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महिलाएं इस 1 काम को छोड़कर सुधार सकती हैं अपना मानसिक स्वास्थ्य, करना है बेहद आसान

लेटेस्ट By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 09, 2019
महिलाएं इस 1 काम को छोड़कर सुधार सकती हैं अपना मानसिक स्वास्थ्य, करना है बेहद आसान

जर्नल सीएमएजे में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि पूर्ण रूप से शराब छोड़ना विशेषकर महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निष्कर्ष भारतीय लोगों पर भी लागू हो सकते हैं। 

अगर आप सोचते हैं कि शराब के एक या दो पेग यानी की साधारण रूप से शराब पीने से आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचेगा तो आपको फिर से सोचने की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि पूर्ण रूप से शराब छोड़ना विशेषकर महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। यहां साधारण रूप से शराब पीने का मतलब पुरुषों के लिए प्रति सप्ताह 14 ड्रिंक या उससे कम और महिलाओं के लिए सप्ताह में सात या उससे कम ड्रिंक है।   

अध्ययन में पाया गया कि वे पुरुष और महिलाएं, जो जिंदगी भर शराब से दूर रहते हैं उनमें अध्ययन की शुरुआत होने पर मानसिक स्वास्थ्य का स्तर बेहद अच्छा पाया गया।

जर्नल सीएमएजे में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि वे महिलाएं, जो साधारण रूप से शराब पीती हैं उनके मुकाबले शराब छोड़ने वाली महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में अनुकूल परिवर्तन देखे गए। हालांकि ये अध्ययन चीनी और अमेरिकी लोगों पर किया गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह निष्कर्ष भारतीय लोगों पर भी लागू हो सकते हैं।

गुरुग्राम के नारायाणा सुपर स्पेशयालिटी अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंस्लटेंट नवीन कुमार का कहना है कि शराब छोड़ने के मात्र एक महीने में आपकी आंत और मोटाबॉलिक प्रणाली की मरम्मत और इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। यह आपके लंबे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और एक स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

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कुमार के मुताबिक, शराब से दूरी विशेषकर महिलाओं के लिए स्वस्थ मस्तिष्क, मजबूत इम्यून सिस्टम,  ह्रदय और लिवर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि शराब का प्रभाव महिलाओं पर अधिक गंभीर होता है। शराब पीने से महिलाओं के मेटाबॉलिज्म और एस्ट्रोजन का स्तर प्रभावित होता है।

दरअसल कोई भी व्यक्ति इसके परहेज से लाभ उठा सकता है क्योंकि शराब के संभावित लाभ इसके ज्ञात नुकसान और जोखिमों से आगे नहीं बढ़ते हैं।

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वहीं नोएडा के जेपी अस्पताल सीनियर कंस्लटेंट मृणम्य कुमार दास का कहना है कि शराब इस तरीके से काम करती है कि हमारा सेंट्रल नर्वस सिस्टम धीमा हो जाता है और हमारा मूड बहकने लगता है क्योंकि यह हमारे मस्तिष्क में सोरोटोनिन के स्तर को कम कर देती है। शराब का नियमित रूप से सेवन हमारे मस्तिष्क की कैमिस्ट्री में परिवर्तन कर देता है और इसके परिणामस्वरूप हमारा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। 

उन्होंने कहा, ''मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ाने और इन सभी हालात के समाधान के लिए  शराब से दूरी बेहद जरूरी है।''

(इनपुट-एजेंसी)

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