैं। सुबह उठकर खाली पेट सूर्य नमस्कार करने से कब्ज, अपच या पेट में जलन की शिकायत भी दूर होती है। साथ ही यह मांसपेशियां व हड्डियों को मजबूत भी बनाता है। रोजाना सूर्यनमस्कार करने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और कार्बन-डाईऑक्साइड बाहर निकलती है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

तेज स्मरण शक्ति

रोजाना यह आसान करने से न सिर्फ दिमाग शांत रहता है बल्कि इससे स्मरण शक्ति भी तेज होती है। इतना ही नहीं, अगर आपको भूख नहीं लगती तो इस आसान को करने से आपकी यह परेशानी भी दूर हो जाएगी और आपकी डाइट में सुधार आएगा।

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बॉडी डिटॉक्स

सूर्य नमस्कार से पर्याप्‍त मात्रा में ऑक्‍सीजन खून तक पहुंचती है और शरीर से कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकल जाती है और आपकी बॉडी डिटॉक्स हो जाती है। इसके अलावा सूर्यनमस्कार करने से अनियमित मासिक चक्र की समस्या नहीं होती। इससे आपके मासिक-धर्म रेगुलर हो जाते है। जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं।

ग्लोइंग स्किन व बालों के लिए फायदेमंद

सूर्य नमस्कार करने से शरीर को प्रयाप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता हैं, जो कि त्वचा को निखरी और बेदाग बनाता हैं। इसके अलावा इससे चेहरे की झुर्रियां भी कम होती हैं और बाल भी स्वस्थ और मजबूत होते हैं। यह योगा अभ्‍यास आपके बालों को असमय सफेद होने, झड़ने व रूसी से बचाता है। सूर्य नमस्‍कार से आपका वर्कआउट होता है और जिससे बॉडी फ्लेक्सिबल रहती है।

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सावधानियां

  • सूर्य नमस्कार उचित समय और धीमी गति से करें।
  • एक स्थिति में सांस सामान्य होने के बाद ही दूसरी स्थिति शुरू करें। 
  • बुखार जैसी स्थिति होने पर सूर्य नमस्‍कार न करें।
  • कोमल, अधिक गद्देदार मैट या बिस्तर पर यह आसन न करें। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी में बल पड़ सकता है।
  • बिना थके जितना कर सकें उतना ही करें। शरीर पर ज्‍यादा जोर न डालें।
  • स्लिप डिस्क और हाई ब्लड प्रैशर के मरीजों को भी यह योग नहीं करना चाहिए।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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