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रेड बर्थमार्क के कारण, निदान और इलाज

नवजात की देखभाल By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 19, 2014
रेड बर्थमार्क के कारण, निदान और इलाज

जन्म के समय से ही बच्चों में कुछ निशान होते हैं जिन्हें बर्थमार्क के नाम से जाना जाता है। यह बर्थमार्क कभी-कभी बहुत बहुत खराब और भद्दे लगते हैं। आइए जानें यह क्यों होता है और इसका इलाज किस प्रकार संभव है।

बर्थमार्क्‍स यानी जन्‍मजात निशान त्‍वचा पर मौजूद बदरंग निशान होते हैं। कई नवजात शिशुओं में लाल अथवा कुछ अन्‍य प्रकार के निशान होते हैं। आमतौर पर ये निशान जन्‍म के कुछ सप्‍ताहों के भीतर ही नजर आ जाते हैं। ये निशान त्‍वचा के करीब मौजूद रक्‍त वाहिनियों द्वारा बनते हैं। इन निशानों के बनने की बड़ी वजह त्‍वचा में पिग्‍मेंटशन के कारण रक्‍तवाहिनियों का अधिक निर्माण होता है।

कारण

आमतौर पर इन निशानों का मुख्‍य कारण किसी को नहीं पता। और साथ ही इन निशानों को होने से रोकने के लिए ही कुछ किया जा सकता है। बर्थमार्क्‍स के कारकों के बारे में भले ही अधिक जानकारी न हो, लेकिन इतना तो साफ है कि वाहिकीय समस्‍याओं से होने वाले बर्थमार्क्‍स अनुवांशिक नहीं होते। जानकार मानते हैं कि इसके पीछे त्‍वचा कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले स्‍थानिक कारण अधिक उत्‍तरदायी होते हैं।
treatment of red birthmark in hindi

पोर्ट वाइन स्‍टेन

इन निशानों की मुख्‍य वजह रक्‍तवाहिनियों की चौड़ाई निर्धारित करने वाली प्रक्रिया में असंतुलन का होना है। परिणामस्‍वरूप, इस क्षेत्र में निरंतर प्रवाहित होने वाला रक्‍त लाल अथवा बैंगनी हो जाता है। पोर्ट वाइन स्‍टेन इसके अलावा स्‍ट्रग-वेबर-सिंड्रोम (Sturge-Weber syndrome) और क्लिपल ट्रेनायूने सिंड्रोम  (Klippel-Trenaunay syndrome) के कारण भी हो सकता है।

निदान

रेड बर्थमार्क्‍स के निदान की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आखिर ये निशान नजर कैसे आते हैं। डॉक्‍टर इनका इलाज करने से पहले इनकी अच्‍छी तरह जांच करते हैं। बर्थमार्क्‍स की गहरी जांच करने के लिए डॉक्‍टर बॉयोप्‍सी, सीटी स्‍कैन और एमआरआई भी करने की सलाह दे सकता है।
red birthmark

इलाज

अधिकतर बर्थमार्क्‍स किसी प्रकार की परेशानी खड़ी नहीं करते और उन्‍हें किसी इलाज की जरूरत नहीं होती। हालांकि, कुछ रेड बर्थमार्क्‍स से परेशानी हो सकती है। कुछ निशान तो कैंसर का रूप भी ले सकते हैं। रेड बर्थमार्क्‍स बच्‍चे के थोड़ा बड़े होने के साथ ही गायब भी हो जाते हैं। बहुत कम निशान ही रक्‍तवा‍हिनियों के ट्यूमर में परिवर्तित हो सकते हैं। इन्‍हें हेमेन्‍गिओमस (Hemangiomas) कहा जाता है। कुछ निशान ऐसे भी होते हैं, जो ठीक नहीं होते और स्‍थायी रूप से साथ रहते हैं।

हेमेन्‍गिओमस को इलाज करवाने की जरूरत तब पड़ती है, जब इनका असर आपके लुक पर पड़ता हो। इसके साथ ही अगर इससे आपको भावनात्‍मक तनाव अथवा दर्द होता हो, तो भी आपको इसका इलाज करवाना चाहिये। इतना ही नहीं अगर हेमेन्‍गिओमस के आकार, स्‍वरूप अथवा रंग में किसी प्रकार के बदलाव का आभास होने पर भी इलाज करवाया जाना चाहिये। हेमेन्‍गिओमस यदि बच्‍चे की आंख के करीब हो, तो उसका इलाज जरूर करवाना चाहिये, क्‍योंकि इसका असर उसके देखने की क्षमता पर पड़ सकता है।

बर्थमाक्‍स के आकार पर निर्भर करता है कि इसके इलाज में किस प्रकार की इलाज पद्धति को अपनाया जाए। इसके लिए लेजर ट्रीटमेंट से लेकर कॉस्‍मेटिक के अन्‍य तरीके भी आजमाये जा सकते हैं। इसके अलावा बर्थमार्क्‍स के निशान को छोटा करने क लिए दवाओं अथवा इंजेक्‍शन का भी प्रयोग किया जा सकता है।

बहुत ही दुर्लभ मामलों में बर्थमार्क्‍स का संबंध किसी अन्‍य बीमारी से होता है। लेकिन, कुछ मामलों में देखा गया है कि लिवर, फेफड़े, पेट अथवा अंत्राशय की बीमारियों के फलस्‍वरूप भी बर्थमार्क्‍स हो सकते हैं। यदि ऐसी कोई समस्‍या नजर आए, तो आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिये।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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