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साथी के होते हुए जब हो जाए क्रश

डेटिंग टिप्स By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 13, 2013
साथी के होते हुए जब हो जाए क्रश

साथी के होते हुए जब हो जाए क्रश : प्या‍र क्यों होता है, कैसे होता है और किससे होता है यह बहस बेमानी है। लेकिन एक साथी के होते हुए जब दिल में चाहत की चिंगारी भड़कने लगती है, तो दिल के कहीं किसी कोने में डर भी होता है और कंफ्य

दिल के तार कहीं जुड़ चुके हैं। आप इज़हार और इक़रार कर चुके हैं। कोई आपके दिल में बस चुका है... आप भी किसी के दिल में बस चुके हैं। लेकिन, ये अचानक क्या हो चला है इस निगोड़े दिल को। क्यों यह बंद मुठ्ठी में भरी रेत सा फिसला जा रहा है। क्यों वहां किसी और को बसाने की जिद करने लगा है, जहां पहले से ही कोई और बसा हुआ है। यह कैसा प्या‍र है... या महज खिंचाव भर है जो आपको बेकस बनाए जा रहा है।

saathi ke hote ho jaye crushप्यार... दिल की बगिया में खिलने वाला यह फूल किसी मौसम का मोहताज नहीं होता। जो सोचकर किया जाए वो प्यार नहीं होता। प्यार तो बस हो जाता है। बेमौसमी बारिश सा यह कहीं भी, कभी भी आपके तन-मन को सराबोर कर सकता है। वो दफ्तर में साथ काम करने वाला सहकर्मी हो सकता है, बस या ट्रेन में रोजाना साथ सफर करने वाला सहयात्री हो सकता है, पड़ोस वाली खिड़की से झांकता चेहरा हो सकता है। बचपन वो दोस्त हो सकता है, घर-घर खेलते समय जिसके लिए चाय बनाने का नाटक करना आपका पसंदीदा काम था। या फिर कोई और... लेकिन तब किया जाए कि जब दिल किसी के साथ किए वादों को अनसुना कर आपको कहीं और राह पर खींचने लगे। साथी के होते हुए भी किसी दूसरे के प्यार में पागल करने लगे।

 

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प्या‍र क्यों होता है, कैसे होता है और किससे होता है यह बहस बेमानी है। लेकिन एक साथी के होते हुए जब दिल में चाहत की चिंगारी भड़कने लगती है, तो दिल के कहीं किसी कोने में डर भी होता है और कंफ्यूजन। क्या ये प्यार है या फिर महज आकर्षण। एक अनजाना सा डर आपको कहीं घेर लेता है। और कहीं अगर वो आपका दोस्त हो तो इसका असर उस रिश्ते पर पड़ना भी स्वाभाविक है। डर लाजमी है। लेकिन, इन हालातों में अगर समझदारी से काम लिया जाए तो सब कुछ बड़े आराम से सुलझ सकता है।

 

इसके लिए सबसे पहले उस इंसान से अपना ध्यान हटाने की कोशिश करें जिसके चलते आपका ध्यान भटक रहा है। हालांकि यह करना उतना आसान नहीं जितना कि कहना। लेकिन कहीं न कहीं अगर आपको इस बात का अहसास है कि यह अस्थायी आकर्षण है। तो, ऐसा किया जाना ही बेहतर है। और एक बार अगर आप तय कैसे निपटा जाए इन हालातों से बेहतर जानते हैं कुछ टिप्स-

 

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खतरे की आवाज सुनें

अपने उस साथी के बारे में सोचिए जिसके साथ आप जिंदगी बिताने का इरादा कर चुके/चुकी हैं। ऑफिस, शैक्षणिक संस्थानों और सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के इस जाल में कहीं आप अपने जीवन के सबसे खूबसूरत रिश्ते से हाथ न धो बैठें। इससे पहले कि आपका रिश्ता‍ मुश्किल में पड़े बेहतर है कि आप इस खतरे की घंटी को सुनें। हां, अगर आप अपने मौजूदा रिश्ते से संतुष्ट नहीं हैं और आपको लगता है कि उस रिश्ते में अब कुछ नहीं बचा है तो नाहक ही उसे खींचने में कोई फायदा नहीं।

 

समझदारी से फैसला लें

इत्मिनान से सोचें कि आपके लिए क्या बेहतर है। खुद को पूरा वक्त दें। आराम से सोचें। सभी पहलुओं पर अच्छे से सोच-विचार कर फैसला लें कि आपके लिए क्या बेहतर है आपका मौजूदा साथी या फिर यह क्रश। सोचते समय खुद से ईमानदार रहें। अगर आप खुद से ईमानदार रहकर फैसला करते है तो वह आमतौर पर ठीक ही होता है। तो आपके सही फैसले पर पहुंचने की उम्मीद ज्यादा होगी। तय करें किसके साथ आप अपना जीवन बिताना चाहेंगे/चाहेंगी।

 

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करियर की बलि न दें

अगर आपका क्रश आपके जीवन पर असर डालने लगा है तो यह खतरे की घंटी है। इससे पहले कि यह आपके करियर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दे आपको इसका हल निकालना होगा। ऑफिस में आपकी यह उलझन लोगों की गॉसिप का हिस्सा बन सकती है और इसका नकारात्मक असर आपके करियर पर पड़ने में वक्त नहीं लगेगा। वहीं दूसरी ओर ऐसी भी उम्मीद है कि ऑफिस पर ही आपको मिल जाए आपका जन्म-जन्मांतर का साथी। तो जरा संभल-संभलकर आगे बढ़ें।

 

उस व्यक्ति से बात करें

हो सकता है कि उससे बात करना आपको जरा अजीब लगे, लेकिन यकीन जानिए कई बार यह जरूरी हो जाता है। आपका दोस्ताना व्यवहार आपके साथी को सहज करेगा। उससे उसकी भावनाओं के बारे में जानने की कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है। अगर आपको लगे कि उससे यह जानने का सही वक्तज अभी नहीं आया है तो दोस्ती चालू रखिए और सही वक्त का इंतजार कीजिए।

 

 

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