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बस एक हफ्ते शिकायत करने की आदत बंद करें और महसूस करें फायदे

तन मन By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 04, 2015
बस एक हफ्ते शिकायत करने की आदत बंद करें और महसूस करें फायदे

ज्यादा नहीं तो बस एक हफ्ते के लिये अपने भीतर की नाकारात्मकता और हर बात पर शिकायत करने की आदत को बंद करके देखें, आपका जीवन सच में गुलज़ार सा लगने लगेगा।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपको थोड़ा और बेहतर बन सकते थे! तो भला आप जिस बात की इच्छा रखते हैं उसके साथ समझौता क्यों किया जाए? बात-बात पर नुक्स निकालना या शिकायत करने की आदत से क्या आप भी अब परेशान नहीं हो गये हैं? तो चलिये अब निश्चय कर लें कि बुरे व्यवहार को अब आप अपनी ज़िन्दगी में ओर जगह नहीं देंगे। सीधी सी बात है, जब आप इस तरह के व्यवहार से खुद भी परेशान हैं और इसे छोड़ सकते हैं तो इसे सहन क्यों करें। ज्यादा नहीं तो बस एक हफ्ते के लिये अपने भीतर की नाकारात्मकता और हर बात पर शिकायत करने की आदत को बंद करके देखें, आपका जीवन सच में गुलज़ार सा लगने लगेगा। लेकिन भला ऐसा किया कैसे जाए? तो चलिये इसमें हम आपकी मदद किये देते हैं और बताते हैं आपको नाकारत्मकता और शिकायद की आदत से बाहत आने के कुछ कारगर तरीकों के बारे में।

 

Stop Complaining in Hindi

 

नकारात्‍मक सोच से बचने की कोशिश करें

जीवन में कई बार अपेक्षायें और सपने पूरे न हो पाने के कारण हम नकारात्‍मक भावनाओं के शिकार हो जाते हैं। इसका असर हमारे करियर के साथ-साथ  पारि‍वारिक जीवन पर भी पड़ता दिखता है और तनाव और अनिद्रा जैसी समस्‍यायें भी होने लगती है। लेकिन यदि हम हर समय उसी निराशा और दुख के अंधेरे में ही डूबे रहेंगे तो आशा की दूसरी किरणों को पहचान नहीं पाएंगे। सकारात्मता कोई वरदान नहीं, जो केवल उन गुरुओं के पास होता है जो जीने का तरीका सिखाते हैं। यह तो वो अनुभव है जिसे हर व्‍यक्ति महसूस कर सकता है। तो अगर आपकी सकारात्‍मकता भी खो गई है तो उसे पाने की कोशिश करें।

अपनी योग्यताओं और ताकतों को समझें और सम्मान करें

अपनी योग्यताओं और ताकतों को समझें, उनका सम्मान करें और किसी को यह कहने का मौका न दें कि जो आप चाहते हैं उसे पाने में आप सक्षम नहीं हैं। अपने व अपने सपनों के प्रति सच्चे बनें। किसी भी बात को केवल इसलिए न छोड़ें क्योंकि कोई आपसे अलग सोचता है। हमेशा ध्यान रखें कि आप में इतनी ताकत है कि आप अपनी सबसे वांछित महत्वाकांक्षा को पूर्ण कर सकते हैं।

 

Stop Complaining in Hindi

 

व्‍यवहार में थोड़ा बदलाव लाएं

सकारात्‍मक सोच को दोबारा पाने और शिकायद की आदत को छोड़ने के लिये सबसे पहला कदम अपने व्‍यवहार में सकारात्मक बदलाव लाकर करें। अपने खराब रवैये पर नियंत्रण रखें। अपने व्‍यवहार में सकारात्‍मकता लायें, और खुद से ये वादा करें कि मन में नकारात्‍मक सोच आने पर भी लोगों से आप अच्‍छे से ही पेश आयेंगे। अपने जीवन से जुड़े सारे महत्वपूर्ण फैसले खुद लें और शांत भाव से लें। अपनी भावनाओं पर केवल औक केवल खुद का वश चलने दें, न कि दूसरों का।


अपनी मानसिक भावना में भी बदलाव लाने की कोशिश करें। किसी भी परिस्थिति में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है यह आपकी सोचने की शक्ति पर निर्भर करता है। कठिन परिस्थिति में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देना उस परिस्थिति को आसान बना देता है और आप आसानी से नकारात्‍मक भावना से बाहर आ पाते हैं। समाज को देखने का नजरिया बदने और अपने आसपास फैली सकारात्‍मकता के हिसाब से अपनी मानसिकता बनाने से आपकी जिंदगी खुशहाल बनेगी।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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