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स्वस्थ रहने की मसाज थेरेपी है शिला अभियंगा

घरेलू नुस्‍ख By अन्‍य , विशेषज्ञ लेख / Apr 07, 2015
स्वस्थ रहने की मसाज थेरेपी है शिला अभियंगा

शिला अभियंगा मसाज का एक प्रकार है जिसका प्रयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है, इसमें शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर पत्थर रखकर मसाज किया जाता है, इससे कई बीमारियों में फायदा होता है और शरीर निरोग रहता है।

प्राचीन आयुर्वेद के खज़ाने में एक ऐसी मसाज भी है जो पूरी दुनिया में मशहूर हो रही है। इस मसाज को शिला अभियंगा कहा जाता है जो कि स्टोन मसाज होती है। इस प्राचीन आयुर्वेदिक तकनीक में मसाज के लिए हर्बल आयुर्वेदिक तेल और एक प्रकार का पत्थर इस्तेमाल किया जाता है।

 

क्या है शिला अभियंगा?

ये मसाज परंपरागत रूप से संचार प्रणाली को बेहतर बनाने, मसल्स को मुलायम बनाने और रिलेक्स करने, टॉक्सिन्स को रिलीस करने, दर्द से छुटकारा पाने और डीप रिलेक्सेशन के लिए किया जाता है। सबसे पहले शरीर पर तेल लगाया जाता है जिससे तनाव दूर होता है और मर्मा (फिजिकल और ऐनर्जेटिक) बिंदु खुल जाते हैं। इसके बाद शिला को गर्म पानी में डुबाकर शरीर के मुख्य बिंदुओं (मर्मा) पर रखा जाता है। थेरेपिस्त रूम टेम्परेचर पर क्रिस्टल्स का भी इस्तेमाल करते हैं जो शरीर पर रखकर चक्र सिस्टम के साथ हार्मोम को भी संतुलित करते हैं। स्टोन को तेल लगी हुई मसल्स के ऊपर रखा जाता है और पैने स्टोन का इस्तेमाल डीप मसाज के लिए होता है।

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स्टोन (पत्थर) का इस्तेमाल क्यों करें

  • स्टोन (पत्थर) ऊष्मा के अच्छे संचालक हैं। इन्हें उच्च, मध्यम और निम्न थर्मल रेडियंस की जगह लिया जा सकता है।
  • स्टोन थेरेपी से शरीर और मन दोनों को बहुत आराम पहुंचता है।
  • स्टोन की गर्माहट से शरीर से पूरा तनाव दूर हो जाता है और चिंता दूर हो जाती है।
  • स्टोन और क्रिस्टल हमारे शरीर के असंतुलन को दूर कर देते हैं।
  • अभियंगा स्टोन में मैग्नेटिक पावर भी होती है जो कि अवसाद, दुख और शारीरिक दर्द को खींच लेती है और काफी लंबे वक्त तक ये स्टोन गर्म भी रहते हैं।

 

कैसा हो आपका स्टोन थैरेपिस्ट

ये जरूरी है कि जिस स्टोन थेरेपिस्ट के पास आ जा रहे हैं वो सही तकनीक और स्टोन का इस्तेमाल करे, और उन्हें सही तापमान पर गर्म करे। मसाज के अलावा, मसाज करने वाली की भावनाओं का असर भी आप पर काफी हद तक पड़ता है।

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आज की दुनिया में शिला अभियंगा का महत्व

आज की दौड़ती भागती जिंदगी जो कि टेक्नोसॉजी पर बहुत अधिक निर्भर है, वो प्रकृति की लय के साथ लय नहीं मिला पा रही। उपचार के प्राकृतिक तरीकों को नहीं समझ पा रही। कैफीन का अधिक इस्तेमाल, मसालेदार आहार, अस्त-व्यस्तता, तनावग्रस्त रहना, यही आज की जिंदगी का नाम बन चुके हैं। ऐसे में लोगों को अंदरूनी शांति की जरूरत पड़ती है, जो कि हमारे अंदर से ही आती है। शिला अभियंगा के दौरान हमारा अंतर सक्रिय होता है।

 

याद रखें

शिला अभियंगा एक पवित्र मसाज थेरेपी है जो बहुत सारे स्तरों पर आपकी शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निपटती है। लेकिन हमें ये समझने की जरूरत है हर किसी की स्वास्थ्य स्थिति अलग अलग होती है इसलिए परिणाम भी अलग अलग आ सकते हैं।


Image Source - Getty Images

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