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गर्भधारण न कर पाने की समस्या

गर्भावस्‍था By लक्ष्मण सिंह , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 10, 2012
गर्भधारण न कर पाने की समस्या

गर्भधारण न कर पाने की समस्या की कई अलग वजहें हो सकती हैं। इस लेख को पढ़ें और गर्भधारण न कर पाने की समस्या के बारे में जानें।

Quick Bites
  • अधिक तनाव और बदलती जीवनशैली है इन्फर्टीलिटी का एक कारण।
  • महिला में स्त्रीबीजजनन चक्र में गड़बड़ी भी है इसका बड़ा कारण।
  • गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी हो सकती है इन्फर्टीलिटी।
  • डिप्रेशन की दवाइयां लेते हैं तो भी आ सकती है गर्भधारण में अड़चन।

बदलती जीवनशैली और भाग दौड़ भरी दिनचर्या के बीच एक नयी समस्या समाज में अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है। यह है फर्टिलिटी की समस्या, जिसके कारण अनेक दंपती जीवन के एक सबसे बड़े सुख को भोगने से वंचित रह जाते हैं। गर्भधारण न कर पाने के कई कारण हो सकते है। चलिए इस लेख के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि क्या और क्यों होती है गर्भधारण कर पाने में समस्याएं।

garbhdharan na kar pane ki samasya

अक्सर ऐसा मान लिया जाता है अगर विवाह के एक वर्ष के भीतर महिला गर्भवती नहीं होती तो उसमें या उसके पति में उर्वरता या फर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। लेकिन आजकल कई कारणों से संतान की ज़िम्मेदारी उठाने से पहले पति पत्नि गर्भनिरोधक तरीके अपनाकर एक दो वर्ष तक बच्चे के जन्म को टाल देते हैं। 

 

ऐसा करना गलत भी नहीं है। इसिलिए एक दो वर्षों तक या कुछेक मामलों में दो चार वर्षों तक बच्चे के बारे में न तो कोई उनसे कुछ कहता है ना ही कोई कुछ पूछता है, लेकिन उसके बाद उनके घरवाले उनपर लगातार जोर डालते जाते हैं कि वे जल्द से जल्द एक बच्चा पैदा करें और वंश को आगे बढ़ाएं।

 

इसके अलावा, आस-पड़ोस में तानेबाज़ी और अलग अलग संशय पैदा होते हैं और बेफिजूल की बातें शुरू हो जाती हैं  कि कहीं पत्नि बांझ तो नहीं, या पति के पुरुषत्व में कोई समस्या तो नहीं। हालांकि बड़े शहरों में इन बातो पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है क्योंकि सभी जानते हैं की शहरी लोग कई सालों तक परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाये रहते हैं जिसके कारण बच्चे का जन्म देर से होता है।  

 

गर्भधारण न कर पाने के कारण

गर्भ न धारण कर पाने के अनेकों कारण हो सकते हैं। अगर ऊसरता या इन्फर्टीलिटी का कारण पुरुष पाया जाता है, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं यह समस्या पुरुष में आवश्यकता से कम शुक्राणुओं के निर्माण से जुड़ी है। वहीं दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि पुरुष में शुक्राणु पर्याप्त मात्रा में निर्मित तो होते हैं, लेकिन वे महिला के अंडाणुओं तक पहुंच नहीं पाते हैं।



महिला में स्त्रीबीजजनन चक्र में गड़बड़ी भी ऊसरता की बहुत बड़ी वजह होती है। इस गड़बड़ी के कारण महिला के भीतर आवश्यक अण्डों का निर्माण नहीं होता या फिर अण्डों के निर्माण प्रक्रिया में भी गड़बड़ी हो सकती है। वे महिलाएं जो थाईरॉइड की समस्या से गुज़र चुकी होती हैं, उनमे स्त्रीबीजजनन प्रक्रिया बाधित हो जाती है और उनका गर्भ धारण करना ज़रा कठिन हो जाता है।

 

गर्भधारण न कर पाने की समस्या, गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब से भी जुडी हो सकती है। इन जगहों पर किसी भी प्रकार से हुई हानि के कारण गर्भाधान करना मुश्किल हो जाता है। बिना चिकित्सक की सलाह से प्रयोग की गई कुछ औषधियों के कारण भी पुरुष और महिला के शरीर पर प्रतिकूल असर हो सकता है, और जिससे उनमे जननक्षमता क्षीण हो सकती है । मदिरा के सेवन से भी गर्भ धारण के संयोग कम हो जाते हैं।   

 

महिला की उम्र भी गर्भ न धारण करने की बहुत बड़ी वजह बन सकती है। ऐसा माना जाता है कि 30 वर्ष की उम्र पार करने के बाद, औरत में गर्भ धारण करने के संयोग कम या ना के बराबर हो जाते हैं। और यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है अगर वो 35 वर्ष की उम्र पार कर लेती है। इनमे से अधिकतर महिलाएं गर्भ धारण करने के वैकल्पिक तरीकों की सहायता लेती हैं। कभी कभार पुरुष और महिला में ऊसरता के उचित कारण निर्धारित करना कठिन होता है । ऐसे मामलों में उन्हें प्रयास ज़ारी रखने की सलाह दी जाती है, और साथ में उन्हें इन विट्रो निषेचन की सलाह भी दी जाती है (इस प्रक्रिया के द्वारा अंडे को अंडाशय से हटाकर प्रयोगशाला  में शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है और निषेचित अंडे को महिला के गर्भ में रखा जाता है)। ऐसा भी कई बार होता है कि तनाव और गलत खान पान के कारण भी उपजाऊपन पर विपरीत असर पड़ता है, तो पुरुष और महिला के लिए यह अति आवश्यक हो जाता है  कि वे अपनी जीवन शैली का विश्लेषण करें और अगर ज़रुरत हो तो उसमे उचित बदलाव लाएं । 

        
कुछ खाद्य पदार्थ गर्भधारण के लिए वर्जित होते हैं। अगर आप गर्भवती होना चाहती हैं तो उन खाद्य पदार्थों को कुछ महीनो के लिए त्यागना पड़ेगा जैसे कच्चा पपीता इत्यादि।


गर्भधारण करने के लिए सही समय पर सहवास किया जाना भी जरुरी होता है। जिस चक्र में (यानि ओभूलेष्ण यानि डिंबोत्सर्जन के समय में) गर्भ धारण के लिए सहवास जरुरी होता है अगर उस समय आपने सहवास नहीं किया तो आपके गर्भवती होने के चांसेस न के बराबर हो जाते हैं। इसलिए अगर आप गर्भवती होना चाहती हैं तो उन दिनों सहवास करना न भूलें जिन दिनों आपके गर्भवती होने के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं।    


अगर आप डिप्रेशन यानि अवसाद की दवाइयां लेती हैं तो भी आपको गर्भधारण में अड़चन आ सकती है। इसलिए अगर आप गर्भवती होना चाहती हैं तो अपने चिकित्सक से मिलकर यह बात बताएं।

 

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Written by
लक्ष्मण सिंह
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 10, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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