नींद में चलना या बोलना हो सकती है नींद से जुड़ी इस बीमारी का संकेत, जानें क्या है REM Sleep Behaviour Disorder

नींद में कुछ लोग हिंसक हो जाते हैं और दूसरों को चोट भी पहुंचा सकते हैं। ये सब REM Sleep behaviour Disorder की वजह से हो सकता है। 

 
Pallavi Kumari
विविधWritten by: Pallavi KumariPublished at: Jun 25, 2021
Updated at: Jun 29, 2021
नींद में चलना या बोलना हो सकती है नींद से जुड़ी इस बीमारी का संकेत, जानें क्या है REM Sleep Behaviour Disorder

नींद में बोलने की बीमारी (sleep talking) एक ऐसी स्थिति है,  जो कि REM (Rapid eye movement) स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर के कारण होता है। इतना ही नहीं जो लोग नींद में चलते हैं (sleep talking) या सोते-सोत डर (nightmares) जाते हैं, उन्हें भी ये परेशानी आरईएम (REM) स्लीप डिसऑर्डर के चलते ही होता है। दरअसल, हम दो प्रकार की नींद में सोते हैं। पहला आरईएम स्लीप (REM sleep)और दूसरा नॉन आरईएम (Non-REM sleep)।  REM नींद लगभग 90 मिनट से 2 घंटे तक चलती है और इस दौरान हमारी आंखों की मूवमेंट तेज होती है। यानी कि हम इस दौरान बहुत तेज तरीके से सपने देख रहे होते हैं और हमारा मस्तिष्क बहुत ज्यादा एक्टिव होता है। पर नॉन आरईएम स्लीप के दौरान हमारा दिमाग शांत रहता है। 

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क्या है REM- What is REM Sleep behaviour Disorder?

आरईएम (REM), हमारी नींद का एक ऐसा चरण है जो सो जाने के 90 मिनट बाद शुरू होता है। REM स्लीप में सपने आते हैं। नींद के इस चरण के दौरान, शरीर की मांसपेशियां आमतौर पर बहुत शांत हो जाती है, मानों लकवा मार गया हो। पर इस दौरान हमारा दिमाग बहुत तेजी से काम करता है और हम अपने सपनों में इतना खो जाते हैं कि सपने वाले काम करने लगते हैं और कई बार हिंसक भी हो जाते हैं। अस्थायी मांसपेशी आरबीडी वाले स्लीपर शारीरिक रूप से उत्तेजित हो जाते हैं, सक्रिय रूप से अपने अंगों को हिलाते हैं, बिस्तर छोड़ते हैं और नींद में चलना शुरू कर देते हैं। ऐसे लोग कई बार साथ में सोए व्यक्ति को भी परेशानी में डाल सकते हैं। इस दौरान एक खास बात ये भी होती है कि अगर व्यक्ति जागता है, तो वह अपने सपने को याद कर सकता है, लेकिन यह नहीं जानता कि वह किसी भी काम में लगा हुआ था।

REM का कारण- Causes of REM ?

मस्तिष्क में तंत्रिका मार्ग जो मांसपेशियों को हिलने से रोकने के लिए जाना जाता है, आरईएम नींद में सपने देखते समय ये सक्रिय हो जाते हैं। यह आपके शरीर, पैरों या बाहों को हिलने से रोकता है, यानी टेम्पररी पैरालिसिस का कारण बनता है। कुछ मामलों में, तंत्रिका मार्ग और आपके शरीर के कुछ कैमिकल्स अपने कुछ कामों को सही से पूरा नहीं कर पाते हैं, जिसके चलते आप स्लीपवॉकिंग या स्लीपटॉकिंग स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर (आरबीडी) जैसे विकार विकसित कर सकते हैं।

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REM के लक्षण-Symptoms of REM 

  • -स्लीप टॉकिंग (sleep talking) जिसमें आप अपन सपनों के लिए मुखर प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जैस कि हंसना, बात करना, चिल्लाना, कोसना, रोने के रूप में भावनात्मक एक्टिविटी।
  • -शारीरिक हलचल (Physical movement) जिसमें लोग लात मारते हैं, मुक्का मारने या यहां तक कि बिस्तर से भागने जैसे हिंसक सपनों के जवाब में कुछ मूवमेंट्स करते हैं।

किन लोगों को REM डिसऑर्डर का सबसे ज्यादा खतरा होता है?

  • -एंटीडिप्रेसेंट और नींद की गोलियों का सेवन करने वाले लोनों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
  • - आपके नियमित सोने के पैटर्न में बदलाव आने से।
  • -50 साल से अधिक उम्र के लोगों में।
  • -पार्किंसंस रोग जैसे कुछ न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार होने पर
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REM स्लीप से जुड़ी सावधानियां-Precautions for REM sleep

  • -अपने बेडसाइड से चोट लगने वाली चीजें या महंगी वस्तुओं को हटा दें। कोई भी ऐसी चीज जिससे आपको चोट लगे या  मूल्यवान घड़ियां और सेल फोन जिसका नुकसान हो सकता है उसे बिस्तर के बगल में न रखें ।
  • -अपने बिस्तर के पास फर्श पर भी कुछ बिछा दें। दरअसल, नींद में बिस्तर से कूदने और गिरने पर आपको चोट लग सकती है।
  • -अपने बिस्तर के किनारों पर बैरियर लगाएं और फिर सोएं।
  • -अगर आप नींद में लोगों को चोट पहुंचाते हैं तो, अपना बिस्तर शेयर न करें या उस व्यक्ति से दूर सोएं।
  • -सोते समय डरवाजा बंद करके रखें और बालकनी या छत के पास वाले कमरों में ना सोएं।
  • - नींद का एक हेल्दी पैटर्न बनाए ताकि आप ऐसे किसी भी स्लीप डिसऑर्डर का शिकार न हों।

जब आप या आपके साथ सोने वाले साथी को आपकी नींद में कुछ व्यवहार परिवर्तन दिखाई देने लगें, तो इस बात पर ध्यान देना शुरू करें कि क्या ये REM स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर के लक्षण तो नहीं। अगर हां और ये आप नियमित रूप से करने लगे हैं तो, अपने डॉक्टर से बात करें। 

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