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ये हैं बच्चों की अच्छी परवरिश करने के 6 सीक्रेट्स

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 12, 2017
ये हैं बच्चों की अच्छी परवरिश करने के 6 सीक्रेट्स

हर माता-पिता चाहते हैं कि वो अपने बच्चों को सबसे अच्छी परवरिश दें। 

Quick Bites
  • परवरिश के सीक्रेट्स।
  • बच्चों की अच्छी परवरिश।
  • खुद से तुलना ना करें।

हर माता-पिता चाहते हैं कि वो अपने बच्चों को सबसे अच्छी परवरिश दें। ताकि भविष्य में उनका बच्चा लायक और समझदार बने। लेकिन ऐसा तभी संभव है जब आप अपने बच्चों को ऐसे गुण देंगे जो भविष्य में उनके जीवन की बुनियाद बन सके। बच्चों की परवरिश के दौरान कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप उनका बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।

खुद से तुलना ना करें

आजकल के बच्चों में बहुत गुस्सा है। इसलिए उनकी खुद से तुलना ना करें। बल्कि गलती करने पर भी उन्हें प्यार से समझाएं। बच्चों के नखरे दिखाने या किसी चीज के लिए जिद करने पर आमतौर पर आप उन्‍हें डांटते-फटकारने लगते हैं, लेकिन इसका असर बच्चों पर उल्टा पड़ता है। इसलिए ऐसा ना करें।

बच्चों को खूब प्यार दें 

अक्सर लोग समझते हैं कि अपने बच्‍चों को प्‍यार करने का मतलब, उनकी हर मांग पूरी करना है। लेकिन अगर आप उनकी हर डिमांड को पूरा करते हैं तो यह आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी हैं। अगर आप अपने बच्चे को प्यार करते हैं तो उसे वही दें जो लिये सही और जरूरी है। 

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खुद को बदलना है जरूरी

अगर आप अपने बच्चे को एक अच्छी परवरिश देना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको खुद को बदलना होगा। यानि कि जिस तरह आपको बच्चा सोचता है आपको उसके सामने उसी तरह बात करनी होगी। बच्‍चों को अच्‍छे संस्‍कार या उनसे किसी भी तरह की उम्‍मीद आप तब ही कर सकते हैं जब बच्चा आपकी बातों में रुचि ले रहा हो। 

अनुशासन को भी दे महत्व 

अच्छी परवरिश में अनुशासन का भी अपना पूर्ण स्थान है। लेकिन बच्‍चों को अनुशासन में रखने का मतलब उन्हें डराना नहीं है। आपको अनुशासन और डर में अंतर पता होना चाहिए। कई माता पिता पैरेंट बच्चों को अनुशासित करने के लिए उन्‍हें मारते पीटते हैं। लेकिन यह सही नहीं है। इसका बच्चों पर गलत असर पड़ता है। जिसके चलते बच्चे पेरेंट्स को जवाब देने लगते हैं। इसलिए ऐसा ना करें।

वक्त बिताएं 

जॉब की वजह से आजकल पेरेंट्स के पास अपने खुद के बच्चों के लिए ही वक्त नहीं रह गया है। जबकि बच्चों के साथ वक्त बिताना बहुत जरूरी है। उनके साथ हर खुशी और दुख को बांटें। यह जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्या सोचता, किस चीज में उसकी रुचि है और उसे क्या पसंद नहीं है आदि। ऐसा करने से बच्‍चों और आप में विश्वास भी बनेगा।

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Written by
Rashmi Upadhyay
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागDec 12, 2017

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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