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जानें आखिर क्यों रोते हैं शिशु

परवरिश के तरीके
By Meera Roy , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 09, 2016
जानें आखिर क्यों रोते हैं शिशु

शिशु का रोना सिर्फ रोना नहीं होता, वे रोकर कई संकेत देते हैं। इसलिए मां के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि शिशु कब और किस लिए रोता है।

Quick Bites
  • भूख लगने पर शिशु रोते हैं।
  • डाइपर गंदा होने से शिशु रोते हैं।
  • बहुत ज्यादा थकान में भी शिशु रोते हैं।
  • पेट दर्द या गैस होने पर भी रोते हैं शिशु।

शिशु का रोना सिर्फ रोना नहीं होता। अपनी मां से संपर्क करने का यह उनका एक तरीका होता है। इसलिए मां के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि शिशु कब और किसलिए रोता है। लेकिन कई दफा हम शिशु के रोने की वजह नहीं समझ पाते। आइये जानते हैं शिशु आखिर क्यों रोते हैं।


भूख के कारण  

यह सबसे पहली वजह है। वास्तव में शिशु को जब भी भूख लगती है वह रोकर अपनी भूख को व्यक्त करते हैं। लेकिन आप अगर चाहें तो उसके भूख का पता पहले ही चल सकता है। सवाल है कैसे? दरअसल शिशु भूख लगने के दौरान अपने होंठ चूसने लगता है । अपने मुंह के इशारे से दूध ढूंढ़ता है। हाथ यहां वहां चला रहा होता है। यही नहीं भूख लगने पर शिशु अपना हाथ भी मुंह में दे देता है। सो इन संकेतों का ख्याल रखते हुए आप अपने शिशु को रोने से रोक सकते हैं।

गंदे डाइपर के कारण

इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि शिशु गंदगी में रहना कतई पसंद नहीं करते। यदि आप अपने शिशु को डाइपर पहनाते हैं तो उसका ध्यान रखें। शिशु खुद डाइपर बदलने का संकेत आपको दे देते हैं। आपको सिर्फ इतना करना है कि उसके रोने के द्वारा दिये गए संकेत को समझें। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि हर समय शिशु को डाइपर में न रखें। इससे रैशेज़ होने का खतरा रहता है।

 

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सोते समय

देखा जाए तो शिशु जब मन आए, जहां मन आए सो सकते हैं। यह बेहद आसान और सरल महसूस होता है। जबकि हकीकत यह है कि सोने से पहले शिशु को काफी परेशानी होती है। उन्हें बेचैनी होती रहती है। वे बड़ों की तरह आसानी से लेटकर सपनों की दुनिया तक नहीं पहुंचते। इसके उलट अतिरिक्त थकान होने के कारण वे काफी परेशान होते हैं और काफी मुश्किलों का सामना कर सो पाते हैं। यही कारण है कि सोने से पहले वे काफी रोते हैं।

गोद में रहना

शिशु हमेशा अपने माता-पिता की गोद में रहना चाहते हैं, उनका चेहरा देखना चाहते हैं, उनकी आवाज सुनना चाहते हैं। यही नहीं वे अपने माता-पिता की दिल की धड़कन तक सुनना चाहते हैं साथ ही उनकी खुशबू भी महसूस करना चाहते हैं। यही कारण है कि बच्चे जब भी अपनी मां की गोद में जाना चाहते हैं तो वे रोना शुरु कर देते हैं। ऐसी स्थिति में वे किसी और की गोद में जाने से ज्यादा रोते हैं।

पेट में तकलीफ

पेट में दर्द, गैस आदि की समस्या होने पर भी शिुश राते हैं। यदि आपका शिशु प्रत्येक बार दूध पीने के बाद घंटों रोता है तो समझें कि उसके पेट में तकलीफ हो रही है। हो सकता है कि उसने ज्याद दूध पी लिया हो जिससे उसके पेट में दर्द हो रहा है या फिर दूध हजम नहीं हो रहा जिस कारण शिशु रो रहा है। ऐसी स्थिति से बचाने के लिए शिशु को आप ग्राइप वाटर दे सकते हैं। यूं तो बेहतर है कि शिशु को प्रथम छह माह तक ऊपरी कुछ भी न दें। संभव हो तो मां अपने खानपान में संयम बरतें।


मिर्च मसालें कम लें। मिर्च मसाला खाने से शिशु के पेट में जलन हो सकती है, उसके दस्त लग सकते हैं। अतः मां को अपनी जीवनशैली पर ध्यान देकर शिशु के सेहत का ख्याल रखना होता है। बावजूद इसके यदि शिशु अकसर पेट दर्द के कारण रोता है तो चिकित्सक की सलाह लेकर प्रत्येक फीडिंग के बाद ग्राइप वाटर खिलाया जा सकता है।


Image Source - Getty

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Written by
Meera Roy
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 09, 2016

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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