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कितना अच्‍छा है आपके बच्‍चे का जिज्ञासु होना

परवरिश के तरीके By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 31, 2014
कितना अच्‍छा है आपके बच्‍चे का जिज्ञासु होना

अब वो दौर नहीं कि आप अपने बच्‍चे के सवाल पूछने की प्रवृत्ति को खत्‍म कर दें आज के बच्‍चे तमाम तरह के सवाल पूछते हैं, और आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

बचपन तो समय ही होता है कुछ नया सीखने का, कुछ नया करने का, कुछ नया आजमाने का। ऐेसे मौके पर बच्चा अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए आपसे कई तरह के सवाल पूछ सकता है। कई बार यह सवाल आपको परेशान भी कर सकते हैं। तो फिर क्‍या होनी चाहिए आपकी प्रतिक्रिया ? क्‍या बच्‍चे को ज्‍यादा सवाल पूछने से रोकना चाहिए ? या फिर उसकी बातों के जवाब तलाशने चाहिए-

father with childआपका बच्‍चा रोज कुछ नया सीखता है। वह नये लोगों से मिलता है... नये शब्‍द सीखता है... नये स्‍थान और नये पकवान सीखता है। जीवन के शुरुआती वर्षों में बच्‍चे को ढेरों जानकारियां और हुनर सीखने होते हैं। इस प्रक्रिया में बच्‍चे के सामने कई सवाल भी उभरते हैं। ये सवाल आपको बचकाने लग सकते हैं, लेकिन यही बाल सुलभ जिज्ञासा और इस पर आपकी प्रतिक्रिया ही बच्‍चे के व्‍यक्तित्‍व निर्माण की रूपरेखा तैयार करती है।

 

रात में क्‍यों छुप जाता है सूरज

बच्‍चा आपसे पूछ सकता है कि जब हम आंखों से सब कुछ देखते हैं, लेकिन अपनी आंख ही क्‍यों नहीं देख पाते या अंधेरा होते ही सूरज कहां चला जाता है। हो सकता है कि आपके जवाब से बच्‍चा संतुष्‍ट न हो पाए, लेकिन ऐसे मौकों पर आपका क्रोध करना या फिर जवाब ही टाल जाना बच्‍चे के लिए अच्‍छा नहीं होता। जिज्ञासु होना बहुत अच्‍छी बात है और आपको खुश होना चाहिए कि आपके बच्‍चे में यह जिज्ञासा है। उसकी यही जिज्ञासा उसके लिए ज्ञान के नये द्वार खोलने में मदद करती है। अगर आप उसकी जिज्ञासा को शांत नहीं करेंगे तो वह उसके लिए दूसरे माध्‍यम तलाशने का प्रयास करेगा और इस बात की कोई निश्‍चितता नहीं कि वह द्वारा सही होगा और वहां से मिलने वाली जानकारी उसके लिए फायदेमंद होगी।

 

सवालों से ही होता है विकास

मानव स्‍वभाव से जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है। वह भीतर उठ रहे सवालों के जवाब जरूर जानना चाहता है। और यही उसकी नयी खोज का हिस्‍सा बनता है। बच्‍चों में सवाल पूछने की आदत को प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए। इससे न सेवल उनकी जिज्ञासा में इजाफा होता है, बल्कि साथ ही उनके सोचने-समझने की क्षमता का भी विकास होता है। उनकी यह आदत जीवनभर के लिए उनकी सोच का निर्माण करने में भी सहायता करती है।



बचपन में संज्ञानात्‍मक हुनर तेजी से बढ़ते हैं। सवाल जवाब की इसी प्रक्रिया से ही बच्‍चा अपने आसपास की दुनिया से वाकिफ होता है। वह जानता समझता है कि आखिर दुनिया कैसे काम कर रही है। बच्‍चों के सवालों के जवाब देकर आप न केवल उसके संज्ञानात्‍मक विकास में तेजी लाते हैं, लेकिन साथ ही इससे माता-पिता और बच्‍चों के संबंधों में मजबूती भी आती है।


शांति से सुनें

आपका बच्‍चा आपसे दिल खोलकर बात कर सके,  इसके लिए पहली शर्त यह है कि आप ध्‍यान लगाकर उसकी पूरी बात सुनें। उसकी बातों को बीच में काटें नहीं और न ही गुस्‍सा करें। बच्‍चों के सवाल पूछने की प्रवृत्ति को बढ़ाने का प्रयास करें और उसके सवालों को 'गुड क्‍वेश्‍चन' कहकर प्रोत्‍साहित भी करें। उसके सवालों को कभी टालें नहीं और न ही उनसे बचने की ही कोशिश करें। उसे संतुष्‍ट करने वाला जवाब दें, ताकि वह अगली बार आपसे कोई सवाल पूछने में घबराए नहीं।


अभिभावकों के लिए सलाह  

ऐसे मौके भी आते हैं, जब सवालों का कभी न खत्‍म होने वाला सिलसिला आपको परेशान भी कर सकता है। ऐसे मौके पर आपको अपना धैर्य नहीं खोना है। आपको हमेशा बच्‍चों को सकारात्‍मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए, अन्‍यथा वह इस बात को दिल से लगा सकता है। उसे लग सकता है कि जिज्ञासु होने और सवाल पूछने की आदत अच्‍छी नहीं है। धीरे-धीरे उसकी जिज्ञासा और संज्ञानात्‍मक क्षमता पर नकारात्‍मक असर पड़ना शुरू हो जाता है। अगर आप अकेले इस समस्‍या का सामना न कर पा रहे हों, तो आप अपने साथी, अपने माता-पिता और यहां तक कि इंटरनेट की भी मदद ले सकते हैं। लेकिन, इस बात का पूरा ध्‍यान रखें कि आपके बच्‍चे को हमेशा सकारात्‍मक प्रतिक्रिया ही मिले।

 

छोटी-छोटी बातों का रखें खयाल

बच्‍चों में संवाद करने की आदत को प्रोत्‍साहित करें। अगर आपका बच्‍चा अपने दिल की कोई बात कहना चाहता है, तो आपको चाहिए कि उसकी इस आदत को आगे बढ़ायें। उसे अपनी बात कहने से रोकें नहीं और न ही डांटकर उसकी बात बीच में काटें। बच्‍चों से ओपन एंडेड सवाल पूछें। इससे उनके सीखने और सोचने की क्षमता में इजाफा होगा। उदाहरण के लिए अपने बच्‍चे से यह पूछने के बजाय कि क्‍या आज तुम दुखी हो, यह पूछिए कि आज तुम्‍हें कैसा लग रहा है। इस तरह के सवालों से बच्‍चा अधिक विस्‍तार से अपनी भावनाओं को प्रकट कर पाएगा।



इस प्रकार की गतिविधियों से बच्‍चा अपने अनुभव अधिक मुखर होकर आपके साथ बांट सकेगा। अपने बच्‍चे के साथ कहीं भी घूमने जाएं, फिर चाहे वो पार्क हो, म्‍यूजिम हो या फिर कोई अन्‍य स्‍थान ही क्‍यों न हो। अपने बच्‍चे से उसके अनुभवों के बारे में इस तरह के सवाल पूछें। इससे उसके लिए अपने दिल की बातों को जाहिर करने में मदद मिलेगी।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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