आयुर्वेद के अनुसार तिल है इन 5 बीमारियों का रामबाण इलाज, जानें प्रयोग का तरीका

आयुर्वेद में तिल और तिल के तेल का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है, जानें इसके इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में।

Prins Bahadur Singh
आयुर्वेदWritten by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jul 28, 2021
Updated at: Jul 28, 2021
आयुर्वेद के अनुसार तिल है इन 5 बीमारियों का रामबाण इलाज, जानें प्रयोग का तरीका

तिल के बीज (Sesame Seeds) या तिल का सेवन सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसे एक तिलहन यानि तेल के लिए बोई जाने वाली फसल माना जाता है। तिल में सेहत के लिए फायदेमंद तमाम पोषक तत्व मौजूद होते हैं। भारत में तिल का इस्तेमाल पवित्र कार्यों में भी किया जाता है इसके अलावा कई त्योहारों में तिल से बनी डिशेज का भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में तिल को एक औषधि के रूप में माना जाता है। इसका इस्तेमाल शरीर की कई व्याधियों को दूर करने के लिए भी होता है। तिल में मौजूद पोषक तत्व जैसे फाइबर और इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण सेहत के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। तिल के तेल में खाना पकाने से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी फायदा मिलता है। इसके साथ-साथ तिल का सेवन स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में तिल के तेल का सेवन ब्लड शुगर कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पाचन और फंगल इंफेक्शन में भी तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में तिल को औषधि के रूप में प्रयोग कर कई बीमारियों को दूर करने का काम किया जाता है। आइये जानते हैं तिल में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में और आयुर्वेद के मुताबिक इसका इस्तेमाल करने से मिलने वाले फायदे के बारे में।

तिल के बीज में मौजूद पोषक तत्व (Sesame Seeds Nutritional Value)

Sesame-Seeds-Health-Benefits

तिल के बीज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद तमाम पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें प्राकृतिक तेल जैसे सेसमिन और सेसमोलिन आदि प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अलावा तिल के बीज में लिनोलिक और ओलिक एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। तिल के तेल का सेवन करने से कैंसर जैसी घातक बीमारी के रोकथाम में भी फायदा मिलता है। इसके अलावा तिल के तेल हार्ट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। तिल के बीज और इसके तेल का सेवन पाचन को मजबूत करने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। तिल या तिल के तेल में मौजूद पोषक तत्व इस प्रकार से हैं।

  • कैलोरी
  • वसा (फैट)
  • प्रोटीन
  • कैल्शियम 
  • फाइबर
  • मैग्नीशियम
  • फास्फोरस
  • आयरन 
  • पोटेशियम
  • जिंक
  • सोडियम
  • थायमिन
  • राइबोफ्लेविन
  • नियासिन
  • विटामिन बी6 
  • फोलेट
  • विटामिन ए 
  • विटामिन ई 

आयुर्वेद में तिल के तेल का इस्तेमाल (Sesame Seeds Health Benefits as Per Ayurveda)

आयुर्वेद में तिल और तिल के तेल को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। तिल के बीज और तिल के तेल में एंटी-आर्थराइटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। तिल में मौजूद गुणों के कारण, तिल के बीज या तिल के तेल गठिया और मोतियाबिंद की बीमारी , पेचिश जैसी बीमारियों में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक तिल का इस्तेमाल इन बीमारियों में रामबाण माना जाता है।

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1. मोतियाबिंद की समस्या में तिल का इस्तेमाल (Sesame Seeds in Cataracts or Motiyabinda)

आंख के जुड़ी कई बीमारियों में तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। आंख में दर्द, आंख का लाल पड़ना, रतौंधी और मोतियाबिंद की बीमारी में तिल के तेल का इस्तेमाल प्राचीन काल से किया जा रहा है। आप मोतियाबिंद की समस्या से छुटकारा पाने के लिए तिल के तेल का इस्तेमाल आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते हैं। मोतियाबिंद की समस्या में काले तिल का काढ़ा बनाकर इससे रोजाना आंखों को धुलें। इसके अलावा मोतियाबिंद की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप तिल के फूल, पिप्पली और चमेली के फूल के साथ काली मिर्च को पीसकर इसका रस आंखों में लगायें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से आपको मोतियाबिंद की समस्या और आंखों की कमजोरी में बहुत फायदा मिलेगा।

2. बवासीर (पाइल्स) में तिल का इस्तेमाल (Sesame Seeds in Piles)

आयुर्वेद के मुताबिक तिल के तेल का इस्तेमाल पाइल्स की समस्या में बहुत फायदेमंद होता है। असंतुलित खानपान और जीवनशैली की वजह से अक्सर लोगों में बवासीर यानि पाइल्स की समस्या देखी जाती है। आयुर्वेद में पाइल्स की समस्या को अर्श भी कहा जाता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए तिल का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। पाइल्स की समस्या से छुटकारा पाने के लिए तिल को पानी के साथ सिल बट्टे पर पीस लें और इसका इस्तेमाल मक्खन के साथ भोजन से 1 घंटे पहले करें। ऐसा करने से पाइल्स की समस्या में मल के साथ खून निकलने से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा तिल को पीसकर गर्म कर लें और इसे पोटली में बांधकर गुदा मार्ग के पास रखकर सिंकाई करें। ऐसा करने से पाइल्स की समस्या में फायदा मिलता है। 

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3. खांसी में तिल का इस्तेमाल (Sesame Seeds in Cold and Cough)

तिल के तेल और तिल के बीज में स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद अनेकों गुण पाए जाते हैं। इसीलिए आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। मौसम में बदलाव और सर्द-गर्म आदि के कारण अक्सर लोगों को खांसी-जुकाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी यह समस्या गंभीर रूप ले लेती हैं। मौसम में बदलाव की वजह से होने वाली खांसी की समस्या में तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। आप इस समस्या से बचने के लिए तिल के काढ़े का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा तिल में मिश्री डालकर इसे अच्छी तरह से उबलने के पीने से सूखी खांसी की समस्या में फायदा मिलता है।

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4. ओवरी के सूजन में तिल का इस्तेमाल (Sesame Seeds or Til for Ovary Inflammation)

महिलाओं में गर्भाशय यानि ओवरी में सूजन की समस्या कई कारणों से हो सकती हैं। इस समस्या में तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेद के मुताबिक गर्भाशय के सूजन की समस्या खत्म नहीं हो रही हो तो ऐसे में तिल का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। ओवरी के सूजन में तिल का कम से कम 3 से 4 बार रोजाना सेवन करें। इसके अलावा तिल के काढ़े का रोजाना सेवन करने से इस समस्या में फायदा मिलता है। 

5. पेचिश की समस्या में तिल का इस्तेमाल (Sesame Seeds Benefits in Dysentery) 

पेचिश की समस्या में तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। खानपान में असंतुलन और पाचन तंत्र की कमजोरी की वजह से लोगों को पेचिश की समस्या होती है। इस समस्या में तिल का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है। पेचिश की समस्या में आप तिल के पौधों के पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक पेचिश में तिल के पत्तों को पानी में भिगोकर उसमें निकलने वाले झाग को पिलायें। ऐसा दो से तीन बार करने से पेचिश की समस्या में फायदा मिलेगा।

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इसके अलावा आयुर्वेद के मुताबिक शरीर की कई समस्याओं में तिल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में तिल के बीज और इसका तेल ही नहीं पत्ते और जड़ आदि का भी इस्तेमाल किया जाता है। तिल के तेल से बने भोजन का प्रयोग करने से हृदय से जुड़ी बीमारियां कम होती हैं और इसका इस्तेमाल शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। ऊपर बताये गए नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट की राय लेना जरूरी है।

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