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गर्भवती शिशु की खुशी में ना करें पति को इग्नोर, ऐसे निकालें वक्त

गर्भावस्‍था By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 19, 2018
गर्भवती शिशु की खुशी में ना करें पति को इग्नोर, ऐसे निकालें वक्त

गर्भावस्था के बाद संबंधों में भी अधिक जटिलता आ जाती है।

जब तक कोई महिला मां नहीं बनती तब तक वह उन जटिलताओं से और संबंधों से अनजान रहती है, जो उसे गर्भावस्था के दौरान महसूस होते हैं। कहते हैं कि जब तक कोई स्‍त्री मां नहीं बन जाती तब तक वह पूर्ण नारी का दर्जा नहीं पाती। हालांकि गर्भावस्था की प्रारंभिक समस्याएं थोड़ी जटिल होती है। आइये जानें सुरक्षित मातृत्व के साथ ही संबंधों को कैसे स्वस्थ बनाया जा सकता है।

  • यह भ्रम लगभग सर्वमान्य है कि गर्भावस्था में यदि मां के मन में बुरे ख्याल आते हैं तो उसका बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। ये बात कितनी सच है इस बारे में तो बहस नदारद है।  लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं यदि गर्भवती मां मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहती है तो बच्चे पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  • गर्भ में जैसे-जैसे बच्चे का विकास होता रहता है वैसे-वैसे गर्भवती मां उसे महसूस करती है। इसके साथ ही गर्भवती स्त्री की भावनाएं बच्चे को लेकर समय-समय पर बदल जाती है।
 
  • मां हर पल अपने बच्चे की किलकारियां सुनने के लिए बैचेन रहती है। इतना ही नहीं गर्भस्थ शिशु जब मां को पहली बार पेट में लात मारता है एक तरफ तो मां को दर्द होता है लेकिन दूसरे ही पल अपने बच्चे के मूवमेंट से उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।
  • गर्भवती मां जब भी अकेले होती है तो अपने बच्चे से बाते करने लगती है। वह ऐसे बाते करती है जैसे वाकई उसका बच्चा उसे सुन रहा है और निश्चित तौर पर गर्भस्थ शिशु पर इसका प्रभाव भी पड़ता है।
  • गर्भावस्था में शारीरिक बदलाव के साथ-साथ भावनात्मक बदलाव भी दिखाई पड़ते हैं। जैसे- मां अपने गर्भस्थ शिशु को लेकर बहुत सतर्क हो जाती है। छोटी-छोटी बात पर चिंता करने लगती है।
  • गर्भवती स्त्री अपने बच्चे की देखभाल में इतना खो जाती है कि उसे दीन-दुनिया की कोई चिंता नहीं रहती।
  • इतना ही नहीं कई बार गर्भवती स्त्री अपने पति या बच्चे के पिता से भी होने वाले बच्चे के कारण संबंधों में समझौता कर लेती है।
 
  • आखिरी समय में गर्भवती स्त्री इतनी अधिक भावुक हो जाती है कि उसे हर समय डिलीवरी होने की कल्पना होती रहती है।
  • गर्भवती मां अपने शिशु को लेकर इतनी उत्साहित होती है कि परिवार के लोगों को भी शिशु के विकास के बारे में लगातार रू-ब-रू करवाती रहती है। घर का हर सदस्य आने वाले मेहमान को लेकर उत्साहित रहता है। 
  • हालांकि गर्भावस्था में संबंधों में जटिलताएं भी आना लाजमी है क्योंकि बच्चे की देखभाल और बच्चें के स्वास्थ्‍य के लिए गर्भवती मां का अतिरिक्त सतर्क रहना आवश्यक हो जाता है। इसीलिए संबंधों में खटास आने का भी डर रहता है।
  • बहरहाल, गर्भवती मां  कुछ महिलाओं में ऐसे बदलाव थोडा़ चिंताजनक भी होते हैं, लेकिन हर गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए, जिससे उसका होने वाला शिशु स्वस्थ रहे।

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