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जानिए कितनी तरह का होता है नमक और उनसे होने वाले लाभ

स्वस्थ आहार By मिताली जैन , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 25, 2018
जानिए कितनी तरह का होता है नमक और उनसे होने वाले लाभ

अगर किसी व्यक्ति को नमक के बिना भोजन खाने के लिए दे दिया जाए तो शायद ही वह उसके गले से नीचे उतरे। किसी भी किचन में नमक हरदम पाया जाने वाला पदार्थ है।

अगर किसी व्यक्ति को नमक के बिना भोजन खाने के लिए दे दिया जाए तो शायद ही वह उसके गले से नीचे उतरे। किसी भी किचन में नमक हरदम पाया जाने वाला पदार्थ है। रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाला व एक बेहद आवश्यक पदार्थ नमक कई प्रकार का होता है। जहां सब्जी में सादा नमक डाला जाता है वहीं चाट को चटपटा बनाने के लिए काला नमक तो व्रत के दिनों में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। कई रूपों में पाया जाने वाले नमक के हर प्रकार की अपनी एक खूबी होती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

सादा नमक

बाजार में पैकेट के रूप यह नमक हर घर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इस नमक में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा में पाई जाती है। अगर इसका सीमित मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे कई तरह के लाभ होते हैं। मैक्स हेल्थकेयर की चीफ डायटीशियन रितिका समादार कहती है कि पैकेट में मिलने वाला सफेद नमक ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है लेकिन इसके वास्तविक फायदे तभी मिलते हैं, जब यह आयोडाइज्ड हो। भारत में सादे नमक का फोर्टिफिकेशन होता है, जिसके कारण इसमें आयोडीन की संतुलित मात्रा पाई जाती है। सादा नमक आयोडीन का भी एक अच्छा स्त्रोत है। आयोडीन शरीर के लिए बेहद आवश्यक होता है और इसकी कमी होने पर थाॅयराइड जैसी बीमारी होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

सेंधा नमक

सेंधा नमक को अमूमन व्रत में विशेष रूप से खाया जाता है। यह अक्सर रंगहीन या सफेद  रंग का होता है। लेकिन कभी-कभी अन्य पदार्थों की मौजूदगी से इसका रंग हल्का नीला, गाढ़ा नीला, जामुनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या गुलाबी भी हो सकता है। आयुर्वेद में इस नमक को सर्वोत्तम माना गया है। अगर आयुर्वेद पर विश्वास किया जाए तो इस नमक में पाए जाने वाले कई प्रकार के खनिज लवण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने से लेकर कोलेस्टाॅल, तनाव, ज्वाॅइंटस पेन, साइनस व अस्थमा आदि को नियंत्रित करने में मददगार साबित होते हैं।

काला नमक

सादे नमक के बाद काले नमक का प्रयोग ही भोजन में सर्वाधिक किया जाता है। इसमें सोडियम क्लोराइड के साथ-साथ सोडियम सल्फेट, आयरन सल्फाइड, हाइडोजन सल्फाइड की भी कुछ मात्रा पाई जाती है। जहां आयरन सल्फाइड के कारण इसका गहरा बैंगनी रंग दिखता है और इसमें पाए जाने वाले सल्फर लवण के कारण इसका स्वाद व गंध अन्य नमक से भिन्न होती है। काले नमक को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धिति में एक ठंडी तासीर का मसाला माना जाता है और इसका प्रयोग एक रेचक और पाचन सहायक के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि यह पेट की गैस और पेट की जलन में राहत प्रदान करता है। चूंकि इसमें सोडियम की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए उच्च रक्तचाप के व्यक्ति के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है। इसके अतिरिक्त कई तरह की समस्याओं जैसे अस्थमा, सीने में जलन, हाई कोलेस्टाॅल, आॅस्टियोपोरोसिस आदि में बेहद फायदेमंद होता है।

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सी साल्ट

यह नमक के अन्य प्रकारों की अपेक्षा काफी अलग होता है। इसे समुद्री नमक या प्राकृतिक नमक भी कहा जाता है। यह सीधे समुद्र के पानी से उत्पन्न होता है और इसका निर्माण करने के लिए वाष्पीकरण प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है। चूंकि इसका प्रसंस्करण नहीं होता, इसलिए इसमें मौजूद खनिज लवणों का पता नहीं लगाया जा सकता। इसका इस्तेमाल रोजाना में नहीं किया जाता। सी साल्ट इम्युन सिस्टम को स्टांग करने के साथ-साथ दिल को दुरूस्त, हड्डियों को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने व मधुमेह को नियंत्रित करने का काम करता है। हालांकि समुद्री नमक की तुलना में काले नमक को बेहतर माना गया है। समुद्री नमक में एल्यूमीनियम सिलिकेट और पोटेशियम आयोडेट जैसे हानिकारक रसायन होते हैं। इन दोनों रसायनों का स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता हैंए इसलिए कुछ देशों में समुद्री नमक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

हिमालयन पिंक साल्ट

यह नमक हिमालयी पहाड़ों में प्राचीन समुद्री शैलियों से आते हैं। इस नमक के गुलाबी होने के पीछे का मुख्य कारण इसका आयरन समृद्ध होना है। हिमालयन पिंक साल्ट में आयरन के अतिरिक्त भी कई प्रकार के मिनरल्स पाए जाते हैं। यह नमक मांसपेशी की ऐंठन को कम करने के साथ-साथ कोशिकाओं में पीएच स्तर को बेहतर बनाने का काम करता है। इसे एक हेल्दी नमक के रूप में जाना जाता है। 

इसका रखें ध्यान

  • नमक भले ही भोजन का आवश्यक तत्व हो लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। नमक अर्थात सोडियम क्लोराइड की अधिकता कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं जैसे यूरिक एसिड, आॅस्टियोपोरोसिस, मोटापा, हाइपरटेंशन, कैंसर, गुर्दे में पथरी आदि का कारण बनता है।
  • आज दुनिया में नमक की दैनिक खुराक 9-12 ग्राम प्रतिव्यक्ति है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाव के अनुसार ये 5-6 ग्राम होना चाहिए।
  • यूं तो नमक के अलग-अलग प्रकारों कें विभिन्न लाभ बताए गए हैं लेकिन आजतक किसी भी लाभ का वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त नहीं है। 
  • अलग-अलग प्रकार के नमक की अपनी विशेषता है, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थितियों का ध्यान रखते हुए ही नमक का सेवन करना चाहिए।

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