कोरोना के इलाज में उपयोग की जा रही दवा रेमडेसिवीर लिवर और किडनी को पहुंचाती है चोट, जानें क्या कहता है ICMR

Updated at: Jul 13, 2020
कोरोना के इलाज में उपयोग की जा रही दवा रेमडेसिवीर लिवर और किडनी को पहुंचाती है चोट, जानें क्या कहता है ICMR

कोरोना के इलाज में जरूरत से ज्यादा रेमडेसिवीर का इलाज लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा रही है। आईसीएमआर ने इस संबंध राज्यों को चेतावनी दी है।  

Jitendra Gupta
लेटेस्टWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 13, 2020

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अभी तक COVID-19 की कोई वैक्सीन नहीं बनी है इसलिए दुनिया भर के डॉक्टर और शोधकर्ता इस वायरल संक्रमण के इलाज के लिए कुछ मौजूदा दवाओं का परीक्षण कर रहे हैं। इन्हीं कुछ दवाओं में से एक है रेमडेसिवीर, जिसे मूल रूप से एंटीवायरल दवा के रूप में जाना जाता है और ये इबोला के इलाज के लिए बनाई गई थी। कुछ अध्ययनों में ये बात कही गई है कि रेमडेसिवीर, कोरोना के सामान्य से अधिक और गंभीर मामलों में क्लिनिकल सुधार के लिए आवश्यक समय को कम कर सकता है। इन अध्ययनों के आधार पर, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने गंभीर रूप से बीमार अस्पताल में भर्ती कोरोनोवायरस रोगियों पर प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के लिए रेमेडिसविर को मंजूरी दी थी। भारत की तीन फार्मा कंपनियों  सिप्ला, हेटेरो और माइलान एनवी  को रेमडेसिवीर के जेनेरिक संस्करण बनाने और बेचने के लिए ड्रग अथॉरिटी द्वारा मंजूरी भी दे दी गई थी।

medicine

लेकिन अब, सरकार ने रेमेडिसविर इंजेक्टेबल फॉर्मुलेशन के उपयोग पर सावधानी बरतनी की सलाह दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने राज्यों को अत्यधिक सावधानी के साथ रेमेडिसविर का उपयोग करने के लिए कहा है। दरअसल इसके अंधाधुंध उपयोग या जरूरत से ज्यादा उपयोग पर शरीर को फायदा मिलने के बजाए और अधिक नुकसान पहुंच रहा है। आईसीएमआर और एम्स दोनों ने ही टोसीलिज़ुमाब के उपयोग के खिलाफ भी चेतावनी दी है। ये दवा भी कोरोना रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक है, जिन्हें सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी है। 

रेमेडिसविर से हो सकते हैं प्रतिकूल प्रभाव 

शुक्रवार को राज्यों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान, ICMR ने कहा कि जांच चिकित्सा के रूप में प्रयोग हो रही रेमेडिसविर और टोसीलिज़ुमाब का सख्ती से प्रयोग किया जाना चाहिए क्योंकि ये लिवर और किडनी सहित शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल दुष्प्रभावों का कारण बन सकती है। आईसीएमआर का कहना है कि रेमेडिसविर के लिए उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि यह कोरोना के गंभीर और सामान्य से अधिक मामलों में नैदानिक सुधार के लिए आवश्यक समय को कम कर सकता है, लेकिन मृत्यु दर में कमी के संदर्भ में इसका कोई लाभ देखने को नहीं मिला है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि रेमेडिसविर की तरह अध्ययनों में कोरोना से होने वाली मौतों में कमी के लिए टोकिज़ुमाब से भी कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है। 

इसे भी पढ़ेंः हाई ब्लड शुगर वाले कोरोना रोगियों को मौत का खतरा डबल! शोधकर्ताओं ने बताया कितने दिन होते हैं मरीजों पर भारी

मंत्रालय ने आगे बताया कि सभी जांच उपचारों को केवल उचित स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में किया जाना चाहिए जहां रोगियों की निकट निगरानी संभव हो ताकि संभावित जटिलताओं को प्रबंधित किया जा सके।

medi

क्लिनिकल मैनेजमेंट पर दिशानिर्देश

जैसा कि अभी तक COVID-19 का कोई इलाज नहीं है, इसलिए बीमारी के लिए उपचार का तरीका काफी हद तक सहायक देखभाल पर आधारित है। ICMR ने कहा कि क्लिनिकल प्रबंधन का ध्यान ऑक्सीजन थेरेपी, स्टेरॉयड (जो कि व्यापक रूप से उपलब्ध और सस्ता है) पर बना रहना चाहिए। इसके साथ ही , और एंटी-कोआगुलेंट्स और उच्च-गुणवत्ता वाले सहायक देखभाल के समय पर प्रशासन, रोगियों और परिवारों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सहित पहले से मौजूद बीमारी और लक्षणों के विचलन का प्रबंधन भी होना चाहिए।

इसे भी पढ़ेंः क्यों डॉक्टर मान रहे 2021 की शुरुआत से पहले नहीं आएगी कोरोना वैक्सीन? जानें इसके पीछे की सच्चाई और असली कारण

वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान, ICMR और AIIMS ने राज्यों से कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में वर्णित हल्के, मध्यम और गंभीर मामलों के लिए देखभाल उपचार के मानक का पालन करें।

मध्यम और गंभीर मामलों के लिए, पर्याप्त ऑक्सीजन सहायता, एंटी-कोआगुलंट्स का उचित और समय पर प्रशासन और व्यापक रूप से उपलब्ध और सस्ती कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स को कोरोना चिकित्सा का मुख्य आधार माना जा सकता है। हल्के मामलों के लिए, जो कुल मामलों में लगभग 80 प्रतिशत हैं, डॉक्टरों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यूएस) का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देखभाल उपचार रणनीतियों के मानक ने सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। 

Read More Health News In Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK