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स्कूल का माहौल और डायबिटीज़ का जोखिम

लेटेस्ट By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 07, 2011
स्कूल का माहौल और डायबिटीज़ का जोखिम

स्कूल के माहौल से बच्चों में कई गंभीर बीमारियां पनपने लगती हैं।

school ka mahaul aur diabetes ka jokhim

बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जो बच्चे सिर्फ स्कूल में ही सीखते हैं। इसके साथ ही बच्चों के स्कूल का माहौल हर तरीके का होता है और वहां अलग-अलग परिवारों और माहौल से ताल्लुक रखने वाले बच्चे होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कई बार स्कूल के माहौल से बच्चों में ऐसी बीमारियां पनपने लगती हैं जिनका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता। ऐसा सिर्फ इसीलिए होता है क्योंकि बच्चे का स्कूल में खानपान भी बच्चे को खासा प्रभावित करता है। आज की माडर्न लाइफ में बच्चे टिफिन ले जाना पसंद नहीं करते बल्कि इसके बजाय कैंटीन से खाना पसंद करते है। इसके विपरीत कुछ बच्चे यदि टिफिन बाक्स लेकर भी जाते हैं तो उनमें पौष्टिक आहार के बजाय होता है तो सिर्फ जंकफूड या फिर ब्रेड जैम। ऐसे में बच्चे नियमित रूप से इस तरह के खानपान से डायबिटीज जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। आइए जानें स्कूल का माहौल और डायबिटीज के जोखिम दोनों आपस में कितने जुड़े हुए है।

 

  • जब हम स्कूल में अपने बच्चे को भेजते हैं तो हम ये उम्मीद करते हैं कि वहां शारीरिक सक्रियता के चलते उन्हें ऐसा माहौल मिलेगा जो उन्हें अच्छा स्वास्थ्य भी प्रदान करेगा। लेकिन पाया यह गया है कि खासतौर पर महानगरों में स्कूली बच्चे मोटापे जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
  • यह तो आप जानते ही होंगे कि बच्चों में डायबिटीज टाइप 1 होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में बच्चों में मोटापे के कारण डायबिटीज का जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
  • डायबिटीज टाइप 1 का मुख्य कारण संतुलित खानपान ना होना है। यदि बच्चों का खानपान सही नहीं होगा तो ऐसे बच्चों को डायबिटीज का जोखिम अधिक रहता है।
  • स्कूल का माहौल डायबिटीज का जोखिम बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे संभव है। दरअसल जिन स्कूलों में कैंटीन की सुविधा होती हैं, वहां बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका अधिक होती है। कैंटीन के कारण बच्चे घर से खाना ना लाने के बहाने ढूंढते हैं और कैंटीन से जंकफूड, चिप्स, कुरकुरे, सोफ्ट ड्रिंक्स इत्यादि आए दिन खाने लगते है। इससे बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ना लाजमी है।
  • कुछ स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील दिया जाता है जिसका हाइजीन से कोई नाता नहीं। यानी यह कह पाना कि वो बच्चों के लिए अच्छा और सेहमंद है गलत होगा। आए दिन मिड डे मील के कारण बच्चों के बीमार होने की खबरें सुनाई देती है।
  • आपने अकसर देखा होगा स्कूलों के बाहर खुली चीजें बहुत मिलती है,जिनको खाने के बच्चे भी बहुत शौकीन होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ये खुले खाद्य पदार्थ बच्चों को बीमार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • हाल ही में आए शोधों में भी साबित हो चुका है कि स्कूली बच्चों में डायबिटीज का जोखिम जंकफूड और असंतुलित खानपान के कारण लगातार बढ़ रहा है, जो कि बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
  • अमेरिका में हाल ही में पाया गया है कि 6 से 19 साल की उम्र के बच्चों में से 16 फीसदी बच्चे ऐसे है जो मोटापे और डायबिटीज के शिकार हो रहे है। ये आंकड़ा भारतीयों के लिए भी एक चेतावनी है।
  • अगर यह कहा जाए कि महानगरों में भी स्कूली बच्चों की सेहत पर दुष्प्रभाव दिन-प्रतिदिन दिखाई दे रहे हैं तो गलत ना होगा।
Written by
अनुराधा गोयल
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागDec 07, 2011

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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