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फेसबुक पर सेल्‍फी और आत्‍ममोह में संबंध

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 20, 2014
फेसबुक पर सेल्‍फी और आत्‍ममोह में संबंध

सेल्‍फी को लेकर आप बहुत ज्‍यादा संजीदा होते हैं। यहां जरा सी चूक आपको बर्दाश्‍त नहीं। आप चाहते हैं कि इस तस्‍वीर पर लाइक्‍स की बौछार आ जाए। परफेक्‍शन की हद तक आप अपनी तस्‍वीर को देखना चाहते हैं। कितना सही है यह जुनून, य

डैनी बॉवमैन एक सामान्‍य ब्रिटिश किशोर था। लेकिन, परफेक्‍ट सेल्‍फी खींच पाने में 'नाकाम' रहने के बाद वह इतना अधिक अवसाद में चला गया कि उसने आत्‍महत्‍या करने तक का प्रयास किया। 'परफेक्‍ट' सेल्‍फी की चाहत में दिन में दस घंटे लगाकर अपनी 200 तस्‍वीरें उतारता था। इस पूरी प्रक्रिया में उसने 14 किलो वजन कम कर लिया। इसके बाद उसने स्‍कूल छोड़ दिया और परफेक्‍ट पिक्‍चर पाने की अपनी चाहत में वह छह महीने तक घर से बाहर ही नहीं निकला। अपने एक कमेंट में डैनी ने कहा, 'मैं परफेक्‍ट सेल्‍फी की तलाश में था और जब मुझे लगा कि मैं ऐसा नहीं कर सकता, तो मैं मरना चाहता था। मेरे दोस्‍त, पढ़ाई, सेहत सब कुछ छूट गया। और मेरी जिंदगी भी मुझसे छूटने वाली थी।'' यह कहानी भले ही अतिवादी लगे, लेकिन सेल्‍फी के लिए लोगों के बढ़ते मोह की यह बानगी भर है।

selfie

बढ़ रहा है चलन

फोन से अपनी ही तस्‍वीर उतारने का चलन काफी बढ़ गया है। सोशल मीडिया में ऐसी तस्‍वीरों के लिए एक शब्‍द चलन में है, 'सेल्‍फी'। क्‍या इसके लिए फेसबुक जिम्‍मेदार है या फिर यह कोरा 'आत्‍ममोह' है। सोशल मीडिया पर लोग खुद अपनी तस्‍वीरें खींचकर उन्‍हें साझा कर रहे हैं। लड़कियां फैशन के पूरे रंग में रंगी हुईं अपनी तस्‍वीरें खींचती हैं, तो लड़के भी फिल्‍मी हीरो के अंदाज में नजर आते हैं। जोड़े अपना प्‍यार दिखाते हुए, तो कोई टेढ़ा-मेढ़ा मुंह बनाते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालता है। लेकिन, यह सिर्फ तस्‍वीर भर नहीं है, यह एक सेल्‍फी है। और आपने भी अपने जीवन में कभी न कभी सेल्‍फी जरूर खींची होगी। पर क्‍या आपने कभी सोचा है कि आखिर हम क्‍यों बार-बार अपनी तस्‍वीर खींचकर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। क्‍या हम आत्‍ममुग्‍धता की ओर तो नहीं बढ़ रहे।

दुनिया भर की खबर, सब पर नजर

दुनिया भर की हलचल पर नजर रखने का जरिया है सोशल मीडिया। और इसी मंच पर बनते हैं नये चलन। दरअसल, सेल्‍फी का मुद्दा कहीं न कहीं इनसानी पहचान से जुड़ा है। यह व्‍यक्ति का अपने होने का अहसास कराने का तरीका है। सेल्‍फी में लड़के और लड़कियां अपनी शारीरिक खूबियों को ही दिखाने का काम करते हैं। यह खुशी मनाने का तो तरीका है ही साथ ही इंटरनेट पर एक बड़ी सेलिब्रेटि बनने की चाहत भी है। अपनी फोटो पर आने वाले लाइक, कमेंट और शेयर से आपको आत्‍मसंतुष्टि मिलती है। भले ही दो-एक दिन के लिए ही सही, लोग आपको जानने लगते हैं। लेकिन, रफ्ता-रफ्ता कुछ लोग इंटरनेट पर मिलने वाले वाले इस ध्‍यान के आदी हो जाते हैं। और फिर आए दिन सेल्‍फी डालने लगते हैं।

 

हर संभव कोशिश

आप तब तक अपनी तस्‍वीरें उतारते रहते हैं जब तक आपको इंटरनेट पर डालने के लिए सही तस्‍वीर न मिल जाए। और उसके बाद आता है उन तस्‍वीरों को एडिट करने का। अपनी ओर से आप उस तस्‍वीर में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहते। सब कुछ परफेक्‍ट होना चाहिए। आप उस तस्‍वीर में जरा सी खोट भी बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। आखिर सवाल आपकी सामाजिक पहचान से जो जुड़ा है। आप मानते हैं कि यह तस्‍वीर आपकी सामाजिक पहचान का आधार बन सकती है। इस प्रकार की भावना अलग और गलत तरह का आत्‍मविश्‍वास देता है। और धीरे-धीरे आप खुद को लेकर कुछ ज्‍यादा ही संजीदा हो जाते हैं। याद रखें, सभी सेल्‍फी ऑनलाइन नहीं जातीं, इसलिए हर इनसान की चाहत होती है कि सबसे बढि़या तस्‍वीर ही इंटरनेट पर साझा हो। आपकी सेल्‍फी को कितने लोगों ने पसंद किया, आपकी खुशी कहीं न कहीं इस पर निर्भर करने लगती है।

 

आत्‍ममोह की हद

डैनी का मामला बेहद दुर्लभ है, लेकिन सेल्‍फी के प्रति लोगों के मोह की यह बानगी भर है। लोगों की नजर में यह अहं का सवाल है। वे हर हाल में परफेक्‍ट नजर आना चाहते हैं। इन परिस्थितियों से बचा जा सकता है। हमें यह समझने की जरूरत है कि जीवन में कुछ भी परफेक्‍ट नहीं होता। कोई भी परफेक्‍ट नहीं होता। मनोवैज्ञानिक डॉक्‍टर डेविड वील ने संडे मिरर में कहा,' मेरे पास आने वाले तीन में से दो मरीज बॉडी डिस्‍मोरफिक (कुरुपता) डिस्‍ऑर्डर से परेशान होते हैं। इसके पीछे बड़ी वजह कैमरा फोन से लगातार अपनी तस्‍वीरें खींचते रहना और उन्‍हें सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्‍ट करना भी है।

 

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क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

संज्ञानात्‍मक व्‍यवहारगत थेरेपी के जरिये मरीज को उसके इस बर्ताव के पीछे की जानकारी दी जाती है और फिर इसे ठीक करने के प्रयास किये जाते हैं। एक आत्‍ममोही व्‍यक्ति अपने लुक्‍स के जरिये पहचान हासिल करना चाहता है। यह कोरा अहं और अहंकार है। तकनीकी दौर में यह बड़ी समस्‍या है और बड़ी हस्तियां इसे और बढ़ा रही हैं। सही प्रकार से निजी विकास करने की प्रवृत्ति और क्षमता का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। लोगों को यह जानने और समझने की जरूतर है कि फेसबुक सेल्‍फी को महत्‍व देने की जरूरत नहीं है। फेसबुक पर लाइक मिलने या नहीं मिलने से आपको ज्‍यादा परेशान नहीं होना चाहिए। अपने लुक को इतनी महत्‍ता मत दीजिए, बल्कि अपने व्‍यक्तित्‍व को निखारने के अन्‍य पहलुओं पर भी ध्‍यान दीजिए।

 

तो बेशक अपनी तस्‍वीर उतारइये, लेकिन परफेक्‍शन की चाह में मत जाइए। परफेक्‍ट कुछ भी नहीं और परफेक्‍ट कोई भी नहीं। आपको चाहिए कि अपने भीतर आत्‍मविश्‍वास लेकर आएं। नयी कलायें सीखें। याद रखिये सामाजिक स्‍वीकार्यता से पहले स्‍व-स्‍वीकार्यता जरूरी है।

 

Image Courtesy - multiplemayhemmamma.com/ cbc.ca

 

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