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रजोनिवृति के साइड इफेक्ट

सभी By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 13, 2012
रजोनिवृति के साइड इफेक्ट

रजोनिवृति के साइड इफेक्ट: रजोनिवृत्ति के बाद अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के उत्पादन को बहुत ही कम कर देता है। जिससे  स्वास्‍थ्‍य पर न केवल अल्पकालिक प्रभाव पड़ते है बल्कि यह लंबी अवधि के जोखिम का भी नेतृत्व कर सकते है।

रजोनिवृत्ति के बाद अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के उत्पादन को बहुत ही कम कर देता है।


rajonivriti ke side effect

रजोनिवृत्ति स्त्री के जीवन का प्राकृतिक और जैविक चरण है। यह तब होता है जब किसी महिला को माहवारी होना बंद हो जाता है। यह उसकी प्रजनन काल के अंत का संकेत है।

रजोनिवृत्ति आमतौर पर तब होती है जब महिला 45 की हो जाती है। रजोनिवृत्ति के साथ जुड़े परिवर्तन तब शुरू होते हैं, जब अंडाशय काम करना बंद कर देते है। अंडाशय प्रजनन ग्रंथि है जो कि अंडे को स्टोर करती है और उन्हें फैलोपियन ट्यूब में रिलीज करती है। और साथ ही यह महिला के हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन भी करती है।

ये दोनो हार्मोन साथ में मिलकर माहवारी को नियंत्रित भी करते हैं। एस्ट्रोजन का हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है क्योकि यह तय करता है कि कैसे शरीर में कैल्शियम का उपयोग करना है और रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखना है।

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रजोनिवृत्ति के बाद अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के उत्पादन को बहुत ही कम कर देता है। कम एस्ट्रोजन के स्तर से एक महिला के स्वास्‍थ्‍य पर न केवल अल्पकालिक प्रभाव पड़ते है बल्कि यह लंबी अवधि के जोखिम का भी नेतृत्व कर सकते है।

रजोनिवृत्ति के अल्पकालिक प्रभाव

रजोनिवृत्ति के साथ हर महिला का अनुभव अलग होता है। कुछ महिलाओं रोगसूचक प्रभाव का अनुभव करती है, जबकि कुछ असुविधा से ग्रस्त हो जाती हैं। रजोनिवृत्ति के अल्पकालिक संबंधित प्रभाव का हार्मोन में कमी कर सीधे पता लगाया जा सकता है। रजोनिवृत्ति में आम अल्पकालिक प्रभाव शामिल हैं-

पसीना आना - रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को अचानक से गर्मी की अनुभूति होती है जो छाती से सिर तक होती है। अचानक पसीना आता है और कपकपी होने लगती है। खासतौर पर रात में नींद के दौरान बहुत अधिक पसीना आने लगता है। कुछ मामलों में, पसीना इतना अधिक होता है कि महिला के कपड़े और चादर तक भीग जाते है।

सोने में कठिनाई - रजोनिवृत्ति से कुछ महिलाओं को रात में इतना अधिक पसीना आता है जिसका परिणाम यह होता है उनकी नींद में खलल पड़ सकता है।

योनि परिवर्तन - रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन की कमी होने से योनि में परिवर्तन आने लगता है, योनि पतली, ड्राई और यहां तक की कम  लोचदार हो जाती है। और इसी कारण से योनि अधिक संक्रमण की चपेट में आ सकती है।

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सेक्स ड्राइव में परिवर्तन - यह बात स्पष्ट नहीं है रजोनिवृत्ति सेक्स ड्राइव को सीधे प्रभावित करती है, या नही। पर योनि में परिवर्तन की वजह सेक्स वांछनीय और असहज हो सकता है।
   
मूड में परिवर्तन - रजोनिवृत्ति के बाद चिड़चिड़ापन, घबराहट, और मूड में परिवर्तन आदि जैसे परिवर्तन शामिल हो सकते हैं।

मूत्र परिवर्तन या तनाव असंयम - मूत्राशय में मांसपेशियों के लूज होने से मूत्र अनैच्छिक लीक होने लगता है खासकर जब आप हंसते या खांसते है। मूत्राशय में संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है।

त्वचा परिवर्तन - रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं की त्वचा ड्राई होने लगती है।
    
अन्य परिवर्तन - रजोनिवृत्ति के बाद एक महिला में अन्य प्रकार के परिवर्तन जैसे सिर में दर्द, तेज़ दिल की धड़कन, चेहरे पर बालों की वृद्धि और एकाग्रता या स्मृति में कमी आदि जैसे परिवर्तन देखने को भी मिल सकते हैं।

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रजोनिवृत्ति के लंबी अवधि के स्वास्थ्य जोखिम
 
रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन में कमी से लगभग हर शरीर प्रणाली पर असर पड़ सकता है। लंबी अवधि के स्वास्थ्य जोखिम विशेष रूप से  ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय रोग रजोनिवृत्ति के बाद देखने को मिलते है जिनका एक महिला के समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता के लिए जोखिम बड़ा असर होता हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस - ऑस्टियोपोरोसिस को भंगुर हड्डी भी कहते है, इस रोग में हड्डियों कम घनी, अधिक नाजुक और फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक होती है। एस्ट्रोजन हड्डी द्रव्यमान की रक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एस्ट्रोजेन की संकेत कोशिकाएं हड्डियों में टूट को रोकने में मदद करती है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाएं एस्ट्रोजन की कमी के कारण हड्डी द्रव्यमान को खो देती हैं। समय के साथ -साथ, हड्डी द्रव्यमान के नुकसान से हड्डी फ्रेक्चर होने का खतरा रहता हैं।

कोरोनरी धमनी की बीमारी - कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) या धमनियां हृदय की मांसपेशी के चारों ओर संकुचन या रुकावट से होता है। यह तब होता है, जब फैटी पट्टिका धमनी की दीवारों में बनाता है। इसका बनाना रक्त में कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर के साथ जुड़ा होता है। रजोनिवृत्ति के बाद, महिलाओं में कोरोनरी धमनी की बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है। यह जोखिम भी एस्ट्रोजन की हानि के साथ जुड़ा हो सकता है। एस्ट्रोजन रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्वस्थ स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। यह भी हृदय की मांसपेशियों को रक्त प्रवाह में सुधार और रक्त के थक्के कारकों को कम करता है अगर महिलाओं में सामान्य धमनियों के साथ शुरू होता है।


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