शांतम क्रिया : चंचल मन को काबू करने वाली अनूठी तकनीक

शांतम क्रिया : चंचल मन को काबू करने वाली अनूठी तकनीक

अगर आपका मन अशांत रहता है और मन को शांत करने वाले उपायों की खोज कर रहे हैं तो अपने चंचल मन को शांत रखने के लिए आप 'शांतम क्रिया' अपना सकते हैं, आइए जानें क्‍या है यह शांतम क्रिया।

योग शरीर को ही नहीं चंचल मन को भी काबू रखता है। शरीर को स्‍वस्‍थ और मन को शांत रखने के लिए योग से सस्‍ता, अच्‍छा और सरल उपाय शायद ही कोई और हो। जी हां सदियों से चला आ रहा योग, ऋषियों द्वारा मानव को दिया गया एक बहुमूल्य आशीर्वाद है। योग को अपनाने वाले लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा खुद योग करने लगता है। तन के साथ-साथ योग आपके मन को भी शांत करता है, यानी यह जीवन की सभी समस्‍याओं को दूर करने वाला एकमात्र साधन है। अगर आपका मन भी अशांत रहता है तो अपने चंचल मन को शांत रखने के लिए आप शांतम क्रिया को अपना सकते हैं।   

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शांतम क्रिया

जी हां इस क्रिया का नाम शांतम क्रिया है। यह क्रिया आसन, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यासों का संकलन है। यह आज के समय को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ कर मन को भी शांत, एकाग्र व स्वस्थ बनाए रखती है। यह नई क्रिया सांस लेने की तकनीक पर आधारित है और इस क्रिया को किसी भी समय दिन में तीन मिनट के लिए कर सकते हैं। इस ध्यान को कहीं भी, कभी भी और कोई भी कर सकता है। इससे मन शांत हो जाता है और प्रेम, उत्साह, धैर्य, एकाग्रता और याददाश्त की भावनाओं को भी बढ़ावा मिलता है। चंचल मन को काबू करने वाली इस अनूठी योग क्रिया में तीन अलग-अलग तरह के अभ्‍यास शामिल है जैसे-   

 

एकाग्रता

पहले मिनट में अपनी सांसों पर ध्यान लगाओ। इसके लिए आंखें बंद करके आराम की मुद्रा में बैठ जाये। धीरे-धीरे श्‍वास लेकर, क्षमता के अनुसार अपने फेफड़ों में भरें। बिना किसी आवाज और सांसों को पकड़े बिना सांसों को छोड़ दें। आमतौर पर गहरी सांस लेने का चक्र पांच से छह‍ मिनट का होना चाहिए, इसलिए पहले 10 से 12 सेकंड के चक्र में गहरी सांस लें।


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नाद गुंजन

एक मिनट सांसों पर ध्‍यान केंद्रित करने के बाद, सांसों को बाहर करने के लिए मुंह बंद करके हल्‍की गुनगुनी ध्‍वनि बाहर करें। गुनगुनी ध्‍वनि (एयूएम) पर ध्यान लगाओ। इस प्रक्रिया में पांच या छह बार दोहराएं।


अजपा जाप

नाद गुंजन से मन शांत हो जाता है। तीसरे क्रिया में, अपने सामान्य सांस को लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर, इस आनंदपूर्ण मूड का आनन्‍द लेना है। इस गति को बढ़ाया और घटाया जा सकता है। सांस को लेने और छोड़ने के दौरान इस विशेष ध्‍वनि को नोटिस करें। यह 'सो-हम' की ध्‍वनि है। जब हम सांस को लेते या छोड़ते हैं तो 'हम' जैसी ध्‍वनि आती है। इसे अजपा जाप कहते हैं।

लेकिन ध्‍वनि सुनने के बाद मन में शांति आने लगती है यह अनुभव बाद में अजपा जाप में विसर्जित हो जाता है। इसके बाद आनन्‍द से ध्‍यान की मुद्रा में बैठकर आप पूरा और प्‍यार से भरपूर होता है। इस स्‍तर पर कुछ भी कल्‍पना न करें और आसपास के माहौल से भी मूक बने रहें। अपने आप पर ध्‍यान केंद्रित करें और कुछ समय के लिए शांति से साक्षीभाव में बैठें। अंत में अपने हथेलियों को रगड़कर अपने आंखों पर लगाये। कुछ समय के बाद हथेलियों को हटाकर आंखों को खोल लें। लेकिन इस योग को करने से पहले अपने योग प्रशिक्षक या स्‍वास्थ्‍य सलाहकार से परामर्श करें।

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