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रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज अब हुआ आसान! वैज्ञानिकों ने खोज निकाली है ये नई तकनीक

लेटेस्ट By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 10, 2019
रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज अब हुआ आसान! वैज्ञानिकों ने खोज निकाली है ये नई तकनीक

हाल ही में हुए एक शोध में रूमेटाइड अर्थराइटिस के बारे में पता लगाने का एक आसान तरीका खोज निकाला है। जिससे इसका निदान और उपचार आसान हो सकता है।

रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis) एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Body's immune system) जोड़े के अस्‍तर पर हमला करता है, जिसके कारण हड्डियों और जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्‍या शुरू हो जाती है। अगर हम ब्रि‍टेन की बात करें तो 5 लाख लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। वर्तमान में इसके निदान के लिए एक रुमेटोलॉजिस्ट, रक्‍त परीक्षण और एक्‍सरे या अल्‍ट्रासाउंट द्वारा स्‍कैन करके इसके निदान का प्रयास करता है। फिलहाल इनकी मदद से ही रूमेटाइड अर्थराइटिस का निदान किया जा रहा है। लेकिन, हाल ही में हुए एक शोध में रूमेटाइड अर्थराइटिस के बारे में पता लगाने का एक आसान तरीका खोज निकाला है। जिससे इसका निदान और उपचार आसान हो सकता है।  

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बर्मिंघम विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, अवरक्त प्रकाश (Infrared light) का उपयोग करके रूमेटाइड अर्थराइटिस का पता लगाया जा सकता है, जो रोग का निदान करने और उसके उपचार की प्रभावशीलता की निगरानी करने का एक उद्देश्यपूर्ण तरीका पेश कर सकता है। तीव्र, गैर-इनवेसिव तकनीक चिकित्सकों को प्रारंभिक अवस्था में रोग का निदान करने में मदद कर सकती है और यह आकलन कर सकती है कि चयनित उपचार कितनी प्रभावी रूप से रोग की प्रगति को नियंत्रित कर सकता है। 

हालांकि, इसके विश्‍लेषण करने में समय खर्च होता है, इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्‍यकता होती है। एनआईएचआर बर्मिंघम बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर में हेल्थ टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट और रुमैटोलॉजिस्ट के साथ साझेदारी में बर्मिंघम के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस में एक टीम द्वारा विकसित की गई नई तकनीक, इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी के साथ 3 डी डिजिटल इमेजिंग को जोड़ा गया है ताकि मरीजों के हाथ के अंदर रक्त की 3 डी छवि बनाई जा सके और मुल्‍यांकन किया जा सके। 

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उपचार प्रक्रिया के अंतर्गत, रोगी स्कैनर के अंदर एक हाथ रखता है, जो पहले हाथ का 3 डी मॉडल बनाता है और इसके आकार और आकृति को मापता है। अगले चरण में, प्रत्येक उंगली के माध्यम से एक इंफ्रारेड किरण को निर्देशित किया जाता है और उंगली के माध्यम से प्रकाश की मात्रा को मापा जाता है। क्योंकि ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त प्रकाश को अलग तरह से अवशोषित करता है। इंफ्रारेड किरणों का उपयोग रूमेटाइड अर्थराइटिस के संकेतों जैसे ऑक्‍सीजन में हाइपोक्सिया के निम्न स्तर और रक्त सामग्री के स्तर में वृद्धि, सूजन के संकेतों के बारे में पता लगाना संभव है।

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इस शोध को लीड कर रहे प्रोफेसर हामिद देहघानी कहते हैं कि "हम जानते हैं कि रूमेटाइड अर्थराइटिस के रोगियों का निदान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक उपचार से बेहतर दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त होते हैं।" उन्‍होंने कहा कि "हमने जो प्रणाली विकसित की है वह कम लागत वाली, बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत ही उन्‍नत है। हमें उम्मीद है कि यह चिकित्सकों के लिए समय पर बीमारी का निदान करने और उपचार करने में मदद करेगी।"

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