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World hypertension Day 2019: प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर कितना खतरनाक होता है?

महिला स्‍वास्थ्‍य By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 03, 2013
World hypertension Day 2019: प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर कितना खतरनाक होता है?

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या खतरनाक हो सकती है। इससे होने वाले शिशु के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। हाई ब्लड प्रेशर से होने वाले खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 17 मई को विश्व हाइपटेंशन डे यानी World

हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण आजकल युवा लड़के-लड़कियां भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रेग्नेंसी हर महिला के जीवन में एक महत्वपूर्ण समय होता है। मगर कई बार महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान या पहले ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से होने वाले खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को विश्व हाइपटेंशन डे यानी World hypertension Day मनाया जाता है।

गर्भावस्था के दौरान अपने होने वाले शिशु के बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास के लिए महिला को अपनी सेहत का भी विशेष ख्याल रखना पड़ता है। लेकिन देखा जाता है कि कई बार महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है। इसके अलावा कुछ महिलाओं को कम उम्र में ही हाई बीपी की समस्या होने पर, प्रेग्नेंसी में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर न सिर्फ महिला, बल्कि उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए भी खतरनाक है। आमतौर पर इस दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि प्रेग्नेंसी में महिला तनाव में रहती है। कई बार डिप्रेशन भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है। अगर ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंसी के दौरान ही बढ़ा है, तो इसके दीर्घकालिक प्रभाव कम दिखते हैं। मगर यदि महिला पहले से हाई ब्लड प्रेशर की मरीज है, तो इसके ज्यादा प्रभाव हो सकते हैं।

गर्भावस्‍था में हाई ब्लड प्रेशर

गर्भावस्‍था में यदि हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या लंबे समय से हो तो यह दीर्घकालिक उच्च रक्तचाप या क्रॉनिक हाइपरटेंशन कहलाता है। यदि हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या प्रेग्‍नेंसी के 20 सप्ताह बाद, प्रसव में या प्रसव के 48 घंटे के भीतर होता है तो यह प्रेग्नेंसी इड्यूस्ड हाइपरटेंशन कहलाता है। इस दौरान यदि रक्तचाप 140/90 या इससे अधिक है तो महिला और बच्‍चे दोनों को परेशानी हो सकती है। इससे मरीज एक्‍लेंप्शिया में पहुंच सकता है, यह एक प्रकार की जटिलता है जिसमें महिला को झटके आने शुरू हो जाते हैं।

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महिलाओं में प्रेग्‍नेंसी के हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या बहुत देखी जाती है। भ्रूण के विकास के साथ यह समस्‍या गंभीर होती जाती है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान यदि भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों का अभाव है तो महिलायें रक्ताल्पता की शिकार होती हैं। शरीर में ब्‍लड की कमी से फीटस का विकास रुक जाता है। इससे मिसकैरेज होने की संभावना भी बनी रहती है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर तीन प्रकार का होता है- क्रोनिक हाइपरटेंशन, गेस्‍टेशनल हाइपरटेंशन और प्रीक्‍लेंप्शिया।

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गर्भावस्‍था में हाई ब्‍लड प्रेशर के खतरे

  • गर्भावस्‍था के दौरान उच्‍च रक्‍तचाप के कारण बच्‍चे का विकास बाधित हो सकता है। बच्‍चे के लिए जरूरी विटामिन और प्रोटीन नही मिल पाता। इसका असर होने वाले बच्‍चे के वजन पर भी पड़ता है।
  • हाइपरटेंशन के कारण गर्भनाल को नुकसान हो सकता है। कुछ मामलों में गर्भनाल गर्भाशय से अलग हो जाता है। इसके कारण बच्‍चे की ऑक्‍सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। महिला को रक्‍तस्राव भी हो सकता है।
  • गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर से समय से पूर्व डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • यदि महिला को गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या है तो प्रसव के 20 सप्‍ताह बाद हृदय की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भावस्‍था के दौरान उचित खानपान और नियमित चेकअप के जरिए इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। यदि आपको इस दौरान हाइपरटेंशन के लक्षण दिखें तो चिकित्‍सक से तुरंत संपर्क कीजिए।

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